July 30, 2019

दोहे:आओ करें विचार


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बढ़ चढ़ कर इस दौर में,माँगें सब अधिकार,
फ़र्ज़  निभाने  के  लिये, मगर  नहीं  तैयार।
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सच  मानो   संसार  में,  जीना   है   बेकार,
अगर कसौटी पर खरा, नहीं  रहा  किरदार।
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मिली नहीं हमको कभी, विश्वासों की छाँव,
छल छदमों की धूप में,झुलसा मन का गाँव।
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रहना  है  संसार  में, अगर  ख़ुशी  के  साथ,
विपदाओं से कीजिये, बढ़कर  दो  दो हाथ।
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रखता है  जो आदमी,  सच्चाई   का  मान,
उसके दिल में ही सदा, बसते  हैं  भगवान।
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---------ओंकार सिंह 'विवेक'
            रामपुर(उ0प्र0)

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