ग़ज़ल***ओंकार सिंह विवेक 🌷 अरे इंसान ! तू क्यों बे - ख़बर है, तेरे हर काम पर रब की नज़र है। 🌷 जुदा पत्ते हुए जाते हैं...
आपके स्नेह-आशीष की अभिलाषा के साथ आज अपने जन्मदिन के अवसर पर एक ग़ज़ल के साथ आपसे मुखातिब हूँ : ग़ज़ल ...