March 29, 2026
प्रसंगवश सृजित रचनाएँ
March 21, 2026
चतुर सुजान
जिसकी बनती हो बने, सूबे में सरकार।
हर दल में हैं एक-दो, उनके रिश्तेदार।।
उनके रिश्तेदार, रोब है सचमुच भारी।
सब साधन हैं पास,नहीं कोई लाचारी।
अब उनकी दिन-रात,सभी से गाढ़ी छनती।
बन जाए सरकार,यहाँ हो जिसकी बनती।।
-- ओंकार सिंह विवेक(सर्वाधिकार सुरक्षित)
March 8, 2026
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस विशेष
March 3, 2026
👩🦯👩🦯होली पर इस बार 🖍️🖍️
प्रस्तुत हैं होली पर कुछ दोहे
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सैयाँ जी ने घेरकर, डारो ऐसो रंग।
नस-नस में सिहरन हुई,भीज गयो हर अंग।।
कर में पिचकारी लिए,पीकर थोड़ी भंग।
देवर जी डारन चले,भौजाई पर रंग।।
महँगाई की मार से,टूट गई हर आस।
रमुआ की इस बार भी,होली रही उदास।।
सजनी को कैसे फबे,होली का त्योहार।
बैठे हों जब साजना, सात समुंदर पार।।
है बस इतनी कामना, होली पर हर बार।
करें सभी अपनत्व के, रंगों की बौछार।।
©️ ओंकार सिंह विवेक
February 23, 2026
लीजिए पेश है नई ग़ज़ल
February 20, 2026
प्रसंगवश
कैसी-कैसी ने'मत हमको जंगल देते हैं।
आज बना है मानव उनकी ही जाँ का दुश्मन,
जीवन भर जो पेड़ उसे मीठे फल देते हैं।
--- ओंकार सिंह विवेक
(सर्वाधिकार सुरक्षित)
February 15, 2026
उनके हिस्से चुपड़ी रोटी ------
और हमारी क़िस्मत,हमको रूखी-सूखी खानी है।
जनता की आवाज़ दबाने वालो इतना ध्यान रहे,
कल पैदल भी हो सकते हो आज अगर सुल्तानी है।
प्यार लुटाया है मौसम ने जी भरकर इस पर अपना,
ऐसे ही थोड़ी धरती की चूनर धानी-धानी है।
फ़स्ल हुई चौपट बारिश से और धेला भी पास नहीं,
कैसे क़र्ज़ चुके बनिये का मुश्किल में रमज़ानी है।
खिलने को घर के गमलों में चाहे जितने फूल खिलें,
जंगल के फूलों-सी लेकिन बात न उनमें आनी है।
एक झलक पाना भी अब तो सूरज की दुश्वार हुआ,
जाने ज़ालिम कुहरे ने ये कैसी चादर तानी है।
बात न सोची जाए किसी की राह में काँटे बोने की,
ये सोचें फूलों से कैसे सबकी राह सजानी है।
--- ओंकार सिंह विवेक
(सर्वाधिकार सुरक्षित)
February 8, 2026
भावों की अभिव्यक्ति
February 6, 2026
सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल (बनारस यात्रा भाग -3/अंतिम कड़ी )
यह☝️ विशाल धमेख स्तूप है। यह वह पवित्र स्थान है, जहां ज्ञान प्राप्ति के बाद भगवान बुद्ध ने अपने पांच शिष्यों को प्रथम उपदेश दिया था।धमेख स्तूप: एक विशाल और ठोस गोलाकार स्तूप है, जो उस स्थान को चिह्नित करता है जहाँ बुद्ध बैठे थे। इसे गुप्त काल के दौरान और अधिक विकसित और विस्तारित किया गया था।धमेख स्तूप के पास ही सम्राट अशोक द्वारा स्थापित एक भव्य स्तंभ (अशोक स्तंभ) था (जिसका शीर्ष अब सारनाथ संग्रहालय में है)जो आज भी इस स्थल के महत्व को दर्शाता है।भारत का राष्ट्रीय चिह्न जो हमारे नोटों में भी दर्शाया गया है इसी अशोक स्तंभ से लिया गया है।हम लोग सारनाथ (वाराणसी) में पीपल के वृक्ष के पास स्थित भगवान बुद्ध को समर्पित बौद्ध मंदिर (विशेषकर मूलगंध कुटी विहार) में दर्शन करने के लिए पहुँचे। यह उसी पवित्र स्थान के निकट है जहाँ भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश दिया था।सन 1931 में निर्मित यह मंदिर ध्यान और बौद्ध धर्म के 'धर्मचक्र प्रवर्तन' (प्रथम उपदेश) की याद दिलाता है।
February 4, 2026
उत्तर प्रदेश साहित्य सभा रामपुर इकाई की ओर से मशहूर शायर ताहिर फ़राज़ साहब की श्रद्धांजलि सभा
आलमी शोहरत-याफ़्ता शायर ताहिर फ़राज़ साहब नहीं रहे
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देश और दुनिया में अपनी एहसासात से लबरेज़ शायरी से धूम मचाने वाले रामपुर के आलमी शोहरत-याफ़्ता शायर जनाब ताहिर फ़राज़ साहब का 24 जनवरी,2026 को मुंबई में दिल का दौरा पड़ने से असामयिक निधन हो गया।परिजनों के अनुसार उनका अंतिम संस्कार मुंबई में ही सांताक्रुज़ क़ब्रिस्तान में किया गया।उनके असामयिक निधन पर ज़िंदगी की हक़ीक़त बयान करता हुआ उनका यह शेर बहुत याद आ रहा है :
ज़िन्दगी तेरे त'आक़ुब में हम,
इतना चलते हैं कि मर जाते हैं।
-- ताहिर फ़राज़
ताहिर फ़राज़ साहब उत्तर प्रदेश साहित्य सभा रामपुर इकाई के संरक्षक तथा सभा के संयोजक सुरेन्द्र अश्क रामपुरी के उस्ताद भी थे। साहित्य सभा के सदस्यों ने शोक सभा का आयोजन करके 25 जनवरी,2026 को मरहूम ताहिर फ़राज़ साहब को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।सभा के अध्यक्ष ओंकार सिंह विवेक ने कहा कि उत्तर प्रदेश साहित्य सभा की स्थानीय इकाई को फ़राज़ साहब का मार्गदर्शन सदैव राह दिखाता रहेगा।साहित्यिक कार्यक्रमों में कविता और शायरी के हवाले से अक्सर आपसे सबको बहुत क़ीमती राय मिलती रहती थी। सभा के संयोजक सुरेन्द्र अश्क रामपुरी तथा सचिव राजवीर सिंह ने कहा कि ताहिर फ़राज़ साहब एक अच्छे शायर होने के साथ साथ एक बेहतरीन इंसान भी थे। उनकी विनम्रता और सदाशयता हमेशा याद आती रहेगी।हिंदुस्तान के अलावा अमरीका,यूरोप सहित अनेक खाड़ी देशों में ताहिर फ़राज़ साहब का मुशायरों में जाना होता रहता था।शोक सभा में सदस्यों ने ताहिर फ़राज़ साहब के ग़ज़ल संग्रह 'काश' तथा 'कश्कोल' में प्रकाशित ग़ज़लों का पाठ करके उनका स्मरण किया।
ताहिर फ़राज़ साहब हमेशा देश और दुनिया में प्यार और मुहब्बत को बढ़ाने की बातें किया करते थे।यही बातें वह अपनी शायरी के माध्यम से लोगों तक पहुँचाने का काम उम्र भर करते रहे।उनकी यह पंक्तियाँ देखें :
मौत सच है ये बात अपनी जगह,
ज़िंदगी का सिंगार करते रहो।
नफ़ा नुक़सान होता रहता है,
प्यार का कारोबार करते रहो।
-- ताहिर फ़राज़
शोक सभा में उपरोक्त के अतिरिक्त सुधाकर सिंह परिहार,प्रदीप राजपूत माहिर,सोहन लाल भारती,पतराम सिंह,शिवकुमार चन्दन,सुमित मीत,गौरव नायक, अनमोल रागिनी चुनमुन, फ़ैसल मुमताज़,नवीन पांडे, बलवीर सिंह, सुनीता खन्ना,पुन्नू तथा आस्था खन्ना आदि ने अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए ताहिर फ़राज़ साहब के साथ रहे अपने अनुभवों कोअश्रुपूरित नेत्रों से व्यक्त किया।
---ओंकार सिंह विवेक,अध्यक्ष
उत्तर प्रदेश साहित्य सभा रामपुर इकाई
सम्मानित समाचार पत्र 'दैनिक जागरण' ने अपने दिनांक 26 जनवरी,2026 के अंक में श्रद्धांजलि सभा के समाचार को विस्तार से प्रकाशित किया इसके लिए हम संपादक मंडल का हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं।
January 31, 2026
एक ग़ज़ल कुछ अलग तरह के क़ाफ़ियों के साथ
January 27, 2026
भारतीय सभ्यता, संस्कृति एवं इतिहास प्रतियोगिता पुरस्कार विजेता सम्मान समारोह, मुरादाबाद
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शुभ प्रभात मित्रो 🌹🌹🙏🙏 संगठन में ही शक्ति निहित होती है यह बात हम बाल्यकाल से ही एक नीति कथा के माध्यम से जानते-पढ़ते और सीखते आ रहे हैं...