November 30, 2019
November 29, 2019
November 26, 2019
सूखे हुए निवाले
ग़ज़ल-ओंकार सिंह विवेक
मोबाइल 9897214710
मोबाइल 9897214710
काम हमारे रोज़ उन्होंने अय्यारी से टाले थे,
जिनसे रक्खी आस कहाँ वो यार भरोसे वाले थे।
जिनसे रक्खी आस कहाँ वो यार भरोसे वाले थे।
जब मोती पाने के सपने इन आँखों में पाले थे,
गहरे जाकर नदिया , सागर हमने ख़ूब खँगाले थे।
गहरे जाकर नदिया , सागर हमने ख़ूब खँगाले थे।
जिनकी वजह से सबको मयस्सर आज यहाँ चुपड़ी रोटी,
उनके हाथों में देखा तो सूखे चंद निवाले थे।
उनके हाथों में देखा तो सूखे चंद निवाले थे।
दाद मिली महफ़िल में थोड़ी तो ऐसा महसूस हुआ,
ग़ज़लों में हमने भी शायद अच्छे शेर निकाले थे।
ग़ज़लों में हमने भी शायद अच्छे शेर निकाले थे।
जंग भले ही जीती हमने पर यह भी महसूस किया,
जंग जो हारे थे हमसे वे भी सब हिम्मत वाले थे।
जंग जो हारे थे हमसे वे भी सब हिम्मत वाले थे।
--------ओंकार सिंह विवेक
(सर्वाधिकार सुरक्षित)
November 22, 2019
कभी सोचा नहीं
ग़ज़ल---ओंकार सिंह विवेक
आप में ही आगे बढ़ने का ज़रा जज़्बा नहीं,
बेसबब कहते हो , कोई रासता देता नहीं।
बेसबब कहते हो , कोई रासता देता नहीं।
ख़्वाब तो बेताब थे आँखें सजाने के लिए,
मैं ही लेकिन दो घड़ी को चैन से सोया नहीं।
मैं ही लेकिन दो घड़ी को चैन से सोया नहीं।
हो गए क्यों लीक पर चलकर ही तुम भी मुत्मइन,
क्यों नए रस्ते बनाने का कभी सोचा नहीं।
क्यों नए रस्ते बनाने का कभी सोचा नहीं।
फ़र्क है गर कोई तो है आदमी की सोच का,
काम कोई भी कभी छोटा बड़ा होता नहीं।
काम कोई भी कभी छोटा बड़ा होता नहीं।
आज सब राज़ी हैं तो तुम यह भरम मत पालना,
तुमसे कल को भी यहाँ कोई ख़फ़ा होगा नहीं।
-----ओंकार सिंह विवेक
तुमसे कल को भी यहाँ कोई ख़फ़ा होगा नहीं।
-----ओंकार सिंह विवेक
November 20, 2019
कुछ अपना अंदाज़
कुछ दोहे
हर पल की गंभीरता , कर देगी बीमार।
हँसी ठिठोली भी कभी, किया करो तुम यार।।
उठते हैं उनके लिए , सदा दुआ में हाथ।
जो ख़ुशियाँ हैं बाँटते, दीन हीन के साथ।।
अपनी क्षमता का किया , जब पूरा उपयोग।
पहुँच गए तब अर्श पर , यहाँ फ़र्श से लोग।।
मन बहलाने के सभी, साधन जिनके पास।
उनको ही देखा गया, मन से बड़ा उदास।।
यों तो सबसे तेज़ थी , उसकी ही रफ़्तार।
मगर संतुलन के बिना, दौड़ गया वह हार।।
अनुशासन में बाँध ली, जिसने मन की डोर।
उसे सफलता का मिला, बड़ा सुहाना भोर।।
---------ओंकार सिंह विवेक
(सर्वाधिकार सुरक्षित)
हर पल की गंभीरता , कर देगी बीमार।
हँसी ठिठोली भी कभी, किया करो तुम यार।।
उठते हैं उनके लिए , सदा दुआ में हाथ।
जो ख़ुशियाँ हैं बाँटते, दीन हीन के साथ।।
अपनी क्षमता का किया , जब पूरा उपयोग।
पहुँच गए तब अर्श पर , यहाँ फ़र्श से लोग।।
मन बहलाने के सभी, साधन जिनके पास।
उनको ही देखा गया, मन से बड़ा उदास।।
यों तो सबसे तेज़ थी , उसकी ही रफ़्तार।
मगर संतुलन के बिना, दौड़ गया वह हार।।
अनुशासन में बाँध ली, जिसने मन की डोर।
उसे सफलता का मिला, बड़ा सुहाना भोर।।
---------ओंकार सिंह विवेक
(सर्वाधिकार सुरक्षित)
November 10, 2019
मन नहीं है
ग़ज़ल-ओंकार सिंह विवेक
अगरचे उनसे कुछ अनबन नहीं है,
मिलें उनसे ,ये फिर भी मन नहीं है।
समझते हो इसे जितना सरल तुम,
सरल इतना भी यह जीवन नहीं है।
बताओ झूठ यह बोलोगे कब तक,
कि तुमको कोई भी उलझन नहीं है।
हैं क़ायम आपसी रिश्ते तो अब भी,
मगर इनमें वो अपनापन नहीं है।
बढ़ाता है ये मेरे फ़िक्र-ओ-फ़न को,
बुरा हरगिज़ सुख़न का फ़न नहीं है।
तो फिर यह फैसलों में देर कैसी,
विचारों में अगर भटकन नहीं है।
-----------ओंकार सिंह विवेक
अगरचे उनसे कुछ अनबन नहीं है,
मिलें उनसे ,ये फिर भी मन नहीं है।
समझते हो इसे जितना सरल तुम,
सरल इतना भी यह जीवन नहीं है।
बताओ झूठ यह बोलोगे कब तक,
कि तुमको कोई भी उलझन नहीं है।
हैं क़ायम आपसी रिश्ते तो अब भी,
मगर इनमें वो अपनापन नहीं है।
बढ़ाता है ये मेरे फ़िक्र-ओ-फ़न को,
बुरा हरगिज़ सुख़न का फ़न नहीं है।
तो फिर यह फैसलों में देर कैसी,
विचारों में अगर भटकन नहीं है।
-----------ओंकार सिंह विवेक
November 4, 2019
मन के भाव
दोहे
💐💐💐💐💐💐💐💐
चिन्तन का जब भी हुआ,मन में तेज़ बहाव।
आसानी से ढल गए , कविता में सब भाव।।
💐💐💐💐💐💐💐💐
यह अपनों का साथ है,यह अपनों का प्यार।
जो जीवन में दे रहा, मुझको ख़ुशी अपार।।
💐💐💐💐💐💐💐💐
--------ओंकार सिंह विवेक
(सर्वाधिकार सुरक्षित)
November 2, 2019
Subscribe to:
Posts (Atom)
Featured Post
अलविदा मनोज कुमार 🌹🌹🙏🙏
अलविदा मनोज कुमार जी ********************* (चित्र : गूगल से साभार) हिन्दी फ़िल्म उद्योग के एक बड़े अभिनेता और निर्दे...
-
(प्रथमा यू पी ग्रामीण बैंक सेवानिवृत्त कर्मचारी कल्याण समिति के अध्यक्ष श्री अनिल कुमार तोमर जी एवं महासचिव श्री इरफ़ान आलम जी) मित्रो संग...
-
बहुुुत कम लोग ऐसे होते हैैं जिनको अपनी रुचि के अनुुुसार जॉब मिलता है।अक्सर देेखने में आता है कि लोगो को अपनी रुचि से मेल न खाते...
-
शुभ प्रभात मित्रो 🌹🌹🙏🙏 संगठन में ही शक्ति निहित होती है यह बात हम बाल्यकाल से ही एक नीति कथा के माध्यम से जानते-पढ़ते और सीखते आ रहे हैं...