फ़ाइलातुन फ़ेलुन/फ़इलुन ग़ज़ल--ओंकार सिंह विवेक ©️ रात का एक ही बजा है अभी, यार घंटों का रतजगा है अभी। हाथ यूँ रोज़ ही ...
व्हाट्सएप्प पर, 'रचनाकार दिल्ली -1' एक प्रतिष्ठित साहित्यिक ग्रुप है।मैं भी पिछले कई वर्ष से इस समूह से जुड़ा हुआ हूँ।कई...