आज के चतुर नेताओं के चरित्र को उजागर करता एक कुण्डलिया छंद प्रस्तुत है।आपकी प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी 🙏🙏
जिसकी बनती हो बने, सूबे में सरकार।
हर दल में हैं एक-दो, उनके रिश्तेदार।।
उनके रिश्तेदार, रोब है सचमुच भारी।
सब साधन हैं पास,नहीं कोई लाचारी।
अब उनकी दिन-रात,सभी से गाढ़ी छनती।
बन जाए सरकार,यहाँ हो जिसकी बनती।।
-- ओंकार सिंह विवेक(सर्वाधिकार सुरक्षित)
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