February 6, 2026

सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल (बनारस यात्रा भाग -3/अंतिम कड़ी )

(अब तक आपने पढ़ा : हमारे ग्रुप के बनारस यात्रा संस्मरण में बनारस के काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन, काल भैरव के दर्शन,नमो घाट भ्रमण तथा दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती आदि के बारे में।अब इस यात्रा संस्मरण की अंतिम कड़ी में पढ़िए सारनाथ यात्रा के बारे में 👇)

बनारस भ्रमण कार्यक्रम के अंतिम दिन हम लोगों को बनारस से लगभग दस किलोमीटर दूर प्रसिद्ध बौद्ध तीर्थ स्थल सारनाथ के लिए निकलना था।दो टैक्सियों की व्यवस्था करके हम लोग सारनाथ पहुँचे।बनारस में जैसी तंग गलियों से गुज़रना हुआ उसके विपरीत सारनाथ में बहुत चौड़ी सड़कें तथा खुलापन सबको बहुत अच्छा लगा।
वहाँ पहुँचकर सबसे पहले हमारे ग्रुप ने जैन मंदिर के दर्शन किए।सारनाथ में सन 1824 में निर्मित दिगंबर जैन मंदिर वह स्थान है जहाँ कहा जाता है कि जैन धर्म के 11वें तीर्थंकर श्री श्रेयांशनाथ जी का जन्म हुआ था और इसी कारण यह मंदिर 'श्रेयांशनाथ जैन मंदिर' के नाम से भी प्रसिद्ध है। 
जैन मंदिर के दर्शन करने के उपरांत हम लोग धमेख स्तूप तथा बुद्ध का विशाल मंदिर देखने गए।

यह☝️ विशाल धमेख स्तूप है। यह वह पवित्र स्थान है, जहां ज्ञान प्राप्ति के बाद भगवान बुद्ध ने अपने पांच शिष्यों को प्रथम उपदेश दिया था।धमेख स्तूप: एक विशाल और ठोस गोलाकार स्तूप है, जो उस स्थान को चिह्नित करता है जहाँ बुद्ध बैठे थे। इसे गुप्त काल के दौरान और अधिक विकसित और विस्तारित किया गया था।धमेख स्तूप के पास ही सम्राट अशोक द्वारा स्थापित एक भव्य स्तंभ (अशोक स्तंभ) था (जिसका शीर्ष अब सारनाथ संग्रहालय में है)जो आज भी इस स्थल के महत्व को दर्शाता है।भारत का राष्ट्रीय चिह्न जो हमारे नोटों में भी दर्शाया गया है इसी अशोक स्तंभ से लिया गया है।हम लोग सारनाथ (वाराणसी) में पीपल के वृक्ष के पास स्थित भगवान बुद्ध को समर्पित बौद्ध मंदिर (विशेषकर मूलगंध कुटी विहार) में दर्शन करने के लिए पहुँचे। यह उसी पवित्र स्थान के निकट है जहाँ भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश दिया था।सन 1931 में निर्मित यह मंदिर ध्यान और बौद्ध धर्म के 'धर्मचक्र प्रवर्तन' (प्रथम उपदेश) की याद दिलाता है। 

मंदिर में बुद्ध की एक सुंदर प्रतिमा और जापानी चित्रकार कोसू ओकुसा द्वारा बनाई गई बुद्ध के जीवन को दर्शाने वाले भित्तिचित्र (frescoes) हैं।
 यहाँ लगाया गया पीपल का वृक्ष बोधगया से लाई गई बोधि वृक्ष की एक शाखा का ही रूप है। यहाँ अवसर का लाभ उठाते हुए ग्रुप के साथियों ने बौद्ध भिक्षु के साथ फोटो भी खिंचवाए।
 
 यह स्थान बौद्ध अनुयायियों के लिए आध्यात्मिक शांति, ध्यान और भगवान बुद्ध तथा बोधिवृक्ष की पूजा का केंद्र है।मूलगंध कुटी विहार: यह वह स्थान है जहाँ बुद्ध के ध्यान लगाने की मान्यता है। इसके पास ही प्राचीन काल के अन्य कई स्तूप और मठों के अवशेष (खंडहर) स्थित हैं।यह स्थान हिरण उद्यान के नाम से जाना जाता है और यहां का वातावरण आज भी अत्यंत शांतिपूर्ण और सुकून भरा है, जो पर्यटकों और बौद्ध भिक्षुओं को ध्यान के लिए आकर्षित करता है।यह स्थान बौद्ध धर्म के केंद्र के रूप में सदियों से प्रसिद्ध रहा है, जहाँ की चीनी यात्री ह्वेन त्सांग ने भी यात्रा की थी अतः इसका एक ऐतिहासिक महत्व है।वर्तमान में यह पुरातात्विक सर्वेक्षण (ASI) के अंतर्गत एक संरक्षित स्थल है, जहां लोग इस ऐतिहासिक घटना को याद करने और आध्यात्मिक शांति पाने के लिए आते हैं। वर्ष भर यहाँ दर्शनार्थियों की ख़ासी भीड़ रहती है।

भगवान बुद्ध के प्रमुख मंदिर के समीप ही प्रसिद्ध डियर पार्क है।इसमें वर्तमान में मुख्य रूप से चितकबरा हिरण तथा दुर्लभ काला हिरण मौजूद हैं। इसके अलावा,पार्क में एमू ,मगरमच्छ ,कछुए और विभिन्न प्रकार के पक्षी, जैसे कि पेंटेड स्टॉर्क (रंगीन सारस) और व्हाइट नेक्ड स्टॉर्क भी देखे जा सकते हैं। 
पक्षी और अन्य जीवों के लिए बाड़े बने हुए हैं।यहाँ पेलिकन व स्टॉर्क प्रजाति के पक्षी भी निवास करते हैं।
पार्क लगभगर 33 एकड़ में फैला हुआ है,जहाँ तालाब और घने पेड़-पौधे हैं,जो इसे एक शांत और सुंदर मिनी चिड़ियाघर बनाते हैं।बच्चों ने यहाँ जमकर मस्ती की।

सारनाथ में दुर्लभ ऐतिहासिक चीज़ें देखने को मिल रही थीं।सभी साथी इस प्रसिद्ध ऐतिहासिक तथा धार्मिक स्थल की यात्रा करके स्वयं को धन्य समझ रहे थे।सभी ने सारनाथ संग्रहालय का रुख़ किया।यह संग्रहालय भारत का सबसे पुराना पुरातात्विक संग्रहालय है जो 1910 में स्थापित किया गया था। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा सारनाथ की खुदाई से मिली लगभग 6,832 से अधिक बौद्ध मूर्तियों और कलाकृतियों को इस संग्रहालय में संरक्षित किया गया है। भारत का राष्ट्रीय प्रतीक सम्राट अशोक का चतुर्मुख स्तंभ यहीं रखा हुआ है। 
जैसा मैंने पहले भी उल्लेख किया कि यह वह स्थान है जहाँ भगवान बुद्ध ने अपना पहला उपदेश 'धर्मचक्रप्रवर्तन' दिया था,जो बौद्ध धर्म के चार पवित्र स्थलों में से एक है।
इस संग्रहालय में ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी से लेकर 12वीं शताब्दी ईस्वी तक की वस्तुएं हैं।इन्हें देखकर हमें अपने इतिहास और संस्कृति पर बहुत गर्व होता है।
अशोक का सिंह स्तंभ शीर्ष  इस संग्रहालय की सबसे महत्वपूर्ण कलाकृति है, जो पॉलिश किए गए बलुआ पत्थर से बनी है।
इसके अलावा'धर्मचक्र मुद्रा' में बैठे बुद्ध की प्रसिद्ध प्रतिमा भी विद्यमान है।बोधिसत्व,विभिन्न हिंदू देवताओं की मूर्तियां, और प्राचीन स्तूपों के अवशेष भी संग्रहालय में मौजूद हैं।संग्रहालय की इमारत को एक बौद्ध विहार (Monastery) की तरह डिज़ाइन किया गया है।
इस संग्रहालय को घूमने के लिए सबसे अच्छा समय सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे के बीच है (आमतौर पर यह शुक्रवार को बंद रहता है)। 
यह स्थान भारतीय इतिहास और बौद्ध धर्म की कलात्मक विरासत को देखने के लिए एक अनिवार्य स्थल है अतः मेरा अनुरोध है कि एक बार सपरिवार इस स्थल के दर्शन के लिए अवश्य आएँ।


भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधीन खुदाई वाले स्थल👇 के भ्रमण पर हमारे ग्रुप को जो अनुभूति हुई उसका आनंद शब्दों में बयान करना मुश्किल है।

 सारनाथ की खुदाई में मौर्य काल (तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व) से लेकर गुप्त काल (चौथी-छठी शताब्दी ईस्वी) तक की महत्वपूर्ण पुरावशेष प्राप्त हुए। प्रसिद्ध अशोक स्तंभ (सिंह शीर्ष),धमेख स्तूप, बौद्ध मठ,बुद्ध की प्रतिमाएं और विभिन्न मिट्टी के बर्तन आदि सभी आज भी बिल्कुल सुरक्षित हालत में देखकर बहुत आश्चर्य होता है। इन चीज़ों को देखकर उस काल की भवन निर्माण कला, सभ्यता तथा संस्कृति के बारे में सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। खुदाई में मिले अवशेष बौद्ध धर्म के प्रथम उपदेश स्थल के गौरवशाली इतिहास को दर्शाते हैं।प्राप्त बौद्ध विहारों के अंश तथा भवनों आदि के हिस्से और फर्श आदि की मज़बूती और सफ़ाई को देखकर ऐसा मालूम होता है मानों ये चीज़ें हाल ही में बनाई गई हों।
(ऊपर के सभी चित्र खुदाई वाले स्थल का भ्रमण करते हुए लिए गए) 
हमें सारनाथ में घूमते-घूमते शाम हो चुकी थी परंतु किसी भी साथी का मन यहाँ से वापस जाने का नहीं हो रहा था।परंतु रात को हमारी वाराणसी से रामपुर की वापसी की ट्रेन थी अतः सबने सारनाथ के सुंदर नज़ारे आँखों में बसाकर वापसी का सफ़र शुरू किया।
सारनाथ जैसे प्रसिद्ध बौद्ध स्थल के भ्रमण के पश्चात मैंने वहाँ का संक्षिप्त विवरण इस ब्लॉग पोस्ट में देने का प्रयास किया है।इस ऐतिहासिक स्थल की महत्ता और असली आनंद को तो आप इसका भ्रमण करके ही महसूस कर पाएंगें।अत: मेरा अनुरोध रहेगा कि कभी समय निकालकर इन स्थलों का भ्रमण अवश्य करें।
        --- ओंकार सिंह विवेक 



February 4, 2026

उत्तर प्रदेश साहित्य सभा रामपुर इकाई की ओर से मशहूर शायर ताहिर फ़राज़ साहब की श्रद्धांजलि सभा


आलमी शोहरत-याफ़्ता शायर ताहिर फ़राज़ साहब नहीं रहे

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देश और दुनिया में अपनी एहसासात से लबरेज़ शायरी से धूम मचाने वाले रामपुर के आलमी शोहरत-याफ़्ता शायर जनाब ताहिर फ़राज़ साहब का 24 जनवरी,2026 को मुंबई में दिल का दौरा पड़ने से असामयिक निधन हो गया।परिजनों के अनुसार उनका अंतिम संस्कार मुंबई में ही सांताक्रुज़ क़ब्रिस्तान में किया गया।उनके असामयिक निधन पर ज़िंदगी की हक़ीक़त बयान करता हुआ उनका यह शेर बहुत याद आ रहा है :

        ज़िन्दगी तेरे  त'आक़ुब में  हम,

        इतना चलते हैं कि मर जाते हैं।

                         -- ताहिर फ़राज़

ताहिर फ़राज़ साहब उत्तर प्रदेश साहित्य सभा रामपुर इकाई के संरक्षक तथा सभा के संयोजक सुरेन्द्र अश्क रामपुरी के उस्ताद भी थे। साहित्य सभा के सदस्यों ने शोक सभा का आयोजन करके 25 जनवरी,2026 को मरहूम ताहिर फ़राज़ साहब को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।सभा के अध्यक्ष ओंकार सिंह विवेक ने कहा कि उत्तर प्रदेश साहित्य सभा की स्थानीय इकाई को फ़राज़ साहब का मार्गदर्शन सदैव राह दिखाता रहेगा।साहित्यिक कार्यक्रमों में कविता और शायरी के हवाले से अक्सर आपसे सबको बहुत क़ीमती राय मिलती रहती थी। सभा के संयोजक सुरेन्द्र अश्क रामपुरी तथा सचिव राजवीर सिंह ने कहा कि ताहिर फ़राज़ साहब एक अच्छे शायर होने के साथ साथ एक बेहतरीन इंसान भी थे। उनकी विनम्रता और सदाशयता हमेशा याद आती रहेगी।हिंदुस्तान के अलावा अमरीका,यूरोप सहित अनेक खाड़ी देशों में ताहिर फ़राज़ साहब का मुशायरों में जाना होता रहता था।शोक सभा में सदस्यों ने ताहिर फ़राज़ साहब के ग़ज़ल संग्रह 'काश' तथा 'कश्कोल' में प्रकाशित ग़ज़लों का पाठ करके उनका स्मरण किया।

ताहिर फ़राज़ साहब हमेशा देश और दुनिया में प्यार और मुहब्बत को बढ़ाने की बातें किया करते थे।यही बातें वह अपनी शायरी के माध्यम से लोगों तक पहुँचाने का काम उम्र भर करते रहे।उनकी यह पंक्तियाँ देखें :

       मौत सच है ये बात अपनी जगह,

        ज़िंदगी  का  सिंगार  करते रहो।

        नफ़ा  नुक़सान  होता  रहता  है,

        प्यार  का  कारोबार  करते रहो।

                 -- ताहिर फ़राज़ 

शोक सभा में उपरोक्त के अतिरिक्त सुधाकर सिंह परिहार,प्रदीप राजपूत माहिर,सोहन लाल भारती,पतराम सिंह,शिवकुमार चन्दन,सुमित मीत,गौरव नायक, अनमोल रागिनी चुनमुन, फ़ैसल मुमताज़,नवीन पांडे, बलवीर सिंह, सुनीता खन्ना,पुन्नू तथा आस्था खन्ना आदि ने अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए ताहिर फ़राज़ साहब के साथ रहे अपने अनुभवों कोअश्रुपूरित नेत्रों से व्यक्त किया।

---ओंकार सिंह विवेक,अध्यक्ष

उत्तर प्रदेश साहित्य सभा रामपुर इकाई 

सम्मानित समाचार पत्र 'दैनिक जागरण' ने अपने दिनांक 26 जनवरी,2026 के अंक में श्रद्धांजलि सभा के समाचार को विस्तार से प्रकाशित किया इसके लिए हम संपादक मंडल का हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं।


January 31, 2026

एक ग़ज़ल कुछ अलग तरह के क़ाफ़ियों के साथ

नमस्कार मित्रो 🌹🌹🙏🙏

मेरी एक नए अंदाज़ की ग़ज़ल का आनंद लीजिए 
            ग़ज़ल 
             ****
शिकारे को  ख़ुशी क्या फ़ील  होगी?
जमी जब  ठंड  से डल  झील होगी।

तभी  तो  होगी शेरों  की  भी आमद,
जली  जब  फ़िक्र की  क़िंदील होगी।

अभी  संगीन    है    हालत नगर की,
अभी  कर्फ़्यू  में   कैसे   ढील  होगी।  

हमेशा  बस   वही  नफ़रत  उगलना,
तुम्हारी  फ़िक्र  कब   तब्दील  होगी।

करेगा   माल   में    कोई    मिलावट,
दुकाँ लेकिन  किसी  की सील होगी।
   
घटेगी   जुर्म     की     रफ़्तार    कैसे,
सिपाही-चोर  की  जब  डील  होगी।

सभी   फॉलो  करेंगे   फेसबुक   पर,
हमारी  वायरल  जब   रील    होगी। 
           --- ओंकार सिंह विवेक 


January 27, 2026

भारतीय सभ्यता, संस्कृति एवं इतिहास प्रतियोगिता पुरस्कार विजेता सम्मान समारोह, मुरादाबाद


    है प्रीति जहाँ की रीति सदा मैं गीत वहाँ के गाता हूँ,
    भारत का  रहने वाला हूँ भारत की बात सुनाता हूँ।
जब मैं भारतीय सभ्यता,संस्कृति तथा इतिहास पर यह ब्लॉग पोस्ट लिख रहा हूँ तो मुझे अपने देश का गौरव गान करती फ़िल्म 'पूरब पश्चिम' की ये पंक्तियाँ अनायास याद आ रही हैं।
भारतीय सभ्यता,संस्कृति और इतिहास को विश्व की प्राचीनतम और सबसे निरंतर जीवित सभ्यताओं में से एक माना जाता है।प्राप्त सूचनाओं के आधार पर इसका इतिहास लगभग 4,500 से 7,500 वर्ष से भी कहीं अधिक पुराना माना जाता है। सिंधु घाटी सभ्यता और वैदिक संस्कृति के साथ यह मिस्र व मेसोपोटामिया की समकालीन है,लेकिन उन सभ्यताओं के विपरीत भारतीय संस्कृति अमरता की विशेषता के साथ आज भी निरंतर जीवंत है।भारतीय सभ्यता और संस्कृति समस्त विश्व को अपना परिवार मानने की अवधारणा पर आधारित है।यह अपनी उदारता, विविधता और प्रेम व सहिष्णुता के लिए जानी जाती है, जिसने ज्ञान और अध्यात्म का प्रचार व प्रसार किया है। 
मगर अफ़सोस की बात है कि वर्तमान युग में हमारी नई पीढ़ी अपने अपनी सभ्यता और संस्कृति के प्रति उदासीन होती जा रही है। जीवन जीने की कला सिखाने वाले अपने प्राचीन धार्मिक ग्रंथों की शिक्षा से हमारा जैसे कोई वास्ता ही नहीं रह गया है।पाश्चात्य माहौल ने हमें दिशाहीन कर दिया है।यही कारण है कि नैतिक तथा आध्यात्मिक मूल्यों का निरंतर क्षरण हो रहा है।
ऐसे में कोई व्यक्ति या संस्था यदि भारतीय नागरिकों में अपनी सभ्यता,संस्कृति और इतिहास के प्रति प्रतियोगिता के माध्यम से रुचि पैदा करने का प्रयास करे तो आशा की एक किरण दिखाई देने लगती है।
जी हाँ,मैं बात कर रहा हूँ मुरादाबाद,उत्तर प्रदेश की SSG फाउंडेशन तथा इसके सर्वेसर्वा आदरणीय सुधीर गुप्ता एडवोकेट जी की जो पिछले दो वर्ष से राष्ट्रीय नहीं अपितु अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय सभ्यता,संस्कृति और इतिहास विषय पर वस्तुनिष्ठ प्रश्नों पर आधारित प्रतियोगिता के माध्यम से अपनी सभ्यता,संस्कृति तथा इतिहास के विषय में जागरूकता फैलाने की दिशा में बहुत बड़ा काम कर रहे हैं। 
(एडवोकेट सुधीर गुप्ता जी का स्वागत करते हुए MIT के निदेशक प्रोफेसर रोहित गर्ग जी)
(मैं एक कवि/साहित्यकार हूँ तथा अक्सर स्थानीय तथा बाहरी साहित्यिक कार्यक्रमों में सहभागिता करता रहता हूँ। आदरणीय सुधीर गुप्ता एडवोकेट जी के संरक्षण और सहयोग से आयोजित हुए कई साहित्यिक कार्यक्रमों में मुझे मुरादाबाद में भी सहभागिता का अवसर प्राप्त हुआ है अतः मैं उनके समाज सेवा के भाव तथा रुचियों को जानता हूँ। गुप्ता जी लोगों की प्रतिभा/ क्षमता को परखने तथा प्रोत्साहन देने में सदैव आगे रहते हैं।)
वर्ष, 2025 में इस प्रतियोगिता की series - 2 में मुझे भी प्रतिभाग करने का अवसर प्राप्त हुआ।प्रतिभाग करते समय इस प्रतियोगिता के आयोजन और संरचना के बारे में मुझे नज़दीक़ से जानने का अवसर मिला।प्रतियोगिता में तीन भागों में दस-दस दिन के अंतराल पर ऑनलाइन कुल 200 वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे गए।अंतिम भाग में कुछ सब्जेक्टिव प्रश्न भी पूछे गए। प्रश्नोत्तरी को इस प्रकार तैयार किया गया था कि कोई भी सीधे गूगल या AI की मदद से प्रश्नों के उत्तर तलाश न कर सके। इन प्रश्नों के सही उत्तर वही प्रतिभागी दे सकते थे जिन्होंने भारतीय सभ्यता, संस्कृति और इतिहास तथा प्राचीन धार्मिक ग्रंथों का गंभीरता से अध्ययन किया हो।
भारतीय सभ्यता, संस्कृति और इतिहास विषय पर आधारित इस प्रतियोगिता में भारत के 19 राज्यों सहित USA,UK,UAE,Sri Lanka, Nepal,Bangladesh आदि देशों के प्रतिभागियों ने भी बढ़ चढ़कर हिस्सेदारी की जो भारत के लिए गौरव की बात है।

 इस प्रतियोगिता का परिणाम घोषित हुआ तो 159 विजेताओं की सूची में संयोग से मैं भी अपना नाम दर्ज कराने में सफल रहा।इस सन्दर्भ में सावित्री देवी शिव नारायण गुप्ता फाउंडेशन ने एमआईटी सभागार में विजेताओं के सम्मान में 17 जनवरी ,2026 को एक भव्य समारोह आयोजित करके उपस्थित 70 प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।
मुख्य अतिथि डॉ. विशेष गुप्ता और अन्य अतिथियों ने मां सरस्वती के समक्ष दीप जलाकर कार्यक्रम की शुरुआत की। 
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉक्टर विशेष गुप्ता,पूर्व अध्यक्ष राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने अपने उद्वोधन में भारतीय सभ्यता,संस्कृति और इतिहास की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए माता पिता से अपने बच्चों को संस्कारवान बनाने की अपील की। उन्होंने एडवोकेट सुधीर गुप्ता जी के इन सदप्रयासों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।
इस प्रतियोगिता के आयोजन में महत्वपूर्ण तकनीकी भूमिका निभाने वाले डॉक्टर नीलाक्ष शील,प्रोफेसर कंप्यूटर साइंस ने बताया कि कैसे उन्होंने इस प्रतियोगिता के ऑनलाइन संयोजन को सुगम और पारदर्शी बनाने का प्रयास किया है।इस के ऑनलाइन संचालन में उन्हें किस प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ा है तथा भविष्य वे कैसे इसे और अधिक पारदर्शी ,विस्तृत तथा सुग्राही बनाने के लिए प्रयत्नशील हैं।
इस प्रतियोगिता के सूत्रधार,SSG तथा MIT group के संस्थापक अध्यक्ष,समाजसेवी एडवोकेट सुधीर गुप्ता जी ने सभी का स्वागत करते हुए बताया कि कैसे निरंतर नैतिक तथा आध्यात्मिक मूल्यों के क्षरण को देखकर उनके मन में इस तरह की प्रतियोगिताओं के आयोजन का विचार आया।उन्होंने कहा कि भारत की नई पीढ़ी को संस्कारवान बनाने और सनातन के गौरव को संरक्षित और संवर्धित करने के लिए उनसे जो कुछ भी बन पड़ेगा वे करते रहेंगे।
कार्यक्रम में उपस्थित विजेताओं को मंचासीन अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया तो उनके चेहरे खिल उठे।कई विजेताओं द्वारा मंच से प्रतियोगिता के संबंध में अपने विचार साझा करते हुए इसे और अधिक पारदर्शी बनाने तथा विस्तारित करने के सुझाव भी दिए।
(विजेता के रूप में मुझ नाचीज़ को भी प्रोत्साहन प्रतिसाद प्राप्त हुआ)
विजेताओं के साथ अतिथियों द्वारा अंत में ग्रुप फोटो भी कराए गए।ऐसी अविस्मरणीय यादें भविष्य के लिए बहुत प्रेरणादाई सिद्ध होती हैं।
आमंत्रित अतिथियों ने कार्यक्रम में उपस्थित महिला शक्ति का उत्साहवर्धन करते हुए उनके साथ भी फोटो खिंचवाए।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों द्वारा सभी को प्रेम से सुस्वादु जलपान कराया गया।इस दौरान कार्यक्रम में आए हुए गणमान्य व्यक्तियों के साथ बहुत सार्थक विचार विमर्श का अवसर प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम का सुंदर संचालन MIT की डॉo सुगंधा अग्रवाल द्वारा किया गया।उपरोक्त के अतिरिक्त कार्यक्रम में वाई पी गुप्ता, वाई एस कोठीवाल,आनंद मोहन गुप्ता, काव्य सौरभ रस्तौगी, महेश अग्रवाल, अनुभव गुप्ता, राहुल गुप्ता, मुकेश छावड़ा, सरदार गुरविंदर सिंह, डॉक्टर ए के गोयल तथा प्रकाश अग्रवाल, डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद शर्मा जी आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
मेरा अनुभव 
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मैंने इस प्रतियोगिता में पहली बार हिस्सेदारी की थी और अनुभव लगभग ठीक-ठाक ही रहा।अपने अनुभव के आधार पर आयोजकों के विचारार्थ कुछ सुझाव देने का लोभ संवरण नहीं कर पा रहा हूँ :
1. प्रश्नावली को अधिक कॉम्प्लेक्स बनाने के लक्ष्य निर्धारण के कारण level -1 में कई प्रश्न repeated दिखाई दिए।उन सवालों के जो options दिए गए थे उनमें से कोई भी उत्तर सही नहीं था। मैंने WhatsApp group पर इस और ध्यान दिलाया था।उसे स्वीकार करके संशोधन भी किया गया। अत: प्रतियोगिता को भविष्य में और fullproof बनाने की आवश्यकता है।
2. कई बार बताई गई तारीख़ पर लिंक ही नहीं खुल रहा था।इससे प्रतियोगिता की smoothness प्रभावित हुई।
3. उत्तर प्रेषित करने की तारीखों को कई बार बढ़ाया गया। इससे प्रतिभागियों के मन में प्रतियोगिता की पारदर्शिता के प्रति संशय उत्पन्न हुआ।
4.प्रतियोगिता में विजेताओं का भरोसा क़ायम रखने के लिए उनके खातों में धनराशि प्रेषण भी समय से करने की व्यवस्था करनी बहुत ज़रूरी है। आजकल तो DBT एक तीव्र माध्यम है खातों में धनराशि भेजने का,फिर भी इस कार्य में विलंब होना असहज करता है।
5. प्रशस्ति पत्र पर विजेताओं के नाम यदि हाथ से लिखकर देने की जगह प्रिंट कराएं तो certificate का गेटअप और भी निखर जाएगा।
आशा है भविष्य में प्रतियोगिता का आयोजन करते समय आयोजकों द्वारा इन बिंदुओं का भी संज्ञान लिया जाएगा।
     सादर 🙏🙏
--ओंकार सिंह विवेक 
साहित्यकार एवं समीक्षक






January 24, 2026

वसंत पंचमी/सरस्वती प्राकट्य दिवस पर काव्य गोष्ठी संपन्न


ऋतुराज वसंत के स्वागत में राजीव कुमार शर्मा के निवास पर हुई काव्य गोष्ठी 

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सूरज की बढ़ती चमक तथा प्रकृति के खिले रूप के संग दस्तक दे रहे ऋतुराज वसंत के आगमन तथा ज्ञान,कला और संगीत की देवी माँ शारदे के प्राकट्य दिवस के अवसर पर एकता विहार कॉलोनी में राजीव कुमार शर्मा जी के आवास पर  एक शानदार काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।

बताते चलें कि राजीव कुमार शर्मा जी साहित्य प्रेमी होने के साथ एक अच्छे रचनाकार भी हैं तथा प्रतिवर्ष वसंत पंचमी के दिन अपने आवास पर कवि गोष्ठी का आयोजन कराते हैं।कवियों को सम्मान सहित जलपान आदि कराकर परिजनों के साथ कविताओं का रसास्वादन करते हैं।

 (मेज़बान राजीव कुमार शर्मा जी अपने पुत्र उत्कर्ष सारस्वत के साथ)

कवियों ने वसंत के स्वागत,माँ शारदे की स्तुति तथा अन्य समसामयिक विषयों पर अपनी शानदार रचनाएँ सुनाकर आमंत्रित श्रोताओं को आनंदित किया। गोष्ठी की अध्यक्षता अशोक सक्सैना जी ने की।गोविंद शर्मा तथा राजीव कुमार शर्मा जी क्रमशः मुख्य अतिथि तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में विद्यमान रहे।

मां शारदे के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के उपरांत  विनोद कुमार शर्मा जी की सरस्वती वंदना से गोष्ठी का शुभारंभ हुआ।गोष्ठी का संचालन कर रहे प्रदीप राजपूत माहिर ने काव्य पाठ हेतु पतराम सिंह जी को आमंत्रित किया तो उन्होंने शारदेय का आह्वान करते हुए कहा :


   वीणा की झंकार  बिखेरो मां  अक्षर अक्षर  दीप जले,

   मेरी लेखनी को गति दो माँ नव विचार के फूल खिलें।

गोष्ठी के मेज़बान राजीव कुमार शर्मा ने अपने चिर परिचित अंदाज़ में प्रभावशाली अभिव्यक्ति देते हुए कहा 


      माँ से करुणा स्नेह दया,

     ममता शुचि और सद्ज्ञान लिए 

    दुधमुंहा धरा पर आया था

     कोमल निश्चल मन साथ लिए।

ओंकार सिंह विवेक ने ऋतुराज वसंत के स्वागत में अपना मुक्तक पढ़ते हुए कहा :

फूलों ने  उपवन को महकाया तो है,

राग  सुरीला कोयल ने  गाया तो है।

होता  है ज़ाहिर  सूरज  के  तेवर से,

ऋतुओं का राजा वसंत आया तो है।

सोहन लाल भारती ने अपनी भाव पूर्ण प्रस्तुति में नेक सलाह देते हुए कहा कहा :


 ख़ुद को सुधारो जग ख़ुद सुधर जाएगा 

ईर्ष्या द्वेष व लोभ त्यागो, आपका स्वास्थ्य भी सुधरेगा 

सब ख़ुद ही ठीक हो जाएगा।

प्रदीप राजपूत माहिर जी  ने अपने इस  मार्मिक शेर से  सबकी वाही वाही लूटी :


      क्या निराले खेल हैं तक़दीर के,

      श्वान भी हक़दार हैं अब खीर के।

विनोद कुमार शर्मा ने अपने मधुर कंठ से शारदे माँ का आशीष मांगते हुए भावपूर्ण प्रस्तुति दी :


 अंतर्मन तमस भरा है माँ,निज कृपा रश्मि की वृष्टि करो।

पावन कर दो निज आशिष से,दे दो जग को अविरल वाणी।

सुमित सिंह मीत ने अपना यह शानदार शेर पढ़ा :


 घर का आंगन है छोटा मगर रहने वालों का दिल है बड़ा,

  खुशबुएं प्यार  की हैं  यहां नफरतों  का  बसेरा नहीं।

गौरव नायक ने अपनी दमदार प्रस्तुति देते हुए कहा 


     समुंदर ग़म का भी कितना बड़ा है,

       जिसे देखो वही डूबा हुआ है।

उत्कर्ष सारस्वत ने अपनी भाव अभिव्यक्ति देते हुए कहा :

      जब आता चुनाव रोज़ दीवाली होती,

      वोटर के घर रोज़ नई एक टोली होती।

सचिन सिंह सार्थक ने अपनी सार्थक प्रस्तुति देते हुए कहा 


    तेजस्वी नायक ओजस्वी प्रखर हमारे नेता जी,

    बरसों बीते मगर दिलों में अमर हमारे नेता जी।




उपरोक्त के अतिरिक्त गोष्ठी में सीताराम शर्मा,सुनील कुमार वैश्य, दीपक गुप्ता एडवोकेट तथा करुणा शर्मा----  आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। अंत में सुस्वादु जलपान के बाद आयोजक राजीव कुमार शर्मा जी ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम समापन की घोषणा की।

गोष्ठी की शानदार कवरेज के लिए हम सम्मानित समाचार पत्रों हिन्दुस्तान, अमर उजाला तथा अमृत विचार के प्रतिनिधियों का हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं 🙏🙏


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