ग़ज़ल***ओंकार सिंह विवेक 🌷 अरे इंसान ! तू क्यों बे - ख़बर है, तेरे हर काम पर रब की नज़र है। 🌷 जुदा पत्ते हुए जाते हैं...
कोलकता के प्रतिष्ठित अख़बार 'सदीनामा' का ग़ज़ल प्रकाशित करने के लिए एक बार फिर हार्दिक आभार प्रकट करता हूँ 🌹🌹🙏🙏 आ...