कैसी-कैसी ने'मत हमको जंगल देते हैं।
आज बना है मानव उनकी ही जाँ का दुश्मन,
जीवन भर जो पेड़ उसे मीठे फल देते हैं।
--- ओंकार सिंह विवेक
(सर्वाधिकार सुरक्षित)
कैसी-कैसी ने'मत हमको जंगल देते हैं।
आज बना है मानव उनकी ही जाँ का दुश्मन,
जीवन भर जो पेड़ उसे मीठे फल देते हैं।
--- ओंकार सिंह विवेक
(सर्वाधिकार सुरक्षित)
और हमारी क़िस्मत,हमको रूखी-सूखी खानी है।
जनता की आवाज़ दबाने वालो इतना ध्यान रहे,
कल पैदल भी हो सकते हो आज अगर सुल्तानी है।
प्यार लुटाया है मौसम ने जी भरकर इस पर अपना,
ऐसे ही थोड़ी धरती की चूनर धानी-धानी है।
फ़स्ल हुई चौपट बारिश से और धेला भी पास नहीं,
कैसे क़र्ज़ चुके बनिये का मुश्किल में रमज़ानी है।
खिलने को घर के गमलों में चाहे जितने फूल खिलें,
जंगल के फूलों-सी लेकिन बात न उनमें आनी है।
एक झलक पाना भी अब तो सूरज की दुश्वार हुआ,
जाने ज़ालिम कुहरे ने ये कैसी चादर तानी है।
बात न सोची जाए किसी की राह में काँटे बोने की,
ये सोचें फूलों से कैसे सबकी राह सजानी है।
--- ओंकार सिंह विवेक
(सर्वाधिकार सुरक्षित)
यह☝️ विशाल धमेख स्तूप है। यह वह पवित्र स्थान है, जहां ज्ञान प्राप्ति के बाद भगवान बुद्ध ने अपने पांच शिष्यों को प्रथम उपदेश दिया था।धमेख स्तूप: एक विशाल और ठोस गोलाकार स्तूप है, जो उस स्थान को चिह्नित करता है जहाँ बुद्ध बैठे थे। इसे गुप्त काल के दौरान और अधिक विकसित और विस्तारित किया गया था।धमेख स्तूप के पास ही सम्राट अशोक द्वारा स्थापित एक भव्य स्तंभ (अशोक स्तंभ) था (जिसका शीर्ष अब सारनाथ संग्रहालय में है)जो आज भी इस स्थल के महत्व को दर्शाता है।भारत का राष्ट्रीय चिह्न जो हमारे नोटों में भी दर्शाया गया है इसी अशोक स्तंभ से लिया गया है।हम लोग सारनाथ (वाराणसी) में पीपल के वृक्ष के पास स्थित भगवान बुद्ध को समर्पित बौद्ध मंदिर (विशेषकर मूलगंध कुटी विहार) में दर्शन करने के लिए पहुँचे। यह उसी पवित्र स्थान के निकट है जहाँ भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश दिया था।सन 1931 में निर्मित यह मंदिर ध्यान और बौद्ध धर्म के 'धर्मचक्र प्रवर्तन' (प्रथम उपदेश) की याद दिलाता है।
आलमी शोहरत-याफ़्ता शायर ताहिर फ़राज़ साहब नहीं रहे
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देश और दुनिया में अपनी एहसासात से लबरेज़ शायरी से धूम मचाने वाले रामपुर के आलमी शोहरत-याफ़्ता शायर जनाब ताहिर फ़राज़ साहब का 24 जनवरी,2026 को मुंबई में दिल का दौरा पड़ने से असामयिक निधन हो गया।परिजनों के अनुसार उनका अंतिम संस्कार मुंबई में ही सांताक्रुज़ क़ब्रिस्तान में किया गया।उनके असामयिक निधन पर ज़िंदगी की हक़ीक़त बयान करता हुआ उनका यह शेर बहुत याद आ रहा है :
ज़िन्दगी तेरे त'आक़ुब में हम,
इतना चलते हैं कि मर जाते हैं।
-- ताहिर फ़राज़
ताहिर फ़राज़ साहब उत्तर प्रदेश साहित्य सभा रामपुर इकाई के संरक्षक तथा सभा के संयोजक सुरेन्द्र अश्क रामपुरी के उस्ताद भी थे। साहित्य सभा के सदस्यों ने शोक सभा का आयोजन करके 25 जनवरी,2026 को मरहूम ताहिर फ़राज़ साहब को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।सभा के अध्यक्ष ओंकार सिंह विवेक ने कहा कि उत्तर प्रदेश साहित्य सभा की स्थानीय इकाई को फ़राज़ साहब का मार्गदर्शन सदैव राह दिखाता रहेगा।साहित्यिक कार्यक्रमों में कविता और शायरी के हवाले से अक्सर आपसे सबको बहुत क़ीमती राय मिलती रहती थी। सभा के संयोजक सुरेन्द्र अश्क रामपुरी तथा सचिव राजवीर सिंह ने कहा कि ताहिर फ़राज़ साहब एक अच्छे शायर होने के साथ साथ एक बेहतरीन इंसान भी थे। उनकी विनम्रता और सदाशयता हमेशा याद आती रहेगी।हिंदुस्तान के अलावा अमरीका,यूरोप सहित अनेक खाड़ी देशों में ताहिर फ़राज़ साहब का मुशायरों में जाना होता रहता था।शोक सभा में सदस्यों ने ताहिर फ़राज़ साहब के ग़ज़ल संग्रह 'काश' तथा 'कश्कोल' में प्रकाशित ग़ज़लों का पाठ करके उनका स्मरण किया।
ताहिर फ़राज़ साहब हमेशा देश और दुनिया में प्यार और मुहब्बत को बढ़ाने की बातें किया करते थे।यही बातें वह अपनी शायरी के माध्यम से लोगों तक पहुँचाने का काम उम्र भर करते रहे।उनकी यह पंक्तियाँ देखें :
मौत सच है ये बात अपनी जगह,
ज़िंदगी का सिंगार करते रहो।
नफ़ा नुक़सान होता रहता है,
प्यार का कारोबार करते रहो।
-- ताहिर फ़राज़
शोक सभा में उपरोक्त के अतिरिक्त सुधाकर सिंह परिहार,प्रदीप राजपूत माहिर,सोहन लाल भारती,पतराम सिंह,शिवकुमार चन्दन,सुमित मीत,गौरव नायक, अनमोल रागिनी चुनमुन, फ़ैसल मुमताज़,नवीन पांडे, बलवीर सिंह, सुनीता खन्ना,पुन्नू तथा आस्था खन्ना आदि ने अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए ताहिर फ़राज़ साहब के साथ रहे अपने अनुभवों कोअश्रुपूरित नेत्रों से व्यक्त किया।
---ओंकार सिंह विवेक,अध्यक्ष
उत्तर प्रदेश साहित्य सभा रामपुर इकाई
सम्मानित समाचार पत्र 'दैनिक जागरण' ने अपने दिनांक 26 जनवरी,2026 के अंक में श्रद्धांजलि सभा के समाचार को विस्तार से प्रकाशित किया इसके लिए हम संपादक मंडल का हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं।
ऋतुराज वसंत के स्वागत में राजीव कुमार शर्मा के निवास पर हुई काव्य गोष्ठी
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सूरज की बढ़ती चमक तथा प्रकृति के खिले रूप के संग दस्तक दे रहे ऋतुराज वसंत के आगमन तथा ज्ञान,कला और संगीत की देवी माँ शारदे के प्राकट्य दिवस के अवसर पर एकता विहार कॉलोनी में राजीव कुमार शर्मा जी के आवास पर एक शानदार काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।
बताते चलें कि राजीव कुमार शर्मा जी साहित्य प्रेमी होने के साथ एक अच्छे रचनाकार भी हैं तथा प्रतिवर्ष वसंत पंचमी के दिन अपने आवास पर कवि गोष्ठी का आयोजन कराते हैं।कवियों को सम्मान सहित जलपान आदि कराकर परिजनों के साथ कविताओं का रसास्वादन करते हैं।
(मेज़बान राजीव कुमार शर्मा जी अपने पुत्र उत्कर्ष सारस्वत के साथ)कवियों ने वसंत के स्वागत,माँ शारदे की स्तुति तथा अन्य समसामयिक विषयों पर अपनी शानदार रचनाएँ सुनाकर आमंत्रित श्रोताओं को आनंदित किया। गोष्ठी की अध्यक्षता अशोक सक्सैना जी ने की।गोविंद शर्मा तथा राजीव कुमार शर्मा जी क्रमशः मुख्य अतिथि तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में विद्यमान रहे।
मां शारदे के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के उपरांत विनोद कुमार शर्मा जी की सरस्वती वंदना से गोष्ठी का शुभारंभ हुआ।गोष्ठी का संचालन कर रहे प्रदीप राजपूत माहिर ने काव्य पाठ हेतु पतराम सिंह जी को आमंत्रित किया तो उन्होंने शारदेय का आह्वान करते हुए कहा :
वीणा की झंकार बिखेरो मां अक्षर अक्षर दीप जले,
मेरी लेखनी को गति दो माँ नव विचार के फूल खिलें।
गोष्ठी के मेज़बान राजीव कुमार शर्मा ने अपने चिर परिचित अंदाज़ में प्रभावशाली अभिव्यक्ति देते हुए कहा
माँ से करुणा स्नेह दया,
ममता शुचि और सद्ज्ञान लिए
दुधमुंहा धरा पर आया था
कोमल निश्चल मन साथ लिए।
ओंकार सिंह विवेक ने ऋतुराज वसंत के स्वागत में अपना मुक्तक पढ़ते हुए कहा :
फूलों ने उपवन को महकाया तो है,
राग सुरीला कोयल ने गाया तो है।
होता है ज़ाहिर सूरज के तेवर से,
ऋतुओं का राजा वसंत आया तो है।
सोहन लाल भारती ने अपनी भाव पूर्ण प्रस्तुति में नेक सलाह देते हुए कहा कहा :
ख़ुद को सुधारो जग ख़ुद सुधर जाएगा
ईर्ष्या द्वेष व लोभ त्यागो, आपका स्वास्थ्य भी सुधरेगा
सब ख़ुद ही ठीक हो जाएगा।
प्रदीप राजपूत माहिर जी ने अपने इस मार्मिक शेर से सबकी वाही वाही लूटी :
क्या निराले खेल हैं तक़दीर के,
श्वान भी हक़दार हैं अब खीर के।
विनोद कुमार शर्मा ने अपने मधुर कंठ से शारदे माँ का आशीष मांगते हुए भावपूर्ण प्रस्तुति दी :
अंतर्मन तमस भरा है माँ,निज कृपा रश्मि की वृष्टि करो।
पावन कर दो निज आशिष से,दे दो जग को अविरल वाणी।
सुमित सिंह मीत ने अपना यह शानदार शेर पढ़ा :
घर का आंगन है छोटा मगर रहने वालों का दिल है बड़ा,
खुशबुएं प्यार की हैं यहां नफरतों का बसेरा नहीं।
गौरव नायक ने अपनी दमदार प्रस्तुति देते हुए कहा
समुंदर ग़म का भी कितना बड़ा है,
जिसे देखो वही डूबा हुआ है।
उत्कर्ष सारस्वत ने अपनी भाव अभिव्यक्ति देते हुए कहा :
जब आता चुनाव रोज़ दीवाली होती,
वोटर के घर रोज़ नई एक टोली होती।
सचिन सिंह सार्थक ने अपनी सार्थक प्रस्तुति देते हुए कहा
तेजस्वी नायक ओजस्वी प्रखर हमारे नेता जी,
बरसों बीते मगर दिलों में अमर हमारे नेता जी।
उपरोक्त के अतिरिक्त गोष्ठी में सीताराम शर्मा,सुनील कुमार वैश्य, दीपक गुप्ता एडवोकेट तथा करुणा शर्मा---- आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। अंत में सुस्वादु जलपान के बाद आयोजक राजीव कुमार शर्मा जी ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम समापन की घोषणा की।
गोष्ठी की शानदार कवरेज के लिए हम सम्मानित समाचार पत्रों हिन्दुस्तान, अमर उजाला तथा अमृत विचार के प्रतिनिधियों का हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं 🙏🙏
नमस्कार मित्रो 🌹🌹🙏🙏 आज यात्रा के दौरान एक जंगल से गुज़रना हुआ। हरियाली और फलों से लदे हुए वृक्षों को देखकर दिल बहुत ख़ुश हुआ...