दोहे
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चिन्तन का जब भी हुआ,मन में तेज़ बहाव।
आसानी से ढल गए , कविता में सब भाव।।
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यह अपनों का साथ है,यह अपनों का प्यार।
जो जीवन में दे रहा, मुझको ख़ुशी अपार।।
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--------ओंकार सिंह विवेक
(सर्वाधिकार सुरक्षित)
सफ़र की हद है वहाँ तक कि कुछ निशान रहे, चले चलो के जहाँ तक ये आसमान रहे। ये क्या उठाये क़दम और आ गई मन्ज़िल...
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