चित्रधारित लेखन- ख़ाली घट ले हाथ में , तुझ को रही निहार । बदरा मेरी प्यास पर , कुछ तो कर उपकार।। -------ओंकार सिंह विवेक ...
आपके स्नेह-आशीष की अभिलाषा के साथ आज अपने जन्मदिन के अवसर पर एक ग़ज़ल के साथ आपसे मुखातिब हूँ : ग़ज़ल ...