December 29, 2025

उत्तर प्रदेश साहित्य सभा रामपुर इकाई की 11 वीं काव्य गोष्ठी/निशस्त


      सूरज दादा की कुहरे से रोज़ लड़ाई है

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 साल 2025 को विदाई देते हुए और आने वाले साल में शुभ की कामना के साथ उत्तर प्रदेश साहित्य सभा रामपुर इकाई की एक काव्य गोष्ठी/निशस्त सभा के सक्रिय सदस्य सोहन लाल भारती के कृष्णाविहार आवास पर संपन्न हुई।गोष्ठी में कविजनों ने समसामयिक विषयों पर रचनाएँ सुनाकर सबको मंत्रमुग्ध किया।गोष्ठी की अध्यक्षता शिवकुमार चन्दन ने की तथा ओंकार सिंह विवेक एवं सोहन लाल भारती क्रमशः मुख्य अतिथि व विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।मेज़बान सोहन लाल भारती जी के परिजनों ने पुष्प गुच्छ भेंट करके कवियों का स्वागत किया।

डॉo प्रीति अग्रवाल द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत करने के उपरांत मंच पर आए कवि पतराम सिंह ने सामयिक प्रस्तुति देते हुए कहा 

       साल आख़िर में दिल कुछ उदास सा हुआ,

       हर बीता लम्हा आज बहुत पास सा हुआ।

ओंकार सिंह विवेक ने कड़क सर्दी की अपनी ग़ज़ल  में कुछ इस तरह तस्वीर खींची 

         जब से हाड़ कंपाती निष्ठुर  सर्दी आई है,

         सूरज दादा  की  कुहरे से रोज़ लड़ाई है।

         जाड़े  कैसे  कटते होंगे  आप  ज़रा सोचें,

         कंबल ही है पास न उसके कोई रज़ाई है।


शिव कुमार चन्दन ने ठंड से दूभर हो रहे जीवन  पर अपना यह दोहा पढ़कर सबका ध्यान आकृष्ट किया 

         पाला कुहरा साथ ले, जाड़ा करे कमाल।

         तीव्र हवा की मार से,जीना हुआ मुहाल।।

राजवीर सिंह राज़ ने पतित पावनी गंगा की महत्ता का

 बख़ान करते हुए कहा 

       निर्मल शीतल पावन कल कल बहता नीर तुम्हारा,

       हे  माँ  गंगे  पाप  सभी  के   हरता  नीर  तुम्हारा।

अपने अच्छे तरन्नुम के लिए जाने जाने वाले शायर अशफ़ाक़ रामपुरी ने इस शेर पर सबकी वाही वाही लूटी

        याद  बेवफ़ा  को  तुम  बेशुमार  मत  करना,

        दिल को आज इतना भी बेक़रार मत करना।

डॉo प्रीति अग्रवाल ने देश के वीरों के सम्मान में  पढ़ा 

       मातृभूमि  की रक्षा  में ही  अपने  प्राण गंवाते हैं,

       नमन करूं मैं उन वीरों को जो शहीद हो जाते हैं।

अपनी रचना में सशक्त भाव भरते हुए सुधाकर सिंह परिहार ने कहा 

       मंज़िल तक न सही कुछ दूर तलक तो जा पाते,

      हम ये दीवार हटा पाते,जो कहा सुनी थी आपस की

       उसका कुछ रंज मिटा पाते।

मेज़बान सोहन लाल भारती ने अपने हृदय के भाव व्यक्त करते हुए कहा 

         फ़ुर्सत से तू आ जाना हम तेरी राह में खड़े,

         भटक न जाए ये मनवा नैन बिछा बैठे बैठे।

नए साल के संदर्भ में कहे गए अपने इन शेरों पर प्रदीप राजपूत माहिर को भी श्रोताओं की भरपूर दाद मिली

          फ़क़त  कलैंडर  में साल  बदले,

          थी मेरी कोशिश कि हाल बदले।

           तभी  तो  बदलेगा  वक़्त  मेरा,

           अगर  सितारों  की चाल बदले।

पूनम दीक्षित ने गुरु गोविंद सिंह जी के नौनिहालों की वीरता पर अपनी ये पंक्तियां पढ़ीं 

      मेरे देश के नौनिहालों सुनो,

      सुनकर अपने हृदय में गुनो।

      यह बात है दो बाल वीरों की,

      शेर दिल थे जो ऐसे धीरों की।

देर रात तक चली इस कवि गोष्ठी में अन्य लोगों में मनोहर लाल, अनूप कुमार सिंह, शारदा देवी, पूनम सिंह, अरुण कुमार सिंह,स्पर्श तथा अंशु आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। गोष्ठी का सफल संचालन सभा के सचिव राजवीर सिंह राज़ द्वारा किया गया।समापन पर सभा की स्थानीय इकाई के अध्यक्ष ओंकार सिंह विवेक ने सभी का आभार प्रकट किया।


गोष्ठी की कवरेज के लिए सम्मानित समाचार पत्रों 'हिंदुस्तान' तथा 'अमर उजाला' का हृदय से आभार।
प्रस्तुति : ओंकार सिंह विवेक 
साहित्यकार/समीक्षक/कंटेंट राइटर 

December 25, 2025

अटल जयंती विशेष


आज अटल जयंती पर कहे गए कुछ दोहे आप साथियों के समक्ष प्रस्तुत हैं :

अटल जी की स्मृति में कहे गए कुछ दोहे

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🌷

 नैतिक  मूल्यों  का  किया,सदा मान-सम्मान।

 दिया अटल जी ने नहीं ,ओछा कभी बयान।।

🌷

  विश्व मंच  पर  शान  से, अपना  सीना  तान।

  अटल बिहारी ने  किया, हिंदी  का यशगान।।

🌷

 राजनीति  के  मंच  पर , छोड़ अनोखी  छाप।

 सब के दिल में बस गए,अटल बिहारी आप।।

🌷

चलकर पथ पर सत्य के,किया जगत में नाम।

अटल बिहारी आपको,शत-शत बार प्रणाम।।

🌷.  ------©️  ओंकार सिंह विवेक


पूर्व प्रधान मंत्री तथा भारत रत्न अटल जयंती पर विशेष 🌹🌹👈👈पर विशेष



December 15, 2025

सर्दी वाले दोहे 🪨🪨

दोस्तो नमस्कार 🌹🌹🙏🙏

आधा दिसंबर गुज़र चुका है। ठंड धीरे-धीरे अपने तेवर दिखाने लगी है। कुहरे और सूरज दादा में जंग जारी है। कुछ लोग बर्फबारी का आनंद लेने के लिए पहाड़ी स्थानों की ओर रुख़ कर रहे हैं। पूरे NCR को प्रदूषण ने अपनी चपेट में ले रखा है। कुल मिलाकर शीत ऋतु का प्रभाव अलग-अलग ढंग से सबको प्रभावित कर रहा है।ठंड में अपना और अपनों का ध्यान रखते हुए आइए सर्दी वाले कुछ दोहों का आनंद लिया जाए 👇👇
दोहे सर्दी वाले 
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माह  दिसंबर  आ   गया,ठंड  हुई    विकराल।
ऊपर   से   करने  लगा,सूरज  भी   हड़ताल।।

हाड़   कँपाती   ठंड   से,करके   दो-दो   हाथ।
स्वार्थ  बिना   देती  रही,नित्य  रजाई   साथ।।

चौराहे    के   मोड़   पर,जलता  हुआ  अलाव।
नित्य विफल  करता रहा,सर्दी  का  हर  दाव।।

खाँसी और  ज़ुकाम  का,करके   काम  तमाम।
अदरक  वाली  चाय   ने, ख़ूब  कमाया  नाम।।

कल  कुहरे  का देखकर,दिन-भर घातक  रूप।
कुछ पल ही छत पर टिकी,सहमी-सहमी धूप।।
                          @ओंकार सिंह विवेक


December 10, 2025

भारत विकास परिषद मुख्य शाखा रामपुर का रजत जयंती वर्ष समारोह


भारत विकास परिषद एक ग़ैर-राजनीतिक,सामाजिक-सांस्कृतिक स्वयंसेवी संस्था है जिसकी स्थापना 1963 में हुई थी। परिषद का उद्देश्य "स्वस्थ, समर्थ, संस्कृत भारत" का निर्माण करना है।यह स्वामी विवेकानंद के आदर्शों से प्रेरित होकर सेवा और संस्कार के माध्यम से भारत के सर्वांगीण विकास के लिए काम करती है।संस्था शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, विकलांगजनों का पुनर्वास तथा राष्ट्रीय एकता जैसे विभिन्न सामाजिक कार्यों में निरंतर अपना सार्थक योगदान देती आ रही है।
भारत विकास परिषद की मुख्य शाखा रामपुर (उत्तर प्रदेश) की स्थापना को पच्चीस वर्ष पूर्ण हो चुके हैं।इस उपलक्ष्य में शाखा का रजत जयंती वर्ष समारोह इसके युवा एवं उत्साही अध्यक्ष विकास पांडे के नेतृत्व में उत्सव पैलेस रामपुर में धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम बहुत संतुलित तथा व्यवस्थित ढंग से भारतीय संस्कारों की झलक प्रदर्शित करते हुए प्रारंभ हुआ।सभा हॉल में पधारने वाले सम्माननीय जनों का तिलक तथा बैज लगाकर स्वागत किया गया।
इस अवसर पर कार्यक्रमों की श्रृंखला में स्कूली बच्चों द्वारा देश भक्ति से ओतप्रोत कई प्रभावशाली सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए।बच्चों की जीवंत प्रस्तुतियाँ देखकर आमंत्रित अतिथियों एवं सभागार में उपस्थित सम्मानित जनों ने बार-बार करतल ध्वनि से छात्रों का उत्साहवर्धन किया।
समारोह में बाहर से आए मेहमानों सहित समाज के प्रतिष्ठित नागरिक, विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि, चिकित्सक,शिक्षाविद् तथा परिषद परिवार के सदस्य सपरिवार मौजूद रहे।
शाखा की स्थापना के पच्चीस वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर शाखा द्वारा 'रजत किरण' के नाम से एक स्मारिका भी प्रकाशित की गई है।मंच पर उपस्थित अतिथियों द्वारा स्मारिका का भव्य विमोचन हुआ।
परिषद के उद्देश्यों एवं उसके द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्यों को समाहित करते हुए मैंने भी एक गीत की रचना की थी।मुझे ख़ुशी है कि परिषद पदाधिकारियों द्वारा उसे सम्मानित स्मारिका में प्रकाशित किया गया।मैं इसके लिए संस्था का आभार ज्ञापित करता हूँ।
भारत विकास परिषद की सेवा यात्रा को इस समारोह में एक वीडियो प्रस्तुति द्वारा विस्तार से दर्शाया गया जो बहुत ही सुंदर और प्रभावशाली रही।पदाधिकारियों/दायित्वधारियों ने परिषद की भविष्य की गतिविधियों तथा योजनाओं की भी जानकारी सदन को दी।कार्यक्रम में भारत विकास परिषद के राष्ट्रीय समन्वयक गजेंद्र सिंह संधू जी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि किसी संगठन की शक्ति उसके सक्रिय, समर्पित तथा अनुशासित कार्यकर्ताओं में निहित होती है और परिषद के सदस्य इन मानकों पर सदैव ही खरे उतरते हैं।
कार्यक्रम में रज़ा लाइब्रेरी एवं संग्रहालय के निदेशक डॉक्टर पुष्कर मिश्र जी मुख्य अतिथि के रूप में विद्यमान रहे। मिश्र जी ने अपने चिर परिचित अंदाज़ में धर्म की विस्तृत व्याख्या करते हुए सभी से धर्म परायण होने आग्रह किया।उन्होंने सेवा,संस्कार और राष्ट्रीयता की भावना के प्रचार-प्रसार हेतु भारत विकास परिषद रामपुर द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
मुख्य शाखा रामपुर के अध्यक्ष विकास पांडे ने कहा कि रामपुर शाखा गत पच्चीस वर्षों से अपने प्रयासों से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में प्रयासरत है और काफ़ी हद तक इसमें सफल भी हो रही है।
कार्यक्रम के अंत में मुख्य संयोजक माधव गुप्ता द्वारा सभी का आभार प्रकट किया गया।कार्यक्रम का सफल संचालन रविन्द्र गुप्ता, विनोद कुमार तथा शालिनी चावला पांडे द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
             ---- ओंकार सिंह विवेक 
स्थानीय समाचार पत्रों द्वारा इस भव्य कार्यक्रम की भरपूर कवरेज की गई। बानगी प्रस्तुत है👇
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December 9, 2025

उत्तर प्रदेश साहित्य सभा रामपुर इकाई की दसवीं काव्य गोष्ठी संपन्न


              कोठियों को ज़ुल्म ढाना आ गया 

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साहित्यकारों का दायित्व होता है कि वे अपने सृजन से समाज को सार्थक संदेश देते रहें।साहित्यकार किसी आम बात को भी अपने कौशल से इस तरह कहने की सामर्थ्य रखता है कि वह आम बात भी ख़ास बनकर सुनने वालों के दिलों पर गहरा असर छोड़ जाती है।काव्य सृजन के माध्यम से अपने सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करती आ रही साहित्यिक संस्था उत्तर प्रदेश साहित्य सभा की रामपुर इकाई द्वारा अपनी नियमित काव्य गोष्ठियों की श्रृंखला में उपाध्यक्ष प्रदीप राजपूत माहिर के आवास पर दसवीं काव्य गोष्ठी आयोजित की गई। काव्य गोष्ठी/निशस्त की अध्यक्षता सोहन लाल भारती जी ने की तथा मुख्य अतिथि जावेद रहीम साहब रहे। 

स्थानीय इकाई के अध्यक्ष ओंकार सिंह विवेक द्वारा प्रस्तुत की गई सरस्वती वंदना के पश्चात गोष्ठी में अपनी शानदार ग़ज़ल पढ़ते हुए नौजवान ग़ज़लकार गौरव नायक ने कहा-- 


         पहले हम  सारी फनकारी समझेंगे,

          उसके बाद ही दुनियादारी समझेंगे।

काव्य पाठ करते हुए पतराम सिंह जी ने  कहा 


     दिलों  में  ख़ामोशी  उतरती  चली  गई,

     निगाह से एक रौशनी गुज़रती चली गई।

 ओंकार सिंह विवेक ने सामाजिक विषमताओं पर अपनी ग़ज़ल के इस शेर पर ख़ूब दाद पाई 


   झुग्गियों का हक़ दबाना आ गया,

    कोठियों को ज़ुल्म ढाना आ गया।

गोष्ठी के मेज़बान प्रदीप राजपूत माहिर जी की ग़ज़ल का यह शेर भी श्रोताओं द्वारा ख़ूब पसंद किया गया 


        ग़म है तो फिर ग़म में ख़ुश हैं,

         हम चश्मे-पुरनम में ख़ुश हैं।

जनसरोकारों के प्रति सचेत रहने वाले सुधाकर सिंह परिहार ने काव्य पाठ करते हुए कहा 


        नेता कब नेता से हारा, दल भी दल से नहीं हारते।

        कोई हारा कहीं अगर तो, समझो जनता ही हारी है।     

संयोजक सुरेन्द्र अश्क रामपुरी ने अपने इस शेर पर दाद वसूली 


      हौले से ज़मीं को हिला के कह रहा है वो,

      आमाल करो नेक वरना मिट ही जाओगे।

जावेद रहीम जी ने अपने ख़यालात का इज़हार करते हुए कहा 


       कभी फुर्सत से लिखूंगा वो गुज़रे पल,

       जिन्हें जी नहीं पाया रह गए वो अधूरे पल।

युवा ग़ज़लकार सुमित सिंह मीत का यह शेर भी ख़ूब सराहा गया 


     ग़लती करने से बेहतर है देखके औरों को सीखें,

     कुछ मौक़ों पर पास हमारे एक ही मौक़ा होता है।

सोहन लाल भारती जी ने अपनी अभिव्यक्ति देते हुए कहा 


        बना अपने को मोमबत्ती के समान,

         जो ख़ुद जले उजाले से भर दे कमरे को।        

आमंत्रित श्रोताओं ने कवि/शायरों की धारदार रचनाएं सुनकर बार-बार करतल ध्वनि से उनका उत्साहवर्धन किया।देर रात तक चली कवि गोष्ठी में उपरोक्त के अतिरिक्त विनोद कुमार शर्मा,सलोनी राजपूत आदि भी ख़ास तौर पर मौजूद रहे। गोष्ठी का संचालन ओंकार सिंह विवेक द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में संयोजक सुरेन्द्र अश्क रामपुरी ने सभी का आभार व्यक्त किया।

गोष्ठी की कवरेज के लिए हम सम्मानित समाचार पत्रों का हृदय से आभार व्यक्त करते हैं 🙏









December 5, 2025

अपनी बात ग़ज़ल के साथ

सभी स्नेही जनों को असीम सुप्रभात 🌹🌹🙏🙏
साथियो सोचा कि अपनी लोकप्रिय विधा ग़ज़ल में आज फिर अपने दिल के एहसासात आपके साथ साझा करूँ।तो लीजिए हाज़िर है मेरी एक ग़ज़ल।यदि ब्लॉग के कमेंट बॉक्स में अपनी महत्वपूर्ण प्रतिक्रियाओं से अवगत कराएंगे तो आभारी रहूँगा 🙏

            ग़ज़ल 
             ****

'आजिज़ी  तो   है  नहीं   गुफ़्तार में,
कौन    पूछेगा    हमें     दरबार   में।

नफ़सियाती   नुक़्स   है  दो-चार  में,
वर्ना  है   सबका ‘अक़ीदा  प्यार  में।

संग  रखता  है  उसे  जो   ये  गुलाब,
कुछ तो देखा होगा आख़िर ख़ार में।

बारहा   रोता   है   दिल  ये  सोचकर,
वन  कटेगा  शहर   के   विस्तार   में।

पूछने    आए     थे     मेरी   ख़ैरियत,
दे   गए   ग़म   और   वो  उपहार  में।

'मीर' 'ग़ालिब' 'ज़ौक़' सबका शुक्रिया,
रंग क्या-क्या  भर  गए  अश'आर में।

बैठा  है  परदेस  में   लख़्त-ए-जिगर,
क्या  ख़ुशी  माँ  को मिले त्यौहार में।
                     -- ओंकार सिंह विवेक

'आजिज़ी -- लाचारी/दीनता 
गुफ़्तार -- बातचीत
नफ़सियाती नुक़्स - मानसिक विकार
'अक़ीदा-- श्रद्धा 
बारहा -- - बार-बार 
अशआर -- शे'र का बहुवचन 
लख़्त-ए-जिगर-- जिगर का टुकड़ा


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