कोलकता से निकलने वाले प्रतिष्ठित अख़बार/पत्रिका सदीनामा के बारे में पहले भी मैं कई बार अपने ब्लॉग पर लिख चुका हूं।यह बहुत ही प्रतिष्ठित पत्र है जिसमें राजनैतिक,सामाजिक ख़बरों के साथ-साथ उच्च स्तर की साहित्यिक सामग्री भी प्रकाशित की जाती है। मशहूर शायर मुहतरम ओमप्रकाश नूर साहब की मुहब्बतों के चलते पहले भी इस पत्र में मेरी कई ग़ज़लें छप चुकी हैं।इस अख़बार की प्रतिनिधि मीनाक्षी जी और आदरणीय नूर साहब के सहयोग से इस इदारे के अदबी पटल पर ऑनलाइन काव्य पाठ का भी अवसर प्राप्त हो चुका है।इसके लिए मैं इदारे का शुक्रिया अदा करता हूं।आज फिर मुझे अपनी एक नई ग़ज़ल सदीनामा में पढ़ने को मिली। इसके लिए मैं अख़बार के संपादक मंडल का पुन: आभार व्यक्त करता हूं।
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ताना-बाना
नई ग़ज़ल का आनंद लीजिए साथियो 🥀🥀🙏🙏 ग़ज़ल **** इतने उलझे संबंधों के ताने-बाने हैं, अपने ...
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(प्रथमा यू पी ग्रामीण बैंक सेवानिवृत्त कर्मचारी कल्याण समिति के अध्यक्ष श्री अनिल कुमार तोमर जी एवं महासचिव श्री इरफ़ान आलम जी) मित्रो संग...
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बहुुुत कम लोग ऐसे होते हैैं जिनको अपनी रुचि के अनुुुसार जॉब मिलता है।अक्सर देेखने में आता है कि लोगो को अपनी रुचि से मेल न खाते...
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शुभ प्रभात मित्रो 🌹🌹🙏🙏 संगठन में ही शक्ति निहित होती है यह बात हम बाल्यकाल से ही एक नीति कथा के माध्यम से जानते-पढ़ते और सीखते आ रहे हैं...
Zabardast
ReplyDeleteहार्दिक आभार।
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