August 7, 2020

सरस्वती वंदना

6 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (09-08-2020) को     "भाँति-भाँति के रंग"  (चर्चा अंक-3788)     पर भी होगी। 
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।  
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  
    --

    ReplyDelete
  2. बहुत सुंदर वंदना

    ReplyDelete
  3. सुन्दर प्रस्तुति.

    ReplyDelete
  4. माँ शारदे पर सुंदर भाव पूर्ण दोहे।
    बहुत सुंदर सरस सृजन।

    ReplyDelete

Featured Post

सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल (बनारस यात्रा भाग -1)

सफ़र की हद है वहाँ तक कि कुछ निशान रहे, चले  चलो  के  जहाँ  तक   ये  आसमान  रहे। ये क्या उठाये क़दम और  आ गई मन्ज़िल...