April 21, 2026
दो शब्द 'कुछ मीठा कुछ खारा' के बारे में
April 20, 2026
मुलाक़ात के हसीन लम्हे
मुंबई निवासी श्री प्रदीप गुप्ता जी,पूर्व स्टेट बैंक अधिकारी/साहित्यकार/यूट्यूबर/ब्लॉगर/पॉडकास्टर कल शाम चाय पर हमारे ग़रीबखाने पर पधारे।श्री गुप्ता जी मूलतय: मुरादाबाद के निवासी हैं परंतु अब स्थाई रूप से मुंबई में बस गए हैं।आपसे सोशल मीडिया के कई माध्यमों से अक्सर संवाद होता रहता है।परंतु उनसे रूबरू यह मेरी पहली मुलाक़ात थी।
आदरणीय प्रदीप गुप्ता जी की सदाशयता, विनम्रता और सकारात्मक ऊर्जा ने बहुत प्रभावित किया। अनौपचारिक माहौल में काफ़ी देर आपसे तमाम सामाजिक और साहित्यिक विषयों पर खुलकर बातचीत हुई।आदरणीय गुप्ता जी के अचानक आगमन के कारण अपने सभी साहित्यिक मित्रों को विधिवत आमंत्रण देकर उनके सम्मान में हम कोई बड़ा कार्यक्रम तो नहीं कर पाए परंतु फिर भी कुछ साहित्यिक मित्र एक short notice पर उनकी मेज़बानी के लिए एकत्र हो गए इसके लिए उन सभी दोस्तों का भी हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।
चाय पर चर्चा के दौरान अच्छी ख़ासी कविता/शायरी भी हो गई। श्री गुप्ता जी को मैंने अपने दूसरे ग़ज़ल संग्रह 'कुछ मीठा कुछ खारा' की प्रति भी भेंट की।
श्री प्रदीप गुप्ता जी की मेज़बानी का अवसर पाकर प्रसंगवश मुझे मिर्ज़ा ग़ालिब साहब का यह शेर याद आ रहा है :
वो आए घर में हमारे ख़ुदा की क़ुदरत है,
कभी हम उनको कभी अपने घर को देखते हैं।
इस अवसर पर अपने साहित्यिक मित्रों को भी अपने ग़ज़ल संग्रह की प्रतियाँ भेंट कीं :
निःसंदेह ऐसे अवसर जीवन को एक नई आशा,ऊर्जा और उत्साह से भर देते हैं।
--- ओंकार सिंह विवेक
April 16, 2026
हँसते-हँसते कट जाएँ रस्ते
April 6, 2026
अपनी बात ग़ज़ल के साथ
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