June 16, 2025

कितने हसीन लोग थे ! (ग़ज़ल से इश्क़ फ़रमाता रहूँगा)

कितने हसीन लोग थे !                                              (ग़ज़ल से इश्क़ फ़रमाता रहूँगा)
आदमी अपने शौक़ और जुनून के चलते न जाने कहाँ-कहाँ की यात्राएँ कर लेता है। यात्राओं के दौरान तमाम ऐसे लोगों से भी मुलाक़ात हो जाती है जिनसे मि...

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व्हाट्सएप्प पर, 'रचनाकार दिल्ली -1' एक प्रतिष्ठित साहित्यिक ग्रुप है।मैं भी पिछले कई वर्ष से इस समूह से जुड़ा हुआ हूँ।कई...