ग़ज़ल---ओंकार सिंह विवेक 🌹 कब सुनते हैं कोई कहानी अपनी दादी - नानी से, अब तो बस चिपके रहते हैं बच्चे गूगल - ज्ञानी स...
कोलकता के प्रतिष्ठित अख़बार 'सदीनामा' का ग़ज़ल प्रकाशित करने के लिए एक बार फिर हार्दिक आभार प्रकट करता हूँ 🌹🌹🙏🙏 आ...