ग़ज़ल***ओंकार सिंह विवेक 🌷 अरे इंसान ! तू क्यों बे - ख़बर है, तेरे हर काम पर रब की नज़र है। 🌷 जुदा पत्ते हुए जाते हैं...
व्हाट्सएप्प पर, 'रचनाकार दिल्ली -1' एक प्रतिष्ठित साहित्यिक ग्रुप है।मैं भी पिछले कई वर्ष से इस समूह से जुड़ा हुआ हूँ।कई...