पिछले दो दिन से मौसम का अप्रत्याशित क़हर जारी है।भयंकर बारिश और बाढ़ की ख़बरों के बीच संसाधनों के क्षरण और जन हानि की भी निरंतर ख़बरें आ रही हैं।शासन-प्रशासन आपदा से निपटने के भरसक प्रयास कर रहा है।ईश्वर जल्द ही इस विपत्ति से मुक्ति दिलाएँ हमारी यही कामना है।
कल शाम को कवि भाई राजवीर सिंह राज़ का फ़ोन आया कि विवेक जी मूसलाधार बारिश के चलते सभी घरों में क़ैद हैं, कहीं आना-जाना नहीं हो रहा है।क्यों न कवि गोष्ठी रख ली जाए। मैंने कहा क्यों नहीं, नेकी और पूछ पूछ।
बस फिर क्या था 6-7 साथी शाम 6 बजे भाई राजवीर सिंह राज़ के यहाँ इकट्ठे हो गए।
बातचीत और जलपान के साथ बहुत ही अनौपचारिक माहौल में एक बढ़िया काव्य गोष्ठी हो गई।सोचाआपको भी इस काव्य गोष्ठी में शरीक किया जाए।
गोष्ठी में अपनी रचना पढ़ते हुए कवि पतराम सिंह जी ने कहा--
माँ सरस्वती के चरणों में
कुछ पुष्प में अर्पित करता हूँ
हूँ अज्ञानी दो ज्ञान मुझे
सर्वस्व समर्पण करता हूँ
ओंकार सिंह विवेक ने सामाजिक सरोकारों से ओतप्रोत अपने कुछ अशआर पेश करते हुए कहा --
हँसते-मुस्काते जो हर दिन ग़म के दरिया पार करें,
ख़ुशियाँ कैसे उनका स्वागत करने से इंकार करें।
इक दूजे से नफ़रत का अंजाम तो सबने देख लिया,
बेहतर होगा बैर भुलाकर अब आपस में प्यार करें।
मेज़बान राजवीर सिंह राज़ ने अपने सुंदर तरन्नुम में रचना पढ़ते हुए कहा --
ज़मीं से आस्माँ तक चल
मकीं अपने मकाँ तक चल
ये भटकन दूर हो जाए
तू लश्कर कारवाँ तक चल
कवि प्रदीप माहिर जी ने अपनी दमदार प्रस्तुति में कहा --
मिलता ही नहीं खुल के कभी यार हमारा
अब इतना बुरा भी नहीं किरदार हमारा
हर एक से दिल खोलकर मिलने की बदौलत
ढाका ही रहा अपना न कंधार हमारा
गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे कवि शिव कुमार चन्दन जी ने कहा--
प्रखर शक्ति संचार करो माँ
मन चन्दन कर दो
गहन तमस में जन जीवन में
उजियारा भर दो
सुरेंद्र अश्क रामपुरी ने कहा--
वो जिसका नाम सदियों से रहा है
मेरी कश्ती को वो ही खे रहा है
मेरा कासा क्यों सबसे भीख माँगे
वही देगा जो सबको दे रहा है
सुधाकर सिंह परिहार जी ने अपनी अभिव्यक्ति कुछ इस तरह दी --
निषाद जी के सहपाठी राम
विश्वामित्र की लाठी राम
हम देखिल बनवासी राम
घट घट के ऊ वासी राम
पिता के वचन निभाइन राम
देर रात तक चली काव्य गोष्ठी में कवियों ने अपनी धारदार रचनाओं से ख़ूब रंग जमाया।गोष्ठी का सफल संचालन मेज़बान कवि राजवीर सिंह राज़ द्वारा किया गया।
--- ओंकार सिंह विवेक
वाह!! बहुत सुंदर आयोजन
ReplyDeleteआभार आदरणीया
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