July 6, 2019

दोहे: लो आयी बरसात

दोहे: लो आयी बरसात

सूर्य  देव  के ताप को,  देकर  आखिर मात,
मन हरषाने आ गयी, लो  रिमझिम बरसात।

पुरवाई  के साथ  में,  जब  आयी   बरसात,
फसलें  मुस्काने  लगीं, हँसे  पेड़   के  पात।

मेंढ़क  टर- टर  बोलते,  भरे  तलैया  - कूप,
सबके मन को भा गया, वर्षा  का  यह रूप।

खेतों में  जल  देखकर, छोटे -  बड़े  किसान,
चर्चा  यह  करने   लगे, चलो   लगायें   धान।

कभी-कभी वर्षा  यहाँ,  धरे  रूप  विकराल,
कोप दिखाकर बाढ़ का, जीना  करे  मुहाल।

---(सर्वाधिकार सुरक्षित)ओंकार सिंह'विवेक'

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