March 21, 2026

चतुर सुजान

मित्रो सादर प्रणाम 🌹🌹🙏🙏

आज के चतुर नेताओं के चरित्र को उजागर करता एक कुण्डलिया छंद प्रस्तुत है।आपकी प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी 🙏🙏


जिसकी  बनती  हो  बने, सूबे  में  सरकार।

हर  दल   में  हैं  एक-दो, उनके  रिश्तेदार।।

उनके   रिश्तेदार, रोब   है   सचमुच   भारी।

सब   साधन  हैं   पास,नहीं  कोई  लाचारी।

अब उनकी दिन-रात,सभी से गाढ़ी छनती।

बन जाए सरकार,यहाँ हो जिसकी बनती।।

-- ओंकार सिंह विवेक(सर्वाधिकार सुरक्षित)


       काव्य संसार 🌹🌹👈👈

टिप्पणियाँ

Featured Post

है उसमें बड़ा हौसला जानते हैं

कोलकता के प्रतिष्ठित अख़बार  'सदीनामा' का ग़ज़ल प्रकाशित करने के लिए एक  बार  फिर हार्दिक आभार प्रकट करता हूँ 🌹🌹🙏🙏 आ...