September 19, 2026

नई ग़ज़ल


दोस्तो नई ग़ज़ल का आनंद लीजिए 👇👇

❤️💢🌹🥀🌾🌺🪷🌱🌴💐🌷🍀🌿

किसी  की  बंद  मुट्ठी  खुल  गई है,

बची थी साख जो कुछ,धुल गई है।


अगर  सब  ठीक  है तो  ये बताओ, 

चमन को छोड़ क्यों बुलबुल गई है?


पनपते भाई-चारे   के  शजर   को,    

सियासत  काटने  पर  तुल  गई है।


यक़ीनन कोई तो मक़सद है उनका,

जो यूँ मिसरी ज़बाँ  पर घुल गई है।


नज़र  मासूम  कितने  आ   रहे  हैं,

वो  जिनकी पोल-पट्टी खुल गई है।


बहुत  आभार   है   सद्भावना   का,

त'अस्सुब का वो ढाकर पुल गई है।


किसी  की  याद  की पुरवा सुहानी,

हमें  करके  बहुत  व्याकुल  गई है।     

       --- ओंकार सिंह विवेक

(सर्वाधिकार सुरक्षित) 



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