फ़ाइलातुन फ़ेलुन/फ़इलुन ग़ज़ल--ओंकार सिंह विवेक ©️ रात का एक ही बजा है अभी, यार घंटों का रतजगा है अभी। हाथ यूँ रोज़ ही ...
कोलकता के प्रतिष्ठित अख़बार 'सदीनामा' का ग़ज़ल प्रकाशित करने के लिए एक बार फिर हार्दिक आभार प्रकट करता हूँ 🌹🌹🙏🙏 आ...