साथियो सादर प्रणाम 🌹🌹🙏🙏
कविता भावनाओं को अभिव्यक्त करने का एक सशक्त माध्यम है।कवि अपने घर परिवार,समाज और देश विदेश में जो महसूस करता है, उसे आधार बनाकर मंथन के उपरांत अपने काव्य में अभिव्यक्त कर देता है।वह दोनों ही पहलुओं पर रौशनी डालता है अपनी कविता में,जो समाज में घटित हो रहा होता है उसके बारे में और एक ऐसे आदर्श समाज के बारे में भी जिसकी शिद्दत से आवश्यकता है।उसका काव्य सृजन लोगों को चिंतन के लिए प्रेरित करता है तो कवि स्वयं को धन्य समझता है।
मेरी एक ग़ज़ल का आनंद लीजिए :
ग़ज़ल प्रकाशित करने के लिए प्रतिष्ठित अख़बार 'सदीनामा' कोलकता के संपादक मंडल का हार्दिक आभार 🙏
मुँह पर तो कितना रस घोला जाता है,
पीछे जाने क्या-क्या बोला जाता है।
होता था पहले मे'यार कभी उनका,
अब रिश्तों को धन से तोला जाता है।
मिल जाती है एक नई इच्छा उसमें,
मन को जितनी बार टटोला जाता है।
मिल जाते हैं सुख-दुख दोनों ही उसमें,
जब यादों का बक्सा खोला जाता है।
आप सियासत-दाँ ये ख़ूब समझते हैं,
बदला कैसे हर दिन चोला जाता है।
ध्यान सभी का देखा ख़ुद पर तो जाना,
चुप रह कर भी कितना बोला जाता है।
हर दम तो ख़ामोशी ओढ़ नहीं सकते,
वक़्त-ए-ज़रूरत मुँह भी खोला जाता है।
-- ओंकार सिंह विवेक
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