भारत भर के ग़ज़ल प्रेमियों का पसंदीदा कार्यक्रम 'ग़ज़ल कुंभ' 18-19 जनवरी,2025 को उत्तराखंड राज्य के पावन धाम हरिद्वार में अपनी पूरी भव्यता के साथ संपन्न हुआ।ग़ज़ल साधक दीक्षित दनकौरी तथा मोईन अख़्तर अंसारी साहब की उमदा काविशों के चलते ‘अंजुमन फ़रोगे उर्दू' दिल्ली द्वारा बसंत चौधरी फ़ाउंडेशन (नेपाल) के सौजन्य से आयोजित कराए गए इस 16 वें ग़ज़ल कुंभ में लगभग 200 ग़ज़लकारों द्वारा ग़ज़ल पाठ किया गया।
January 25, 2025
ग़ज़ल कुंभ हरिद्वार,2025 में हुआ 'कुछ मीठा कुछ खारा' का विमोचन
January 16, 2025
मकर संक्रांति के अवसर पर उत्तर प्रदेश साहित्य सभा रामपुर इकाई की काव्य गोष्ठी संपन्न
भारतीय संस्कृति तथा हिन्दू धर्म में मकर संक्रांति को पुण्यकारी दिन के रूप में जाना जाता है। मकर संक्रांति पर सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं तथा उनकी गति उत्तर दिशा की ओर हो जाती है और मौसम में परिवर्तन का आभास होने लगता है।हिंदू धर्म में इस दिन को पुण्य प्राप्ति, स्नान और दान का दिन माना जाता है।
उत्तर प्रदेश साहित्य सभा की रामपुर इकाई द्वारा मकर संक्रांति के अवसर पर सभा के मंत्री राजवीर सिंह राज़ के निवास पर एक शानदार काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में उपस्थित कवियों ने समसामयिक विषयों पर अपनी सुंदर रचनाएँ सुनाकर देर रात तक समाँ बाँधे रखा।गोष्ठी की अध्यक्षता रामपुर के वरिष्ठ साहित्यकार शिवकुमार चंदन द्वारा की गई।
गोष्ठी में रचना पाठ करते हुए सभा की स्थानीय इकाई के संयोजक सुरेंद्र अश्क रामपुरी ने अपना कलाम कुछ इस तरह पेश किया --
दूर से देखो पास मत आना,
मुझको क़स्दन जता के बैठ गए।
सुधाकर सिंह ने अपनी मार्मिक अभिव्यक्ति में कहा --
हम काश यह दीवार हटा पाते,
जो कहा सुनी थी आपस की
उसका सब रंज मिटा पाते।
सभा के अध्यक्ष ओंकार सिंह विवेक ने आज के इंसान के दोहरे चरित्र पर कटाक्ष करते हुए यह शेर पढ़ा --
जो मुखौटा कहीं उतर जाए,
आज का शख़्स ख़ुद से डर जाए।
उन्होंने मकर संक्रांति पर यह दोहा भी पढ़ा --
समरसता है बांटता, खिचड़ी का यह पर्व।
करें न क्यों संक्रांति पर,हम सब इतना गर्व।।
सभा के मंत्री राजवीर सिंह राज़ ने आसमान में घुमड़ती बदलियों का चित्रण कुछ इस तरह किया --
नीर भरकर जब घुमड़ती हैं गगन में बदलियाँ,
खेलती हैं बादलों में रक़्स करती बिजलियाँ।
सभा के उपाध्यक्ष प्रदीप राजपूत ने अपनी अभिव्यक्ति कुछ इस प्रकार दी --
बेचैनी साँसों में पल पल ठीक नहीं,
इतनी भी इस दिल में हलचल ठीक नहीं।
काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे शिव कुमार चन्दन ने अपना दोहा पढ़ा --
गुड़ तिल के लड्डू रखें,घी खिचड़ी का दान।
सत्य सनातन संस्कृति,करती पुण्य महान।।
गोष्ठी का संचालन प्रदीप माहिर ने किया। साहित्य सभा के अध्यक्ष ओंकार सिंह विवेक ने अंत में सभी का आभार व्यक्त करते हुए सभा समापन की घोषणा की।
उत्तर प्रदेश साहित्य सभा रामपुर इकाई की काव्य गोष्ठी 👈👈
January 15, 2025
मकर संक्रांति के अवसर ब्राह्मण परिवार मिलन रामपुर का कार्यक्रम
कल दिनांक 14 जनवरी,2025 को अखिल भारतीय ब्राह्मण परिवार मिलन रामपुर द्वारा मकर संक्रांति के पावन पर्व पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। माया देवी धर्मशाला में आयोजित इस कार्यक्रम में सर्वप्रथम हवन कारज संपन्न हुआ। सभा के पदाधिकारियों प्रवीण भांडा तथा सीताराम शर्मा सहित अनेक श्रद्धालुओं द्वारा हवन में आहुतियां डाली गईं।
हवन कराते समय पंडित श्री अतुल मिश्रा जी ने बताया कि मकर संक्रांति से सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करके उत्तरायण हो जाते हैं। धीरे- धीरे सूर्य का ताप बढ़ने लगता है तथा दिन बड़े एवं रातें छोटी होने लगती हैं।इस अवसर पर गुड- तिल के दान तथा खिचड़ी भोज के आयोजन से बहुत पुण्य प्राप्त होता है।
ब्राह्मण परिवार मिलन द्वारा इस अवसर पर एक सूक्ष्म कवि गोष्ठी का भी आयोजन कराया गया जिसमें स्थानीय कवियों ने अपनी समसामयिक रचनाएँ सुनाकर आमंत्रित श्रोताओं की ख़ूब तालियाँ बटोरीं।
मेरे द्वारा कार्यक्रम में प्रस्तुत कुछ दोहे --
समरसता है बांटता, खिचड़ी का यह पर्व।
करें न क्यों संक्रांति पर,हम सब इतना गर्व।।
माह जनवरी आ गया, ठंड हुई विकराल।
ऊपर से करने लगा, सूरज भी हड़ताल।।
©️ ओंकार सिंह विवेक
कवि सुरेंद्र अश्क रामपुरी ने कहा --
दूर से देखो पास मत आना,
मुझको क़स्दन जता के बैठ गए।
विनोद कुमार शर्मा ने अपनी मार्मिक अभिव्यक्ति में कहा --
नहीं बुझ पाएंगे ये आग के वन,
बुझाना हो तो चिंगारी बुझा लो।
राजवीर सिंह राज़ ने आसमान में घुमड़ती बदलियों का चित्रण कुछ इस तरह किया --
नीर भरकर जब घुमड़ती हैं गगन में बदलियाँ,
खेलती हैं बादलों में रक़्स करती बिजलियाँ।
प्रदीप राजपूत ने अपनी अभिव्यक्ति कुछ इस प्रकार दी --
बेचैनी साँसों में पल पल ठीक नहीं,
इतनी भी इस दिल में हलचल ठीक नहीं।
काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे शिव कुमार चन्दन ने अपना दोहा पढ़ा --
गुड़ तिल के लड्डू रखें,घी खिचड़ी का दान।
सत्य सनातन संस्कृति,करती पुण्य महान।।
कार्यक्रम में ब्राह्मण परिवार मिलन परिवार द्वारा निर्धन व्यक्तियों को कंबल वितरण भी किया गया। अंत में सभी ने खिचड़ी भोज का आनंद लिया।सभा के सचिव प्रवीण भांडा द्वारा सबका आभार व्यक्त किया गया।
प्रस्तुति : Poet Onkar Singh 'Vivek'
January 13, 2025
ग़ज़ल कुंभ,2025 -- प्रस्थान से पूर्व
ग़ज़लकार दीक्षित दनकौरी जी के संयोजन में 16 वाँ ग़ज़ल कुंभ हरिद्वार में 18-19 जनवरी,2025 को आयोजित होने जा रहा है।पता ही नहीं चला कि कब साल गुज़र गया और ग़ज़ल कुंभ का अगला आयोजन आ पहुँचा।लगता है जैसे चंद दिनों पहले की ही बात हो जब हम तीन साथी ग़ज़ल कुंभ,2024 मुंबई में शिरकत करने गए थे जबकि इस बात को एक साल गुज़र चुका है।
इस आयोजन की लोकप्रियता का अंदाज़ इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल भर ग़ज़लकार/ग़ज़ल प्रेमी इस आयोजन का बेसब्री से इंतज़ार करते हैं। श्री दीक्षित दनकौरी जी अपनी समर्पित टीम के साथ मिलकर प्रतिवर्ष बहुत ही व्यवस्थित/अनुशासित ढंग से भव्य ग़ज़ल कुंभ का आयोजन कराते हैं।इस कार्यक्रम में बहुत से प्रतिष्ठित ग़ज़लकारों के साथ-साथ ऐसे उभरते हुए रचनाकार भी सहभागिता करते हैं जिन्हें अपने सृजन को निखारने और अच्छा मंच पाने की ललक होती है।
इस बार हरिद्वार में आयोजित ग़ज़ल कुंभ के मुख्य अतिथि नेपाल के वरिष्ठ कवि,लेखक तथा समाज सेवी श्री बसंत चौधरी जी होंगे। विशिष्ट आतिथ्य प्रोफेसर (डॉ) उषा उपाध्याय, वरिष्ठ कवयित्री, लेखिका, शिक्षाविद गुजरात का रहेगा। इनके अतिरिक्त निम्न साहित्य मनीषियों का सानिध्य भी रहेगा :
डॉक्टर मधुप मेहता IFS
जनाब इम्तियाज़ वफ़ा,अध्यक्ष उर्दू अकादमी,काठमांडू
श्री शैलेन्द्र जैन अप्रिय, सह संपादक,अमर भारती
श्री राजेन्द्र शलभ,सुकवि,नेपाल
डॉक्टर श्वेता दीप्ति, सुकवयित्री,नेपाल
मैंने वर्ष 2017 के ग़ज़ल कुंभ दिल्ली में पहली बार शिरकत की थी। इसके बाद वर्ष,2023 में ग़ज़ल कुंभ हरिद्वार में तथा वर्ष,2024 में ग़ज़ल कुंभ मुंबई में भी सहभागिता की थी।इस बार पुनः ग़ज़ल कुंभ हरिद्वार में अपने साथियो सुरेंद्र अश्क रामपुरी, राजवीर सिंह राज़, प्रदीप माहिर तथा सुधाकर सिंह के साथ सहभागिता का अवसर प्राप्त हो रहा है।इस बार का अवसर मेरे लिए और ख़ास हो जाता है क्योंकि इस बार वहाँ मेरे दूसरे ग़ज़ल संग्रह 'कुछ मीठा कुछ खारा' का विमोचन भी प्रस्तावित है।
रामपुर से से इस बार दो और साहित्यकार अशफ़ाक़ रामपुरी तथा जावेद रहीम भी इस कार्यक्रम में शिरकत करने वाले हैं।श्री दनकौरी जी के पास ऐसे बडे़ साहित्यिक अनुष्ठान संपन्न कराने का लंबा अनुभव है। उनके पास समर्पित साहित्यकारों और व्यवस्था देखने वालों की एक पूरी टीम होती है जो बहुत मुस्तैदी के साथ अपने काम को अंजाम देती हैं।इस बार की उनकी टीम के कुछ प्रमुख नाम हैं सीमा सिकंदर जी, महव जबलपुरी जी,शैलेश अग्रवाल जी, अलका शरर जी तथा अली अब्बास नौगांवी जी आदि।धन्य हैं वे लोग जो इस साहित्यिक अनुष्ठान में सम्मिलित होते हैं और अनुशासित ढंग से इस दो दिवसीय कार्यक्रम को गरिमा के साथ पूर्ण कराने में अपना सहयोग प्रदान करते हैं।ऐसे कार्यक्रमों में सिर्फ़ रचना पाठ करना ही साहित्यकारों का मक़सद नहीं होता बल्कि ऐसे अवसरों पर दूसरे लोगों से मिलकर उनका हालचाल जानना तथा विभिन्न विषयों पर अनौपचारिक परिवेश में वार्तालाप/संवाद करके अपने चिंतन को निखारना भी एक उद्देश्य होता है।
मैं दीक्षित दनकौरी जी को मुझे ग़ज़ल कुंभ में आमंत्रित करने हेतु धन्यवाद ज्ञापित करता हूं और कामना करता हूं कि वे स्वस्थ्य और मस्त रहते हुए प्रति वर्ष यों ही इस प्रकार के साहित्यक यज्ञों का आयोजन कराते रहें।
प्रस्तुतकर्ता : ग़ज़लकार ओंकार सिंह विवेक
ग़ज़ल कुंभ की पुरानी यादें 🌹🌹👈👈
January 10, 2025
विश्व हिन्दी दिवस पर
---- @ओंकार सिंह विवेक
🌷
दुनिया में भारत के गौरव,मान और सम्मान की,
आओ बात करें हम अपनी, हिन्दी के यशगान की।
जय अपनी हिन्दी ,जय प्यारी हिन्दी ------------
🌷
राष्ट्र संघ-से बड़े मंच पर,अपना सीना तानकर,
हिन्दी में भाषण देना है ,ऐसा मन में ठानकर।
रक्षा अटल बिहारी जी ने, की हिन्दी के मान की
आओ बात करें---------------
जय अपनी हिन्दी,जय प्यारी हिन्दी-----------
🌷
परिचित होने इस अलबेले,अनुपम हिन्दुस्तान से,
आज विदेशी सीख रहे हैं, हिन्दी भाषा शान से।
बात हमारे लिए साथियो, है कितने अभिमान की
आओ बात करें-----------------
जय अपनी हिन्दी ,जय प्यारी हिन्दी -----------
🌷
आज नहीं हिन्दी का उनको , मूलभूत भी ज्ञान है,
अँगरेज़ी की शिक्षा पर ही ,बस बच्चों का ध्यान है।
सोचो क्या यह बात नहीं है , हिन्दी के अपमान की
आओ बात करें-------------------
जय अपनी हिन्दी ,जय प्यारी हिन्दी ------------
🌷
अपने घर में हिन्दी भाषा, कभी नहीं लाचार हो,
इसको अँगरेज़ी पर शासन, करने का अधिकार हो।
बच पाएगी तभी विरासत, सूर और रसखान की
आओ बात करें---------------------
जय अपनी हिन्दी,जय प्यारी हिन्दी ---- ------
🌷 @------ओंकार सिंह विवेक
January 9, 2025
दोस्तो नई ग़ज़ल के साथ हाज़िरी
ख़ूब देकर ख़बर गया मौसम,
ख़ौफ़ ज़हनों में भर गया मौसम।
लोग मिलते थे बिन ग़रज़ के यहाँ,
वो तो कब का गुज़र गया मौसम।
मेह बरसाके ख़ुश्क फ़सलों पर,
मोतियों-सा बिखर गया मौसम।
आह निकली है अन्नदाता की,
हाय ! क्या ज़ुल्म कर गया मौसम।
की गई छेड़-छाड़ क़ुदरत से,
यूँ ही थोड़ी बिफर गया मौसम।
खिल उठा दिल, जब उनकी यादों का,
सहने-दिल में उतर गया मौसम।
देखिए तो 'विवेक' ! घाटी के,
हुस्न पर जादू कर गया मौसम।
©️ ओंकार सिंह विवेकJanuary 8, 2025
मानव-स्वास्थ्य
मानव-स्वास्थ्य
*************
जब हम किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य की बात करते हैं तो मन में प्राय: शारीरिक स्वास्थ्य का भाव ही उत्पन्न होता है।स्वास्थ्य शब्द का प्रसंग आने या चर्चा होने पर हम किसी व्यक्ति के शरीर की संरचना या उसके मोटे अथवा पतले होने की दशा तक ही सीमित हो जाते हैं।वास्तव में स्वास्थ्य शब्द अपने आप में बहुत व्यापकता लिए हुए है।व्यक्ति के सम्पूर्ण स्वास्थ्य के दो पहलू होते हैं-- पहला शारीरिक स्वास्थ्य और दूसरा मानसिक तथा आत्मिक स्वास्थ्य।किसी व्यक्ति को स्वस्थ तभी कहा जा सकता है जब वह व्यक्ति भौतिक शरीर से स्वस्थ होने के साथ ही मानसिक और आत्मिक रूप से भी पूरी तरह स्वस्थ हो। यदि कोई व्यक्ति शारीरिक रूप से बहुत बलिष्ठ है परन्तु मानसिक रूप से बीमार है तो हम उसे स्वस्थ व्यक्ति की श्रेणी में नहीं रख सकते।इसी प्रकार यदि कोई व्यक्ति मानसिक स्तर पर सक्षम हो परन्तु शारीरिक दृष्टि से कमज़ोर हो तो भी हम उसे पूरी तरह स्वस्थ नहीं कह सकते |
व्यक्ति को अपने स्थूल शरीर को स्वस्थ रखने के लिए अच्छे खान-पान ,व्यायाम अथवा शारीरिक श्रम की आवश्यकता होती है।यदि वह ऐसा नहीं करेगा तो उसका शरीर दुर्बल हो जायेगा और उसकी प्रतिरोधक क्षमता भी शिथिल पड़ जाएगी।परिणामस्वरूप व्यक्ति शारीरिक रूप से असक्त होकर अनेक व्याधियों का शिकार हो जाएगा।इस अवस्था से बचने के लिए उसे अपने शरीर को चलाने के लिए अपनी डाइट पर ध्यान देना होगा।शरीर को स्वस्थ रखने के लिए सभी मौसमी फल, सब्ज़ियां, दूध,घी या जो भी प्रकृति ने हमें सुपाच्य खाद्य उपलब्ध कराया है उसका सेवन करना चाहिए एवं किसी भी रोग से ग्रस्त होने की दशा में चिकित्सीय परामर्श लेना चाहिए।
व्यक्ति को पूर्ण रूप से स्वस्थ होने के लिए स्थूल शरीर के साथ-साथ अपने आत्मिक स्वास्थ्य की चिंता करना भी परम आवश्यक है।यदि व्यक्ति शारीरिक रूप से बलशाली है परन्तु उसकी आत्मा और मन बीमार और कमज़ोर हैं तो भी व्यक्ति का समग्र विकास संभव नहीं है। अत :व्यक्ति के लिए अपने तन के स्वास्थ्य के साथ मन और आत्मा के स्वास्थ्य की चिंता करना भी उतना ही आवश्यक है। जिस तरह स्थूल शरीर के स्वास्थ्य के लिए अच्छा व्यायाम और भोजन आवश्यक है उसी प्रकार मन और आत्मा के अच्छे स्वास्थ्य के लिए व्यक्ति का अच्छे लोगों की संगत में बैठना और अच्छा साहित्य पढ़ना भी अति आवश्यक है।जिस प्रकार अच्छा भोजन स्थूल शरीर की ख़ुराक है उसी प्रकार अच्छे लोगों की संगत एवं अच्छे साहित्य का पठन-पाठन व्यक्ति के मन और आत्मा की ख़ुराक है।
मन और आत्मा को स्वस्थ रखने के लिए सदैव सकारात्मक सोच,सत्संग् और अच्छे साहित्य को पढ़ते रहना अति आवश्यक है।अत: यदि व्यक्ति शारीरिक और मानसिक दोनों ही रूप से स्वस्थ होगा तभी उसका चारित्रिक विकास संभव है :
तन तेरा मज़बूत हो, मन भी हो बलवान।
अपने इस व्यक्तित्व को,सफल तभी तू मान।।
©️ ओंकार सिंह विवेक
January 6, 2025
हाय रे सर्दी !!!
कुंडलिया
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----ओंकार सिंह विवेक
सर्दी से यह ज़िंदगी , जंग रही है हार।
हे भगवन!अब धूप का,खोलो थोड़ा द्वार।।
खोलो थोड़ा द्वार, ठिठुरते हैं नर-नारी।
जाने कैसी ठंड , जमी हैं नदियाँ सारी।
बैठे हैं सब लोग ,पहन कर ऊनी वर्दी।
फिर भी रही न छोड़,बदन को निष्ठुर सर्दी।।
---ओंकार सिंह विवेक
(चित्र : गूगल से साभार)
January 2, 2025
कुछ दोहे घातक सर्दी के नाम!!!
माह जनवरी आ गया,ठंड हुई विकराल।
ऊपर से करने लगा,सूरज भी हड़ताल।।
🌹🌹
बोला आँख तरेरकर, सुलगा हुआ अलाव।
और कहीं ऐ ठंड तू, दिखलाना यह ताव।।
🌹🌹
खाँसी और ज़ुकाम का,करके काम तमाम।
अदरक वाली चाय ने, ख़ूब कमाया नाम।।
🌹🌹
कल कुहरे का देखकर,दिन-भर घातक रूप।
कुछ पल ही छत पर रुकी,सहमी-सहमी धूप।।
🌹🌹
©️ ओंकार सिंह विवेक
January 1, 2025
नव वर्ष,2025 मंगलमय हो !!!
नए साल से उम्मीद बाँधे हुए एक ग़ज़ल
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-- ओंकार सिंह विवेक
©️
जहाँ में हर इक शख़्स ख़ुशहाल होगा,
तवक़्क़ो है अच्छा नया साल होगा।
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मुहब्बत के हर सू परिंदे उड़ेंगे,
कहीं नफ़रतों का न अब जाल होगा।
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बढ़ेगी न केवल अमीरों की दौलत,
ग़रीबों का तबक़ा भी ख़ुशहाल होगा।
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सुगम होंगी सबके ही जीवन की राहें,
न भारी किसी पर नया साल होगा।
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सलामत रहेगी उजाले की हस्ती,
अँधेरा जहाँ भी है पामाल होगा।
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उठाएँगे ज़िल्लत यहाँ झूठ वाले,
बुलंदी पे सच्चों का इक़बाल होगा।
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न होगा फ़क़त फ़ाइलों-काग़ज़ों में,
हक़ीक़त में भी मुल्क ख़ुशहाल होगा।
---©️ ओंकार सिंह विवेक
रामपुर-उoप्रo
December 31, 2024
सदीनामा अख़बार में इस साल के अंत में छपी ग़ज़ल मुलाहिज़ा फरमाएँ
December 30, 2024
वर्तमान राजनैतिक परिदृश्य को लेकर कुछ दोहे
December 24, 2024
अपने शहर के बहाने कुछ बातें कुछ शे'र
December 20, 2024
आज एक सामयिक नवगीत !
आज एक नवगीत : सर्दी के नाम
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-- ©️ओंकार सिंह विवेक
छत पर आकर बैठ गई है,
अलसाई-सी धूप।
सर्द हवा खिड़की से आकर,
मचा रही है शोर।
काँप रहा थर-थर कुहरे के,
डर से प्रतिपल भोर।
दाँत बजाते घूम रहे हैं,
काका रामसरूप।
अम्मा देखो कितनी जल्दी,
आज गई हैं जाग।
चौके में बैठी सरसों का,
घोट रही हैं साग।
दादी छत पर ले आई हैं,
नाज फटकने सूप।
आए थे पानी पीने को,
चलकर मीलों-मील।
देखा तो जाड़े के मारे,
जमी हुई थी झील।
करते भी क्या,लौट पड़े फिर,
प्यासे वन के भूप।
--- ©️ओंकार सिंह विवेक
December 17, 2024
ग़ज़ल कुंभ,2023 की यादें
December 16, 2024
दोहों के कुछ वीर
December 14, 2024
यादों के झरोखों से -- स्मृतिशेष आनंद कुमार गौरव जी
यादों के झरोखों से (स्मृतिशेष आनंद कुमार गौरव जी)
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स्मृतिशेष आनंद कुमार गौरव जी से मेरा परिचय प्रथमा बैंक(अब प्रथमा यू पी ग्रामीण बैंक) में सेवारत रहते हुए हुआ था। वैसे तो गौरव जी प्रथमा बैंक के रामपुर क्षेत्र की एक ग्रामीण शाखा में भी कार्यरत रहे परंतु मेरा उनसे प्रगाढ़ परिचय बैंक के रामगंगा विहार मुरादाबाद स्थित मुख्य कार्यालय में तैनाती के दौरान ही हुआ। गौरव जी मुख्यालय के वसूली विभाग में कार्यरत थे तथा मैं योजना एवं विकास विभाग में तैनात था। उस दौरान बैंकिंग कार्यों से इतर उनसे लंबी साहित्यिक वार्ताएं भी होती थीं।गौरव जी अपने उपन्यासों से साहित्य की गद्य विधा में जहाँ अपना लोहा मनवा चुके थे वहीं उन्होंने श्रेष्ठ गीतों और कविताओं के माध्यम से काव्य के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बनाई। स्मृतिशेष गौरव जी बहुत सुघड़ व्यक्तित्व के स्वामी थे।मैं उनके ड्रेसिंग सेंस आदि से ख़ासा प्रभावित रहता था। किसी को भी पहली बार में ही अपनी बातचीत से प्रभावित कर लेने का उनमें अद्भुत कौशल था। अपनी-अपनी साहित्यिक अभिरुचियों के कारण हम लोग बैंक की गृह पत्रिका 'बुलंदियाँ' से जुड़े हुए थे। पत्रिका के प्रकाशन से पूर्व आयोजित होने वाली सम्पादक मंडल की बैठकों में उनसे ख़ूब बातचीत होती थी।बात चाहे बैंकिंग कार्यों की हो अथवा साहित्य सृजन की,गौरव जी लीक से हटकर ख़ास अंदाज़ से कार्य संपादन करने में विश्वास रखने वाले व्यक्ति थे।
(आनंद कुमार गौरव जी का माल्यार्पण द्वारा स्वागत करते हुए मुरादाबाद के साहित्यकार राजीव प्रखर जी)कुछ दिनों जब मैंने 'बुलंदियाँ' का संपादन किया था तो उनकी एक कविता उनसे आग्रह पूर्वक लेकर पत्रिका में छापी थी जो यहाँ साझा कर रहा हूँ :
कौन लेकर चलेगा
कथित सभ्य समाज की
सभ्यता की लाशें
इस सभ्य समाज से बाहर
जो अब सड़ांध दे रही हैं
जो ख़तरा बन गई हैं
समाज के स्वास्थ्य के लिए
जो छिपाकर रखी हैं
समाज के ठेकेदारों ने
कई आवरणों के पीछे
ये लाशें बोल नहीं पातीं
पर इनकी दुर्गंध
संभवत: यही पूछती है
क्या हमें मिलेगा
चिता में जलने का अधिकार?
आनंद कुमार गौरव जी का जन्म ज़िला बिजनौर के ग्राम भगवानपुर में हुआ था। गौरव जी का निधन लंबी बीमारी के उपरांत 18 अप्रैल,2024 को मुरादाबाद में हुआ।उनका पहला गीत-संग्रह ‘मेरा हिन्दुस्तान कहां है’ काफ़ी चर्चित रहा था।वर्ष 2008 में उनका कविता-संग्रह ‘शून्य के मुखौटे’ और वर्ष 2015 में दूसरा गीत-संग्रह ‘सांझी-सांझ’ आया। उनकी इन कृतियों को भी साहित्य जगत में ख़ूब मान मिला।
उनके एक गीत की यह मार्मिक पंक्तियां देखिए :
पते पर नहीं जो पहुँची, उस चिट्ठी जैसा मन है,
रिक्त अंजुरी-सा मन है।
उनके भाव विभोर करने वाले एक और गीत की पंक्तियाँ देखें :
आज प्रिय आलिंगन को यूं, मृदुतम अनुबंधों के स्वर दो,
निज आँसू अवसाद पीर सब, मेरे रोम-रोम में भर दो।
उनके उपन्यास ‘आंसुओं के उस पार’ व ‘थका-हारा सुख’ भी साहित्य-जगत में बहुत चर्चित हुए।
आज स्मृतिशेष आनंद कुमार गौरव जी की कमी बहुत खल रही है।मैं दिल की गहराईयों से उन्हें श्रद्धा-सुमन अर्पित करता हूँ
🌹 🌹 🙏🙏
-- साहित्यकार ओंकार सिंह विवेक
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
December 11, 2024
ज्ञान 'गीता' का
December 7, 2024
हाज़िरी नई ग़ज़ल के साथ
पुत्री कोआशीर्वाद देने हेतु रामपुर नगर (उत्तर प्रदेश) के कई प्रसिद्ध कविगण तथा शा'इर उपस्थित हुए।सभी का मैं हृदय से आभार प्रकट करता हूं 🌹🌹🙏🙏
लीजिए पेश है मेरी नई ग़ज़ल
***********************
©️
जो मुखौटा कहीं उतर जाए,
आज का शख़्स ख़ुद से डर जाए।
उसका जीना भी कोई जीना है,
जिस बशर का ज़मीर मर जाए।
पाए मोहन भी रोज़गार यहाँ,
और अहमद भी काम पर जाए।
ये जो मुझ पर है शा'इरी का नशा,
कोई सूरत नहीं, उतर जाए।
सब में कमियाँ निकालने वाले,
तेरी ख़ुद पर भी तो नज़र जाए।
कितनों की आज भी ये ख़्वाहिश है,
तीरगी से चराग़ डर जाए।
भीड़ हर सू है चालबाज़ों की,
साफ़-दिल आदमी किधर जाए।
©️ ओंकार सिंह विवेक
लड़ेगा हवा से दिया जानते हैं 🌹🌹👈👈
December 5, 2024
अपनों के बहाने !
कुंडलिया छंद
************
©️
आहत कैसे हो नहीं, यह दिल बारंबार।
अपने ही जब नित करें,घातक शब्द-प्रहार।।
घातक शब्द-प्रहार, हुआ है मुश्किल जीना।
जीवन का सुख-चैन,आज अपनों ने छीना।
करो कृपा हे ईश! तनिक हो जाए राहत।
अपनों के कटु शब्द,करें अब और न आहत।।
©️ ओंकार सिंह विवेक
Foundation year celebration of Rampur Raza Library and Museum 👈👈
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शुभ प्रभात मित्रो 🌹🌹🙏🙏 संगठन में ही शक्ति निहित होती है यह बात हम बाल्यकाल से ही एक नीति कथा के माध्यम से जानते-पढ़ते और सीखते आ रहे हैं...