August 23, 2019

कृष्ण जन्माष्टमी


दोहे
जिसको सुनकर मुग्ध थे, गाय गोपियाँ ग्वाल,
छेड़ो वह धुन आज फिर, हे गिरधर  गोपाल।

जग  में  बढ़ता  जा रहा ,  मोहन  अत्याचार ,
चक्र  सुदर्शन  आप फिर ,कर में लीजे  धार।

गीता  में  जो   आपने ,   दिया कर्म का ज्ञान,
जीवन  की  राहें  हुयीं ,  उससे  ही  आसान।
-------ओंकार सिंह विवेक(अधिकार सुरक्षित)

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