October 8, 2026

'रचनाकार दिल्ली -1' साहित्यिक पटल की ग़ज़ल कार्यशाला


व्हाट्सएप्प पर, 'रचनाकार दिल्ली -1' एक प्रतिष्ठित साहित्यिक ग्रुप है।मैं भी पिछले कई वर्ष से इस समूह से जुड़ा हुआ हूँ।कई बार इस समृद्ध और अनुशासित पटल के बारे में अपने ब्लॉग पर लिख भी चुका हूँ।
मंगलवार को इस पटल पर ग़ज़ल विधा की कार्यशाला का आयोजन किया जाता है।मैं भी माह में एक बार ग़ज़ल कार्यशाला में समीक्षक के तौर पर ग़ज़ल रचनाओं की समीक्षा करता हूँ। निःसंदेह इस पटल से जुड़े साहित्यकार काफ़ी अच्छा कह रहे हैं।
पिछली बार जो ग़ज़ल कार्यशाला आयोजित की गई उस कार्यक्रम का सूचना पत्र पटल से साभार लेकर ज्यों का त्यों आपके अवलोकनार्थ प्रस्तुत कर रहा हूँ --

गजल कार्यशाला
मंगलवार दिनांक 6/10/2026
 प्रस्तुत है मशहूर शायर 
अब्दुरसिद खान कैफ़ी महकारी जी
की ग़ज़ल के लिए गया  मिसरा --
*दिल का  किस्सा तमाम करते  हैं*
बहर -- 2122, 12 12, 22
क़ाफ़िया -- आम 
रदीफ़ -- करते  हैं 
क़ाफ़िया के  उदाहरण --
आम, नाम, जाम, शाम, बदनाम, बाम, ग़ुलाम, सलाम, क़लाम, तमाम, इनाम, लगाम, आदि 
प्रबंधन मण्डल
रचनाकार
 (रचनाकार दिल्ली -1 के पटल से साभार उद्धृत)

दिए गए मिसरे पर मैंने भी ग़ज़ल कही।समीक्षकों तथा पटल प्रबंधन मंडल ने उस मिसरे पर कही गई ग़ज़लों में मेरी ग़ज़ल को सम्मानित करने हेतु चयनित किया इसके लिए मैं पटल का हार्दिक आभार प्रकट करता हूँ।
पटल पर किसी विधा की कार्यशाला के आयोजन के बाद समीक्षकों तथा प्रबंधन मंडल द्वारा सर्वसम्मति से निर्णय लेकर कितने व्यवस्थित और पारदर्शी ढंग से सर्वश्रेष्ठ रचनाकार आदि का चयन करके सूचना पटल पर पोस्ट की जाती है यह नीचे दिए गए विवरण से समझा जा सकता है --

*रचनाकार दिल्ली 1*

*पंजीयन क्रमांक 2434/2018*

*एक कदम साहित्यिक उत्कृष्टता की ओर*

*संवेदना सृजन सम्मान के साथ*

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*पटल परिणाम*

दिनांक --  6/10/2026

दिन --  मंगलवार

मिसरा  -- दिल का किस्सा तमाम करते हैं ।

विधा --गजल

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*दैनिक सम्मान*
1- सर्वश्रेष्ठ रचनाकार सम्मान
आ० पंकज त्यागी असीम जी
आ० ओंकार सिंह विवेक जी
आ० सरफराज हुसैन फराज जी
 
2- उत्कृष्ट समीक्षा सम्मान
आ० शेख मुहम्मद हनीफ रजवी जी
आ० प्रदीप राजपूत माहिर जी

3 - संचालन कौशल सम्मान
आ० ललितपाल सिंह अर्कवंशी जी

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सभी चयनित साहित्यसाधको को हार्दिक बधाई 
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*एक किरण विश्वास की*
*सबके साथ विकास की* 

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प्रबंधन मंडल
रचनाकार
       (रचनाकार दिल्ली -1 पटल से साभार)

मेरी उस ग़ज़ल का आप भी रसास्वादन कीजिए जिसे दो अन्य साहित्यकारों की ग़ज़लों के साथ सर्वश्रेष्ठ ग़ज़लों की श्रेणी में रखा गया --
               ग़ज़ल 
               *****

ज़ेहन  से  यूँ  तो  काम  करते  हैं, 

दिल का भी  एहतिराम करते  है। 


लोग सुख में तो  जप नहीं  करते,

दुक्ख   में    राम-राम   करते  हैं।


चंट  बनिए  कि  सीधे  लोगों  का,

लोग   जीना   हराम   करते    हैं। 


गीत   से   भी   नहीं  गुरेज़   मगर,          

हम  ग़ज़ल  में   कलाम  करते  हैं। 


बस  बजाते  हैं  गाल  ही   हज़रत!

या   कोई    काम-वाम   करते   हैं?


सादगी   के   निकट   है   बौना-सा,

आप   जो    ताम-झाम   करते  हैं।


जिनको चैन-ओ-सुकूँ की हो हाजत,

मन   को   ज़ेर-ए-लगाम  करते  हैं।

            -- ओंकार सिंह विवेक 

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