ग़ज़ल***ओंकार सिंह विवेक ©️ क्या बतलाएँ दिल को कैसा लगता है, बदला-सा जब उनका लहजा लगता है। रोज़ पुलाव पकाओ आप ख़यालों के, इसमे कोई पाई...
मित्रो सुप्रभात 🌹🌹🙏🙏 इधर काफ़ी दिनों से अपने ब्लॉग पर आपसे अपनी कविता के माध्यम से कोई सार्थक संवाद नहीं कर पाया इसका मुझे ख...