ऋतुराज वसंत के स्वागत में राजीव कुमार शर्मा के निवास पर हुई काव्य गोष्ठी
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सूरज की बढ़ती चमक तथा प्रकृति के खिले रूप के संग दस्तक दे रहे ऋतुराज वसंत के आगमन तथा ज्ञान,कला और संगीत की देवी माँ शारदे के प्राकट्य दिवस के अवसर पर एकता विहार कॉलोनी में राजीव कुमार शर्मा जी के आवास पर एक शानदार काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।
बताते चलें कि राजीव कुमार शर्मा जी साहित्य प्रेमी होने के साथ एक अच्छे रचनाकार भी हैं तथा प्रतिवर्ष वसंत पंचमी के दिन अपने आवास पर कवि गोष्ठी का आयोजन कराते हैं।कवियों को सम्मान सहित जलपान आदि कराकर परिजनों के साथ कविताओं का रसास्वादन करते हैं।
(मेज़बान राजीव कुमार शर्मा जी अपने पुत्र उत्कर्ष सारस्वत के साथ)कवियों ने वसंत के स्वागत,माँ शारदे की स्तुति तथा अन्य समसामयिक विषयों पर अपनी शानदार रचनाएँ सुनाकर आमंत्रित श्रोताओं को आनंदित किया। गोष्ठी की अध्यक्षता अशोक सक्सैना जी ने की।गोविंद शर्मा तथा राजीव कुमार शर्मा जी क्रमशः मुख्य अतिथि तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में विद्यमान रहे।
मां शारदे के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के उपरांत विनोद कुमार शर्मा जी की सरस्वती वंदना से गोष्ठी का शुभारंभ हुआ।गोष्ठी का संचालन कर रहे प्रदीप राजपूत माहिर ने काव्य पाठ हेतु पतराम सिंह जी को आमंत्रित किया तो उन्होंने शारदेय का आह्वान करते हुए कहा :
वीणा की झंकार बिखेरो मां अक्षर अक्षर दीप जले,
मेरी लेखनी को गति दो माँ नव विचार के फूल खिलें।
गोष्ठी के मेज़बान राजीव कुमार शर्मा ने अपने चिर परिचित अंदाज़ में प्रभावशाली अभिव्यक्ति देते हुए कहा
माँ से करुणा स्नेह दया,
ममता शुचि और सद्ज्ञान लिए
दुधमुंहा धरा पर आया था
कोमल निश्चल मन साथ लिए।
ओंकार सिंह विवेक ने ऋतुराज वसंत के स्वागत में अपना मुक्तक पढ़ते हुए कहा :
फूलों ने उपवन को महकाया तो है,
राग सुरीला कोयल ने गाया तो है।
होता है ज़ाहिर सूरज के तेवर से,
ऋतुओं का राजा वसंत आया तो है।
सोहन लाल भारती ने अपनी भाव पूर्ण प्रस्तुति में नेक सलाह देते हुए कहा कहा :
ख़ुद को सुधारो जग ख़ुद सुधर जाएगा
ईर्ष्या द्वेष व लोभ त्यागो, आपका स्वास्थ्य भी सुधरेगा
सब ख़ुद ही ठीक हो जाएगा।
प्रदीप राजपूत माहिर जी ने अपने इस मार्मिक शेर से सबकी वाही वाही लूटी :
क्या निराले खेल हैं तक़दीर के,
श्वान भी हक़दार हैं अब खीर के।
विनोद कुमार शर्मा ने अपने मधुर कंठ से शारदे माँ का आशीष मांगते हुए भावपूर्ण प्रस्तुति दी :
अंतर्मन तमस भरा है माँ,निज कृपा रश्मि की वृष्टि करो।
पावन कर दो निज आशिष से,दे दो जग को अविरल वाणी।
सुमित सिंह मीत ने अपना यह शानदार शेर पढ़ा :
घर का आंगन है छोटा मगर रहने वालों का दिल है बड़ा,
खुशबुएं प्यार की हैं यहां नफरतों का बसेरा नहीं।
गौरव नायक ने अपनी दमदार प्रस्तुति देते हुए कहा
समुंदर ग़म का भी कितना बड़ा है,
जिसे देखो वही डूबा हुआ है।
उत्कर्ष सारस्वत ने अपनी भाव अभिव्यक्ति देते हुए कहा :
जब आता चुनाव रोज़ दीवाली होती,
वोटर के घर रोज़ नई एक टोली होती।
सचिन सिंह सार्थक ने अपनी सार्थक प्रस्तुति देते हुए कहा
तेजस्वी नायक ओजस्वी प्रखर हमारे नेता जी,
बरसों बीते मगर दिलों में अमर हमारे नेता जी।
उपरोक्त के अतिरिक्त गोष्ठी में सीताराम शर्मा,सुनील कुमार वैश्य, दीपक गुप्ता एडवोकेट तथा करुणा शर्मा---- आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। अंत में सुस्वादु जलपान के बाद आयोजक राजीव कुमार शर्मा जी ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम समापन की घोषणा की।
गोष्ठी की शानदार कवरेज के लिए हम सम्मानित समाचार पत्रों हिन्दुस्तान, अमर उजाला तथा अमृत विचार के प्रतिनिधियों का हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं 🙏🙏
शानदार आलेख मान्यवर!💐💐
ReplyDeleteहार्दिक आभार भाई जी।
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