January 27, 2026

भारतीय सभ्यता, संस्कृति एवं इतिहास प्रतियोगिता पुरस्कार विजेता सम्मान समारोह, मुरादाबाद


    है प्रीति जहाँ की रीति सदा मैं गीत वहाँ के गाता हूँ,
    भारत का  रहने वाला हूँ भारत की बात सुनाता हूँ।
जब मैं भारतीय सभ्यता,संस्कृति तथा इतिहास पर यह ब्लॉग पोस्ट लिख रहा हूँ तो मुझे अपने देश का गौरव गान करती फ़िल्म 'पूरब पश्चिम' की ये पंक्तियाँ अनायास याद आ रही हैं।
भारतीय सभ्यता,संस्कृति और इतिहास को विश्व की प्राचीनतम और सबसे निरंतर जीवित सभ्यताओं में से एक माना जाता है।प्राप्त सूचनाओं के आधार पर इसका इतिहास लगभग 4,500 से 7,500 वर्ष से भी कहीं अधिक पुराना माना जाता है। सिंधु घाटी सभ्यता और वैदिक संस्कृति के साथ यह मिस्र व मेसोपोटामिया की समकालीन है,लेकिन उन सभ्यताओं के विपरीत भारतीय संस्कृति अमरता की विशेषता के साथ आज भी निरंतर जीवंत है।भारतीय सभ्यता और संस्कृति समस्त विश्व को अपना परिवार मानने की अवधारणा पर आधारित है।यह अपनी उदारता, विविधता और प्रेम व सहिष्णुता के लिए जानी जाती है, जिसने ज्ञान और अध्यात्म का प्रचार व प्रसार किया है। 
मगर अफ़सोस की बात है कि वर्तमान युग में हमारी नई पीढ़ी अपने अपनी सभ्यता और संस्कृति के प्रति उदासीन होती जा रही है। जीवन जीने की कला सिखाने वाले अपने प्राचीन धार्मिक ग्रंथों की शिक्षा से हमारा जैसे कोई वास्ता ही नहीं रह गया है।पाश्चात्य माहौल ने हमें दिशाहीन कर दिया है।यही कारण है कि नैतिक तथा आध्यात्मिक मूल्यों का निरंतर क्षरण हो रहा है।
ऐसे में कोई व्यक्ति या संस्था यदि भारतीय नागरिकों में अपनी सभ्यता,संस्कृति और इतिहास के प्रति प्रतियोगिता के माध्यम से रुचि पैदा करने का प्रयास करे तो आशा की एक किरण दिखाई देने लगती है।
जी हाँ,मैं बात कर रहा हूँ मुरादाबाद,उत्तर प्रदेश की SSG फाउंडेशन तथा इसके सर्वेसर्वा आदरणीय सुधीर गुप्ता एडवोकेट जी की जो पिछले दो वर्ष से राष्ट्रीय नहीं अपितु अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय सभ्यता,संस्कृति और इतिहास विषय पर वस्तुनिष्ठ प्रश्नों पर आधारित प्रतियोगिता के माध्यम से अपनी सभ्यता,संस्कृति तथा इतिहास के विषय में जागरूकता फैलाने की दिशा में बहुत बड़ा काम कर रहे हैं। 
(एडवोकेट सुधीर गुप्ता जी का स्वागत करते हुए MIT के निदेशक प्रोफेसर रोहित गर्ग जी)
(मैं एक कवि/साहित्यकार हूँ तथा अक्सर स्थानीय तथा बाहरी साहित्यिक कार्यक्रमों में सहभागिता करता रहता हूँ। आदरणीय सुधीर गुप्ता एडवोकेट जी के संरक्षण और सहयोग से आयोजित हुए कई साहित्यिक कार्यक्रमों में मुझे मुरादाबाद में भी सहभागिता का अवसर प्राप्त हुआ है अतः मैं उनके समाज सेवा के भाव तथा रुचियों को जानता हूँ। गुप्ता जी लोगों की प्रतिभा/ क्षमता को परखने तथा प्रोत्साहन देने में सदैव आगे रहते हैं।)
वर्ष, 2025 में इस प्रतियोगिता की series - 2 में मुझे भी प्रतिभाग करने का अवसर प्राप्त हुआ।प्रतिभाग करते समय इस प्रतियोगिता के आयोजन और संरचना के बारे में मुझे नज़दीक़ से जानने का अवसर मिला।प्रतियोगिता में तीन भागों में दस-दस दिन के अंतराल पर ऑनलाइन कुल 200 वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे गए।अंतिम भाग में कुछ सब्जेक्टिव प्रश्न भी पूछे गए। प्रश्नोत्तरी को इस प्रकार तैयार किया गया था कि कोई भी सीधे गूगल या AI की मदद से प्रश्नों के उत्तर तलाश न कर सके। इन प्रश्नों के सही उत्तर वही प्रतिभागी दे सकते थे जिन्होंने भारतीय सभ्यता, संस्कृति और इतिहास तथा प्राचीन धार्मिक ग्रंथों का गंभीरता से अध्ययन किया हो।
भारतीय सभ्यता, संस्कृति और इतिहास विषय पर आधारित इस प्रतियोगिता में भारत के 19 राज्यों सहित USA,UK,UAE,Sri Lanka, Nepal,Bangladesh आदि देशों के प्रतिभागियों ने भी बढ़ चढ़कर हिस्सेदारी की जो भारत के लिए गौरव की बात है।

 इस प्रतियोगिता का परिणाम घोषित हुआ तो 159 विजेताओं की सूची में संयोग से मैं भी अपना नाम दर्ज कराने में सफल रहा।इस सन्दर्भ में सावित्री देवी शिव नारायण गुप्ता फाउंडेशन ने एमआईटी सभागार में विजेताओं के सम्मान में 17 जनवरी ,2026 को एक भव्य समारोह आयोजित करके उपस्थित 70 प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।
मुख्य अतिथि डॉ. विशेष गुप्ता और अन्य अतिथियों ने मां सरस्वती के समक्ष दीप जलाकर कार्यक्रम की शुरुआत की। 
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉक्टर विशेष गुप्ता,पूर्व अध्यक्ष राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने अपने उद्वोधन में भारतीय सभ्यता,संस्कृति और इतिहास की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए माता पिता से अपने बच्चों को संस्कारवान बनाने की अपील की। उन्होंने एडवोकेट सुधीर गुप्ता जी के इन सदप्रयासों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।
इस प्रतियोगिता के आयोजन में महत्वपूर्ण तकनीकी भूमिका निभाने वाले डॉक्टर नीलाक्ष शील,प्रोफेसर कंप्यूटर साइंस ने बताया कि कैसे उन्होंने इस प्रतियोगिता के ऑनलाइन संयोजन को सुगम और पारदर्शी बनाने का प्रयास किया है।इस के ऑनलाइन संचालन में उन्हें किस प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ा है तथा भविष्य वे कैसे इसे और अधिक पारदर्शी ,विस्तृत तथा सुग्राही बनाने के लिए प्रयत्नशील हैं।
इस प्रतियोगिता के सूत्रधार,SSG तथा MIT group के संस्थापक अध्यक्ष,समाजसेवी एडवोकेट सुधीर गुप्ता जी ने सभी का स्वागत करते हुए बताया कि कैसे निरंतर नैतिक तथा आध्यात्मिक मूल्यों के क्षरण को देखकर उनके मन में इस तरह की प्रतियोगिताओं के आयोजन का विचार आया।उन्होंने कहा कि भारत की नई पीढ़ी को संस्कारवान बनाने और सनातन के गौरव को संरक्षित और संवर्धित करने के लिए उनसे जो कुछ भी बन पड़ेगा वे करते रहेंगे।
कार्यक्रम में उपस्थित विजेताओं को मंचासीन अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया तो उनके चेहरे खिल उठे।कई विजेताओं द्वारा मंच से प्रतियोगिता के संबंध में अपने विचार साझा करते हुए इसे और अधिक पारदर्शी बनाने तथा विस्तारित करने के सुझाव भी दिए।
(विजेता के रूप में मुझ नाचीज़ को भी प्रोत्साहन प्रतिसाद प्राप्त हुआ)
विजेताओं के साथ अतिथियों द्वारा अंत में ग्रुप फोटो भी कराए गए।ऐसी अविस्मरणीय यादें भविष्य के लिए बहुत प्रेरणादाई सिद्ध होती हैं।
आमंत्रित अतिथियों ने कार्यक्रम में उपस्थित महिला शक्ति का उत्साहवर्धन करते हुए उनके साथ भी फोटो खिंचवाए।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों द्वारा सभी को प्रेम से सुस्वादु जलपान कराया गया।इस दौरान कार्यक्रम में आए हुए गणमान्य व्यक्तियों के साथ बहुत सार्थक विचार विमर्श का अवसर प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम का सुंदर संचालन MIT की डॉo सुगंधा अग्रवाल द्वारा किया गया।उपरोक्त के अतिरिक्त कार्यक्रम में वाई पी गुप्ता, वाई एस कोठीवाल,आनंद मोहन गुप्ता, काव्य सौरभ रस्तौगी, महेश अग्रवाल, अनुभव गुप्ता, राहुल गुप्ता, मुकेश छावड़ा, सरदार गुरविंदर सिंह, डॉक्टर ए के गोयल तथा प्रकाश अग्रवाल, डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद शर्मा जी आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
मेरा अनुभव 
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मैंने इस प्रतियोगिता में पहली बार हिस्सेदारी की थी और अनुभव लगभग ठीक-ठाक ही रहा।अपने अनुभव के आधार पर आयोजकों के विचारार्थ कुछ सुझाव देने का लोभ संवरण नहीं कर पा रहा हूँ :
1. प्रश्नावली को अधिक कॉम्प्लेक्स बनाने के लक्ष्य निर्धारण के कारण level -1 में कई प्रश्न repeated दिखाई दिए।उन सवालों के जो options दिए गए थे उनमें से कोई भी उत्तर सही नहीं था। मैंने WhatsApp group पर इस और ध्यान दिलाया था।उसे स्वीकार करके संशोधन भी किया गया। अत: प्रतियोगिता को भविष्य में और fullproof बनाने की आवश्यकता है।
2. कई बार बताई गई तारीख़ पर लिंक ही नहीं खुल रहा था।इससे प्रतियोगिता की smoothness प्रभावित हुई।
3. उत्तर प्रेषित करने की तारीखों को कई बार बढ़ाया गया। इससे प्रतिभागियों के मन में प्रतियोगिता की पारदर्शिता के प्रति संशय उत्पन्न हुआ।
आशा है भविष्य में प्रतियोगिता का आयोजन करते समय आयोजकों द्वारा इन बिंदुओं का भी संज्ञान लिया जाएगा।
     सादर 🙏🙏
--ओंकार सिंह विवेक 
साहित्यकार एवं समीक्षक






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