ग़ज़ल---ओंकार सिंह विवेक 🌷 सुख का है क्या साधन जो अब पास नहीं, जीवन मे फिर भी पहले-सा हास नहीं। 🌷 मुजरिम भी जब उसमे जाकर बैठेंगे,...
आपके स्नेह-आशीष की अभिलाषा के साथ आज अपने जन्मदिन के अवसर पर एक ग़ज़ल के साथ आपसे मुखातिब हूँ : ग़ज़ल ...