फ़ाइलातुन फ़ेलुन/फ़इलुन ग़ज़ल--ओंकार सिंह विवेक ©️ रात का एक ही बजा है अभी, यार घंटों का रतजगा है अभी। हाथ यूँ रोज़ ही ...
आपके स्नेह-आशीष की अभिलाषा के साथ आज अपने जन्मदिन के अवसर पर एक ग़ज़ल के साथ आपसे मुखातिब हूँ : ग़ज़ल ...