January 27, 2026
भारतीय सभ्यता, संस्कृति एवं इतिहास प्रतियोगिता पुरस्कार विजेता सम्मान समारोह, मुरादाबाद
January 24, 2026
वसंत पंचमी/सरस्वती प्राकट्य दिवस पर काव्य गोष्ठी संपन्न
ऋतुराज वसंत के स्वागत में राजीव कुमार शर्मा के निवास पर हुई काव्य गोष्ठी
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सूरज की बढ़ती चमक तथा प्रकृति के खिले रूप के संग दस्तक दे रहे ऋतुराज वसंत के आगमन तथा ज्ञान,कला और संगीत की देवी माँ शारदे के प्राकट्य दिवस के अवसर पर एकता विहार कॉलोनी में राजीव कुमार शर्मा जी के आवास पर एक शानदार काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।
बताते चलें कि राजीव कुमार शर्मा जी साहित्य प्रेमी होने के साथ एक अच्छे रचनाकार भी हैं तथा प्रतिवर्ष वसंत पंचमी के दिन अपने आवास पर कवि गोष्ठी का आयोजन कराते हैं।कवियों को सम्मान सहित जलपान आदि कराकर परिजनों के साथ कविताओं का रसास्वादन करते हैं।
(मेज़बान राजीव कुमार शर्मा जी अपने पुत्र उत्कर्ष सारस्वत के साथ)कवियों ने वसंत के स्वागत,माँ शारदे की स्तुति तथा अन्य समसामयिक विषयों पर अपनी शानदार रचनाएँ सुनाकर आमंत्रित श्रोताओं को आनंदित किया। गोष्ठी की अध्यक्षता अशोक सक्सैना जी ने की।गोविंद शर्मा तथा राजीव कुमार शर्मा जी क्रमशः मुख्य अतिथि तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में विद्यमान रहे।
मां शारदे के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के उपरांत विनोद कुमार शर्मा जी की सरस्वती वंदना से गोष्ठी का शुभारंभ हुआ।गोष्ठी का संचालन कर रहे प्रदीप राजपूत माहिर ने काव्य पाठ हेतु पतराम सिंह जी को आमंत्रित किया तो उन्होंने शारदेय का आह्वान करते हुए कहा :
वीणा की झंकार बिखेरो मां अक्षर अक्षर दीप जले,
मेरी लेखनी को गति दो माँ नव विचार के फूल खिलें।
गोष्ठी के मेज़बान राजीव कुमार शर्मा ने अपने चिर परिचित अंदाज़ में प्रभावशाली अभिव्यक्ति देते हुए कहा
माँ से करुणा स्नेह दया,
ममता शुचि और सद्ज्ञान लिए
दुधमुंहा धरा पर आया था
कोमल निश्चल मन साथ लिए।
ओंकार सिंह विवेक ने ऋतुराज वसंत के स्वागत में अपना मुक्तक पढ़ते हुए कहा :
फूलों ने उपवन को महकाया तो है,
राग सुरीला कोयल ने गाया तो है।
होता है ज़ाहिर सूरज के तेवर से,
ऋतुओं का राजा वसंत आया तो है।
सोहन लाल भारती ने अपनी भाव पूर्ण प्रस्तुति में नेक सलाह देते हुए कहा कहा :
ख़ुद को सुधारो जग ख़ुद सुधर जाएगा
ईर्ष्या द्वेष व लोभ त्यागो, आपका स्वास्थ्य भी सुधरेगा
सब ख़ुद ही ठीक हो जाएगा।
प्रदीप राजपूत माहिर जी ने अपने इस मार्मिक शेर से सबकी वाही वाही लूटी :
क्या निराले खेल हैं तक़दीर के,
श्वान भी हक़दार हैं अब खीर के।
विनोद कुमार शर्मा ने अपने मधुर कंठ से शारदे माँ का आशीष मांगते हुए भावपूर्ण प्रस्तुति दी :
अंतर्मन तमस भरा है माँ,निज कृपा रश्मि की वृष्टि करो।
पावन कर दो निज आशिष से,दे दो जग को अविरल वाणी।
सुमित सिंह मीत ने अपना यह शानदार शेर पढ़ा :
घर का आंगन है छोटा मगर रहने वालों का दिल है बड़ा,
खुशबुएं प्यार की हैं यहां नफरतों का बसेरा नहीं।
गौरव नायक ने अपनी दमदार प्रस्तुति देते हुए कहा
समुंदर ग़म का भी कितना बड़ा है,
जिसे देखो वही डूबा हुआ है।
उत्कर्ष सारस्वत ने अपनी भाव अभिव्यक्ति देते हुए कहा :
जब आता चुनाव रोज़ दीवाली होती,
वोटर के घर रोज़ नई एक टोली होती।
सचिन सिंह सार्थक ने अपनी सार्थक प्रस्तुति देते हुए कहा
तेजस्वी नायक ओजस्वी प्रखर हमारे नेता जी,
बरसों बीते मगर दिलों में अमर हमारे नेता जी।
उपरोक्त के अतिरिक्त गोष्ठी में सीताराम शर्मा,सुनील कुमार वैश्य, दीपक गुप्ता एडवोकेट तथा करुणा शर्मा---- आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। अंत में सुस्वादु जलपान के बाद आयोजक राजीव कुमार शर्मा जी ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम समापन की घोषणा की।
गोष्ठी की शानदार कवरेज के लिए हम सम्मानित समाचार पत्रों हिन्दुस्तान, अमर उजाला तथा अमृत विचार के प्रतिनिधियों का हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं 🙏🙏
January 23, 2026
वसंत पंचमी तथा शारदे प्राकट्य दिवस विशेष
सरस्वती वंदना--दोहे🌷
🌷
हो मेरा चिंतन प्रखर , बढ़े निरंतर ज्ञान।
हे माँ वीणावादिनी , दो ऐसा वरदान।।
🌷
मातु शारदे आपका , रहे कंठ में वास।
वाणी में मेरी सदा , घुलती रहे मिठास।।
🌷
यदि मिल जाए आपकी,दया-दृष्टि का दान।
माता मेरी लेखनी , पाए जग में मान।।
🌷
किया आपने शारदे , जब आशीष प्रदान।
रामचरित रचकर हुए , तुलसीदास महान।।
🌷
हाथ जोड़कर बस यही, विनती करे 'विवेक'।
नैतिक बल दो माँ मुझे,काम करूँ नित नेक।।
🌷
वसंत के आगमन पर कुछ चौपाई छंद
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मुस्काई फूलों की डाली।
झूमी गेहूँ की हर बाली।।
धरती का क्या रूप सँवारा।
हे वसंत ! आभार तुम्हारा।।
🌹
सरसों झूम- झूम कर गाती।
खेतों को नव राग सुनाती।।
भौंरे फूलों पर मँडराते।
उनको मादक गान सुनाते।।
🌹
मधुऋतु हर्षित होकर बोली।
आने वाली है अब होली।।
ढोल , मँजीरे , झांझ बजेंगे।
नाच-गान के सदन सजेंगे।
🌹
चिंतन होता रहे घनेरा।
बढ़ता रहे ज्ञान नित मेरा।।
हंसवाहिनी दया दिखाओ।
आकर जिह्वा पर बस जाओ।।
🌹
--ओंकार सिंह विवेक
(सर्वाधिकार सुरक्षित)
January 21, 2026
सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल (बनारस यात्रा भाग-2)
काशी विश्वनाथ मंदिर हिंदुओं के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों तथा भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंग मंदिरों में से एक है। हजारों सालों पुराना यह मंदिर वाराणसी में पवित्र गंगा नदी के पश्चिमी तट पर स्थित है।विश्वनाथ का शाब्दिक अर्थ है ब्रह्मांड के भगवान।इस मंदिर में दर्शन करने के लिए आदि शंकराचार्य,सन्त एकनाथ,गोस्वामी तुलसीदास सभी का आगमन हुआ है।महाशिवरात्रि की मध्य रात्रि में प्रमुख मंदिरों से भव्य शोभा यात्रा ढोल नगाड़े इत्यादि के साथ बाबा विश्वनाथ जी के मंदिर तक जाती है।विश्वनाथ मंदिर को इतिहास में कई मुस्लिम शासकों द्वारा बार-बार तोड़ा गया। मुगल शासक औरंगज़ेब इस मंदिर को गिराने वाला अंतिम मुस्लिम शासक था जिसने मंदिर के स्थान पर वर्तमान ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण किया।मंदिर की वर्तमान संरचना 1780 में इंदौर के मराठा शासक अहिल्याबाई होल्कर द्वारा तत्कालीन काशी नरेश महाराजा चेत सिंह के सहयोग से निकटवर्ती स्थान पर बनाई गई थी।वर्तमान सरकार के कार्यकाल में मंदिर को भव्य विस्तार देकर बहुत बड़े गलियारे का निर्माण कराया गया है जिससे भक्तजनों को बाबा के दर्शन करने में बहुत सुविधा हो गई है।ऐसी मान्यता है कि बाबा विश्वनाथ जी के दर्शन किए बिना बनारस की यात्रा पूर्ण नहीं मानी जाती।ग्रुप के सभी साथियों ने बाबा विश्वनाथ के दर्शन करके आत्मिक शांति का अनुभव किया।
बाबा विश्वनाथ के दर्शन के बाद लंच का समय हो चुका था। सबके पेट में चूहे दौड़ने लगे तो किसी ऐसी होटल की तलाश शुरू की गई जहाँ घर जैसा शुद्ध शाकाहारी और सादा खाना मिल सके। ग्रुप के युवा सदस्यों ने हमेशा की तरह बनारस के मशहूर खानों को नेट पर सर्च करना शुरू कर दिया।कुछ देर सर्च करने के बाद तय हुआ कि ठठेरी बाज़ार में 'दी राम भंडार' की कचौरी/पूरी सब्ज़ी और जलेबी का आनंद लिया जाएगा।सो सब लोग ठठेरी बाज़ार की तंग गलियों में निकल पड़े।
बनारसी मलइयो को बनाने का तरीका बहुत आसान है। इसे बनाने के लिए कच्चे दूध को पहले इतना खौलाया जाता है कि इसका रंग पीला पड़ने लगे।फिर रात में इसे खुले आसमान में ओस के संपर्क में रखा जाता है वो भी खुला करके।सुबह इसे मथा जाता है और मलाई ऊपर आ जाती है।इसी मलाई को केसर,छोटी इलायची और चीनी डालकर फेंटा जाता है।
-इसके झाग को परोसा जाता है जिसे मलइयो कहते हैं।
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बहुुुत कम लोग ऐसे होते हैैं जिनको अपनी रुचि के अनुुुसार जॉब मिलता है।अक्सर देेखने में आता है कि लोगो को अपनी रुचि से मेल न खाते...
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शुभ प्रभात मित्रो 🌹🌹🙏🙏 संगठन में ही शक्ति निहित होती है यह बात हम बाल्यकाल से ही एक नीति कथा के माध्यम से जानते-पढ़ते और सीखते आ रहे हैं...