January 1, 2022

मिला है ख़ुश्क दरिया देखने को

मिला है ख़ुश्क दरिया देखने को
ग़ज़ल-- ©️ओंकार सिंह 'विवेक' ©️ मिला  है  ख़ुश्क  दरिया  देखने को, मिलेगा  और  क्या-क्या देखने को। किसी  मुद्दे  पे  सब  ही एकमत हों, क...

December 31, 2021

नए साल की पूर्व संध्या पर काव्य गोष्ठी

नए साल की पूर्व संध्या पर काव्य गोष्ठी
आज वर्ष 2021 के अंतिम दिन अर्थात वर्ष 2022 की पूर्व संध्या पर  उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल की रामपुर इकाई के ज़िला अध्यक्ष श्र...

नया साल : एक कामना

नया साल : एक कामना
नया साल- एक कामना        ---ओंकार सिंह विवेक गए   साल  जैसा   नहीं   हाल  होगा, तवक़्क़ो  है  अच्छा  नया साल होगा। न  होगा  फ़क़त  फाइलों-काग़ज़ों...

December 30, 2021

सर्दी के नाम

सर्दी के नाम
अक्सर लोग कहते हैं कि आदमी को चैन कहाँ है? गर्मी में बहुत गर्मी की ,बरसात में बहुत बारिश की और सर्दी में  कड़क ठंड की शिकायत करता ही रहता है।...

December 25, 2021

अटल जी की स्मृति में

अटल जी की स्मृति में
अटल जी की स्मृति में कहे गए कुछ दोहे *******************************              ---©️  ओंकार सिंह विवेक 🌷  नैतिक  मूल्यों  का किया ,सदा म...

December 21, 2021

अब एक भी दरख़्त पे पत्ता नहीं रहा

अब एक भी दरख़्त पे पत्ता नहीं रहा
इस ग़ज़ल पर लोकप्रिय फेसबुक साहित्यिक पटल "ग़ज़लों की दुनिया" में शताधिक साहित्य मनीषियों के उत्साहजनक कमेंट्स प्राप्त हुए सो आप सब के...

December 19, 2021

एक नवगीत सामाजिक विसंगतियों और विरोधाभासों के नाम

एक नवगीत सामाजिक विसंगतियों और विरोधाभासों के नाम
आज एक नवगीत सामाजिक विरोधाभासों  और विसंगतियों के नाम  *******************************  ---  ©️ओंकार सिंह विवेक सच की फौजों पर अब,   झूठों क...

December 13, 2021

घर से निकल पड़े हैं तीर-ओ-कमान लेकर

घर से निकल पड़े हैं तीर-ओ-कमान लेकर
मित्रो सादर प्रणाम🙏🙏 समाज में या हमारे आस-पास जो कुछ घटित हो रहा होता है यों तो उसे सभी देखते हैं परंतु एक साहित्यकार हर घटना या दृश्य को ...

December 11, 2021

सर्दी का नवगीत : अलसाई-सी धूप

सर्दी का नवगीत : अलसाई-सी धूप
आज एक नवगीत : सर्दी के नाम  *************************       --  ©️ओंकार सिंह विवेक छत पर आकर बैठ गई है, अलसाई-सी धूप। सर्द हवा खिड़की से आकर,...

December 9, 2021

दोहे सर्दी के

दोहे सर्दी के
     दोहे सर्दी के ******///***********          --ओंकार सिंह विवेक (सर्वाधिकार सुरक्षित) चल  उठ  देनी  है  हमें, अब सर्दी  को  मात, बहिन  र...

December 7, 2021

वरिष्ठता-ज्ञान तथा अनुभव

वरिष्ठता-ज्ञान तथा अनुभव
वरिष्ठता-ज्ञान तथा अनुभव---एक विचार साथियो यथायोग्य अभिवादन🙏🙏 आज अपने अनुभव के आधार पर एक संवेदनशील विषय पर कुछ लिखने का मन हुआ सो  लिख रह...

December 4, 2021

माँ का आशीष फल गया होगा

माँ का आशीष फल गया होगा
दोस्तो हाज़िर है एक ताज़ा ग़ज़ल-- फ़ाइलातुन    मुफाइलुन    फ़ेलुन/फ़इलुन ग़ज़ल-- ©️ओंकार सिंह विवेक ©️ माँ  का  आशीष   फल  गया  होगा, गिर  के   बेटा ...

December 1, 2021

आज कुछ दोहे यों भी

आज कुछ दोहे यों भी
साथियो नमस्कार🙏🙏 आज काफ़ी दिन बाद किसी आवश्यक कार्य से  रामपुर-उ0प्र0 से गुरुग्राम-हरियाणा जाते समय कुछ दोहे सृजित हुए जो आपके ...

November 27, 2021

धुर विरोधी दलों में भी यारी हुई

धुर विरोधी दलों में भी यारी हुई
नमस्कार साथियो🙏🙏 कुछ भी कहिए ग़ज़ल विधा के साथ एक आसानी तो है कि इसका हर शेर पहले से जुदा होता है और अलग-अलग शेरों में अलग-अलग कथ्य पिरोए जा...

November 25, 2021

एक अनूठा प्रयोग : टैगोर काव्य गोष्ठी

एक अनूठा प्रयोग : टैगोर काव्य गोष्ठी
आज राजकली देवी शैक्षिक पुस्तकालय (टैगोर स्कूल), पीपल टोला ,रामपुर में  प्रसिद्ध सर्राफ,समाजसेवी तथा साहित्यकार  टैगोर  स्कूल के  प्रबंधक श्र...

November 22, 2021

माँ का आशीष फल गया होगा

माँ का आशीष फल गया होगा
दोस्तो हाज़िर है एक नई ग़ज़ल फिर से आपकी अदालत में 2   1 2   2  1  2  1  2       2  2/1 1 2 फ़ाइलातुन    मुफाइलुन    फ़ेलुन/फ़इलुन ग़ज़...

November 17, 2021

आँसुओं की ख़ुद्दारी

आँसुओं की ख़ुद्दारी
मनुष्य के हर हाव-भाव और भावभंगिमा तथा अभिव्यक्ति का अपना महत्व है। अब आँसुओं को ही ले लीजिए, इनका भी अपना स्वाभिमान होता है । आँ...

November 11, 2021

"दर्द का अहसास"--एक समीक्षा

"दर्द का अहसास"--एक समीक्षा
इंदौर,मध्य प्रदेश की सुप्रसिद्ध साहित्यकार और समाज सेविका आदरणीया तृप्ति मिश्रा साहिबा ने मेरे ग़ज़ल संग्रह दर्द का अहसास की समीक्षा लिखकर प्र...

November 10, 2021

उम्र भर उपकार कर

उम्र भर उपकार कर
शुभ संध्या🙏🙏 सभी ग़ज़ल प्रेमी साहित्य मनीषियों का हार्दिक स्वागत और अभिनंदन । प्रस्तुत है मेरी बहुत आसान बह्र में कही गई एक ग़ज़ल जिसमें अध...

November 8, 2021

शेरों में ढाल के

शेरों में ढाल के
ग़ज़ल -- ©️ओंकार सिंह विवेक ©️ बेशक  कई   जवाब   दिए  इक  सवाल  के, पर उसके सब जवाब थे सचमुच कमाल के। हज़रत  किया  था  हमने  तो आगाह बारहा,   फ...

November 6, 2021

दर्द का अहसास

   कृति-   "दर्द का अहसास" ग़ज़ल संग्रह कृतिकार- ओंकार सिंह विवेक समीक्षक-- अशोक कुमार वर्मा   अवकाशप्राप्त आई0पी0एस0 दर्द का अहसास...

November 3, 2021

पुस्तक समीक्षा-- "दर्द का अहसास "

पुस्तक समीक्षा-- "दर्द का अहसास "
             दर्द का अहसास : संवेदनाओं का संकलन              -------------------------------------------------- 'औरतों से बातचीत'रही...

November 2, 2021

शुभ दीपावली

शुभ दीपावली
दोहे--शुभ दीपावली : धनवर्षा : अमृत वर्षा ********************************       -- ©️ ओंकार सिंह विवेक ©️ हो जाए  हर  गेह  में , लक्ष्मी  जी...

October 31, 2021

देशप्रेम

देशप्रेम
आज़ादी का अमृत महोत्सव : दो मुक्तक                                ---©️ ओंकार सिंह विवेक शान  तिरंगा  है ,  हम  सबकी   जान   तिरंगा  है, वीर ...

October 29, 2021

पुस्तक समीक्षा

पुस्तक समीक्षा
              पुस्तक समीक्षा               ************ कृति      :  काव्य-ज्योति कृतिकार :रामरतन यादव रतन समीक्षक  :ओंकार सिंह विवेक भाई रा...

October 25, 2021

पुस्तक विमोचन समारोह

पुस्तक विमोचन समारोह
रविवार दिनाँक 24 अक्टूबर,2021 को खटीमा,उत्तराखंड में विनम्र स्वभाव के धनी कवि एवं अध्यापक  भाई श्री रामरतन यादव रतन जी के स्नेहिल आमंत्रण पर...

October 22, 2021

नगर में अब वो नज़्ज़ारे नहीं हैं

नगर में अब वो नज़्ज़ारे नहीं हैं
ग़ज़ल-- ©️ओंकार सिंह विवेक मुफ़ाईलुन   मुफ़ाईलुन    फ़ऊलुन ©️ खिले - से   चौक - चौबारे   नहीं   है, नगर  में  अब   वो   नज़्ज़ारे  नहीं  हैं। बचाते...

October 15, 2021

फ़िक्र के पंछियों को उड़ाया बहुत

फ़िक्र के पंछियों को उड़ाया बहुत
ग़ज़ल-- ©️ओंकार सिंह विवेक मोबाइल 9897214710 ©️ फ़िक्र  के  पंछियों   को   उड़ाया  बहुत, उसने  अपने सुख़न को सजाया बहुत। हौसले   में   न   आ...

October 10, 2021

आग से माली के रिश्ते हो गए

आग से माली के रिश्ते हो गए
फ़ाइलातुन    फ़ाइलातुन   फ़ाइलुन ग़ज़ल-- ©️ओंकार सिंह विवेक ©️ आग   से   माली   के   रिश्ते   हो  गए, बाग़  को  ख़तरे  ही   ख़तरे   हो  गए। साथ   मे...

September 29, 2021

रात का एक ही बजा है अभी

रात का एक ही बजा है अभी
फ़ाइलातुन   फ़ेलुन/फ़इलुन ग़ज़ल--ओंकार सिंह विवेक ©️ रात   का   एक  ही  बजा है  अभी, यार  घंटों  का    रतजगा  है  अभी। हाथ    यूँ    रोज़    ही   ...

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दिल की बात ग़ज़ल के साथ

आपके स्नेह-आशीष की अभिलाषा के साथ आज अपने जन्मदिन के अवसर पर एक ग़ज़ल के साथ आपसे मुखातिब हूँ :                     ग़ज़ल       ...