January 28, 2022

जिसकी बनती हो बने----

कुंडलिया---ओंकार सिंह विवेक
         सर्वाधिकार सुरक्षित
🌷
जिसकी  बनती  हो  बने, सूबे  में  सरकार,
हर  दल   में  हैं  एक-दो, उनके  रिश्तेदार।
उनके   रिश्तेदार, रोब   है   सचमुच  भारी,
सब   साधन  हैं  पास,नहीं  कोई  लाचारी।
अब उनकी  दिन-रात,सभी से गाढ़ी छनती,
बन जाए सरकार,यहाँ  हो  जिसकी बनती।
🌷       --ओंकार सिंह विवेक
          सर्वाधिकार सुरक्षित

2 comments:

  1. अतीव सामयिक व सटीक पंक्तिया, साधुवाद ।

    ReplyDelete
    Replies
    1. अतिशय आभार आपका 🙏🙏🌹🌹

      Delete

Featured Post

दो शब्द 'कुछ मीठा कुछ खारा' के बारे में

लीजिए पेश हैं मुंबई निवासी पूर्व बैंक अधिकारी/साहित्यकार/यूट्यूबर/ब्लॉगर/पॉडकास्टर आदरणीय प्रदीप गुप्ता जी द्वारा मेरे दूसरे ग़ज...