है उसमें बड़ा हौसला जानते हैं,
लड़ेगा हवा से दिया, जानते हैं।
सुना है नशे और भी हैं, मगर हम,
फ़क़त शा'इरी का नशा जानते हैं।
न मंज़िल से पहले क़दम ये रुकेंगे,
है बेशक कठिन रास्ता जानते हैं।
ये महलों ये बँगलों ये कारों के मालिक,
ग़रीबी के बारे में क्या जानते हैं?
सदा चापलूसी ही की हो जिन्होंने,
हमें देंगे क्या मश्वरा, जानते हैं।
न हल कोई ये मसअला होने देगी,
सियासत का हर पैंतरा जानते हैं।
मियाँ! छोड़िए भी हमें वरग़लाना,
ब-ख़ूबी हम अच्छा-बुरा जानते हैं।
--- ओंकार सिंह विवेक
( सर्वाधिकार सुरक्षित)
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