September 9, 2020

मन का पंछी

🌺 दोहै 🌺
         ------ओंकार सिंह विवेक
************************

  🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺

भरता  रहता  है सखे ,यह हर समय उड़ान,
मन के पंछी को कभी, होती  नहीं  थकान।

  🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺

सब  ही मैला कर  रहे,निशि दिन इसका नीर,
यह नदिया किससे कहे,जाकर  अपनी  पीर।

  🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺

दिन भर हमने सूर्य की , किरणों से की बात,
रात  घिरी  तो  देख  ली , तारों  की  बारात।

  🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺

पत्नी  से   संवाद  में , गए  सखे  जब  हार,
बैठ  गए चुपचाप फिर,पढ़ने  को अख़बार।

 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺
                    ------ओंकार सिंह विवेक
                         (सर्वाधिकार सुरक्षित)

टिप्पणियाँ

Featured Post

दिल की बात ग़ज़ल के साथ

आपके स्नेह-आशीष की अभिलाषा के साथ आज अपने जन्मदिन के अवसर पर एक ग़ज़ल के साथ आपसे मुखातिब हूँ :                     ग़ज़ल       ...