December 30, 2019

अटल रही पहचान

अटल रही पहचान
अ कुछ दोहे अटल जी  की स्मृति में नैतिक मूल्यों का  किया, सदा मान सम्मान। दिया अटल जी ने नहीं,ओछा कभी बयान।। विश्व मंच  पर  शा...

December 29, 2019

December 13, 2019

अपनी कहन

अपनी कहन
चंद अशआर--- शिकायत कुछ नहीं है ज़िन्दगी  से, मिला जितना मुझे हूँ ख़ुश उसी से। ज़रा    कीजे   अँधेरों    से   लड़ाई, तभी  होगा  तआरुफ़   रौश...

December 4, 2019

आख़िर कब तक ???????

आख़िर कब तक ???????
आख़िर कब तक????? हैदराबाद मैं महिला पशु चिकित्सक के साथ हुई मानवता को शर्मसार करने वाली घटना के बाद फिर यही सवाल लोगों के दिमाग़ में आ रहा ...

November 26, 2019

सूखे हुए निवाले

सूखे हुए निवाले
ग़ज़ल-ओंकार सिंह विवेक मोबाइल 9897214710 काम   हमारे   रोज़  उन्होंने   अय्यारी   से  टाले   थे, जिनसे  रक्खी  आस  कहाँ  वो  यार भरोसे व...

November 22, 2019

कभी सोचा नहीं

कभी सोचा नहीं
ग़ज़ल---ओंकार सिंह विवेक आप  में  ही  आगे  बढ़ने  का  ज़रा  जज़्बा  नहीं, बेसबब   कहते   हो ,  कोई   रासता   देता   नहीं। ख़्वाब  तो  बे...

November 20, 2019

कुछ अपना अंदाज़

कुछ अपना अंदाज़
कुछ  दोहे हर  पल  की  गंभीरता ,   कर   देगी   बीमार। हँसी ठिठोली भी कभी, किया करो तुम यार।।  उठते  हैं  उनके  लिए , सदा  दुआ  में  हाथ।...

November 10, 2019

मन नहीं है

मन नहीं है
ग़ज़ल-ओंकार सिंह विवेक अगरचे  उनसे कुछ अनबन नहीं है, मिलें  उनसे ,ये फिर भी मन नहीं है। समझते  हो  इसे जितना सरल तुम, सरल  इतना भी यह जी...

November 4, 2019

मन के भाव

दोहे 💐💐💐💐💐💐💐💐 चिन्तन का जब भी हुआ,मन में तेज़ बहाव। आसानी से ढल गए , कविता में सब भाव।। 💐💐💐💐💐💐💐💐 यह अपनों का साथ है,य...

November 2, 2019

फूल और काँटे

फूल और काँटे
यहाँ सफ़र सबका किया, काँटों ने प्रतिकूल। नहीं  किसी  को राह में,मिले फूल ही फूल।।                        -------ओंकार सिंह विवेक     ...

October 31, 2019

नेकियाँ

नेकियाँ
ग़ज़ल-ओंकार  सिंह विवेक मोबाइल 9897214710 किसी  के  ग़म को  हमें अपना ग़म बनाने में, बड़ा    सुकून   मिला   नेकियाँ   कमाने   में। उसी ...

October 27, 2019

दीवाली

दीवाली
  अन्न  उगाने  वालों  के  ही ,  संमुख  है  रीती थाली, लेकिन शासक बता रहे हैं, भारत  में  है  ख़ुशहाली। मन के भीतर तमस छुपाकर, लोग जला...

October 26, 2019

दीपावली

दीपावली
       दोहे : दीपावली खील-बताशे-फुलझड़ी  , दीपों  सजी  क़तार। मिलती इनको देखकर,मन को ख़ुशी अपार।। दीवाली   के   दीप  हों ,  या   होली  ...

October 17, 2019

करवा चौथ

करवा चौथ
                               चित्र:गूगल से साभार दोहे:करवा चौथ 💥 पति की  लम्बी उम्र की  ,  मन में इच्छा धार। पत्नी करवा  चौथ का , ...

October 13, 2019

कवि गोष्ठी व शेरी नशिस्त

कवि गोष्ठी व शेरी नशिस्त
आज दिनाँक13 अक्टूबर,2019 को शायर इफ़्तेख़ार ताहिर के पीला तालाब स्थिति आवास पर गंगा जमुनी तहज़ीब को रेखांकित करती कवि गोष्ठी  व शेरी नशिस्त का...

October 11, 2019

आसमान पर

आसमान पर
ग़ज़ल-ओंकार सिंह विवेक मोबाइल9897214710 है  आदमी  का  इतना  दख़ल आसमान पर, जाने   से   डर   रहे   हैं  परिन्दे  उड़ान  पर। बदलें  हैं ...

October 8, 2019

दशहरा

दशहरा
कुटिल चाल से झूठ की,क्यों होना भयभीत, जब  होनी  हर  हाल में, सच्चाई  की जीत।            ----------------ओंकार सिंह विवेक               ...

October 3, 2019

ईमान

ईमान
जब घिरा छल फरेबों के तूफ़ान में, मैंने  रक्खा  यकीं  अपने ईमान में।       -------ओंकार सिंह विवेक

September 27, 2019

एकता

एकता
            न ख़ुशियाँ ईद की कम हों न होली रंग हो फीका, रहे  भारत के  माथे  पर इसी तहज़ीब का टीका।                               ------ओं...

September 26, 2019

सब्र

सब्र
शिकायत  कुछ नहीं है ज़िन्दगी से, मिला जितना मुझे हूँ ख़ुश उसी से।            -------ओंकार सिंह विवेक     

September 20, 2019

साहित्यिक समाचार

साहित्यिक समाचार
आज दिनाँक 19सितम्बर,2019 को रामपुर(उ0प्र0) में दर्जा मंत्री उ0प्र0 सरकार श्री सूर्य प्रकाश पाल के निवास पर उनके जन्म दिन के अवसर पर पल्लव क...

August 27, 2019

बोलती तस्वीर

बोलती तस्वीर
चित्रधारित लेखन- ख़ाली घट ले हाथ में , तुझ को रही निहार । बदरा मेरी प्यास पर , कुछ तो कर उपकार।।  -------ओंकार सिंह विवेक               ...

August 25, 2019

मेरा मुक़द्दर

मेरा मुक़द्दर
ग़ज़ल-ओंकार सिंह विवेक क़द यहाँ औलाद का जब उनसे बढ़कर हो गया, फ़ख़्र  से  ऊँचा  तभी  माँ-बाप  का सर हो गया। जब  भरोसा  मुझको अपने बाज़ुओं पर ह...

August 23, 2019

कृष्ण जन्माष्टमी

कृष्ण जन्माष्टमी
दोहे जिसको सुनकर मुग्ध थे, गाय गोपियाँ ग्वाल, छेड़ो वह धुन आज फिर, हे गिरधर  गोपाल। जग  में  बढ़ता  जा रहा ,  मोहन  अत्याचार , चक्र  सु...

August 20, 2019

पहचान

पहचान
दोहे अलग  बनाने के लिए ,  औरों  से  पहचान। कथनी करनी कीजिए, अपनी एक समान।। यह जीवन भगवान का,  है  सुन्दर  उपहार। अरे  गँवाता  क्यों   ...

August 19, 2019

दिल धोते हुए

दिल धोते हुए
ग़ज़ल - ओंकार सिंह विवेक आँसुओं से ज़ख्मे  दिल धोते    हुए, ज़िन्दगी  अपनी   कटी     रोते हुए। दिल  की  नादानी नहीं तो और क्या, है   परेशा...

August 18, 2019

ज़िन्दगी का सफ़र

ग़ज़ल-ओंकार सिंह विवेक चढ़ गया  सबकी नज़र में, बात है  कुछ उस बशर में। सच   का हो  कैसे  गुज़ारा, छल,कपट  के इस नगर में। पाँव   के   छाले...

August 15, 2019

स्वतंत्रता दिवस

स्वतंत्रता दिवस
स्वतंत्रता दिवस पर कुछ दोहे आज़ादी    पाना   कहाँ ,  था इतना आसान। इसकी ख़ातिर अनगिनत,   वीर हुए क़ुर्बान।। आज़ादी  का  पर्व   यह ,  देता ...

रक्षा बंधन

रक्षा बंधन
दोहे 💐💐💐💐💐💐💐💐🌷🌷🌷🌷 भाई-बहिनों   के  लिये ,  लेकर  ख़ुशी अपार। आता  सावन  माह  में , राखी   का  त्योहार।। 💐💐💐💐💐🌷🌷🌷🌷...

August 14, 2019

घाटी की तस्वीर

घाटी की तस्वीर
दोहे:बड़ा फ़ैसला बहुत  पुरानी  भूल  में , आख़िर  किया सुधार । धन्यवाद  की  पात्र  है ,  यह  मोदी    सरकार।। मिटी आज अलगाव की , जड़ से ही पह...

August 13, 2019

रौशनी

रौशनी
ग़ज़ल- ओंकार सिंह विवेक आप  हर  पल रौशनी के वार से , तीरगी  करिये   फ़ना  संसार  से । कितने ही  राजा  भिखारी हो गये, कौन बच  पाया समय की ...

August 6, 2019

सीधी सच्ची बात

सीधी सच्ची बात
दोहे 💐💐💐💐💐💐💐💐🌷🌷🌷🌷 पहले मुझको झिड़कियाँ , फिर थोड़ी मनुहार, यार  समझ  पाया  नहीं , मैं  तेरा    व्यवहार। 💐💐💐💐💐💐💐💐🌷🌷...

August 5, 2019

दिये जलाना

दिये जलाना
ग़ज़ल-ओंकार सिंह 'विवेक' आँधियों   में  दिये   जलाना  है, कुछ नया करके अब दिखाना है। बात  क्या  कीजिये  उसूलों  की, जोड़ औ तोड़  ...

August 4, 2019

उलझन

उलझन
कब सूझ रहा जिसको सब सच बात पता है , क्यों औरों से बूझ रहा, जो  भरता  है  पेट सभी  का , क्यों रोटी को जूझ रहा। ऐसे  और  न  जाने   ...

August 3, 2019

उपकार कर

उपकार कर
हो  सके  जितना भी  तुझसे  उम्र भर  उपकार कर, बाँट  कर  दुख  दर्द  बन्दे  हर किसी  से प्यार  कर। छल,कपट  और  द्वेष ही करते हैं मन  को   ...

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दिल की बात ग़ज़ल के साथ

आपके स्नेह-आशीष की अभिलाषा के साथ आज अपने जन्मदिन के अवसर पर एक ग़ज़ल के साथ आपसे मुखातिब हूँ :                     ग़ज़ल       ...