March 17, 2025

'अपनी कॉलोनी' का होली के अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम संपन्न

फागुन का मस्त महीना है।खेतों में सरसों फूली हुई है। बाग़ों में ख़ुशबूदार पुष्प किलोल कर रहे हैं।आम के पेड़ सुगंधित बौर से लदे हुए हैं।कहने का अर्थ यह है कि प्रकृति का यौवन पूरे शबाब पर है। ऐसे में होली के मस्त त्योहार के आगमन से सभी का मन प्रफुल्लित है और रंग खेलने को उतावला है। रंग-गुलाल की इसी ख़ुमारी में  'अपनी कॉलोनी' (निकट किड्जी स्कूल) रामपुर का होली के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय रंग उत्सव तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम धूमधाम के साथ संपन्न हुआ।
रंग वाले दिन (14मार्च,2025)प्रात: 9 बजे से 'अपनी कॉलोनी' वासियों द्वारा एक दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभ कामनाएं दी गईं।होली के मस्त गानों पर जमकर धमाल मचाया गया।
  इस समय मुझे प्रसिद्ध कवि नीरज गोस्वामी की यह पंक्तियाँ याद आ रही हैं :
         करें जब पांव ख़ुद नर्तन, समझ लेना कि होली है,
         हिलोरें  ले रहा हो मन, समझ लेना  कि  होली है।
                                       -- नीरज गोस्वामी 
 कार्यक्रम के अंत में सभी ने मिलकर ठंडाई तथा गुझिया, खस्ता कचौड़ी आदि लज़ीज़ व्यंजनों का लुत्फ़ उठाया गया।
अगले दिन यानि 15 मार्च ,2025 को होली कार्यक्रमों के दूसरे चरण का शुभारंभ कॉलोनी की वरिष्ठ सदस्या श्रीमती दर्शन  रस्तौगी ने मां शारदे के समक्ष पुष्प अर्चन तथा दीप प्रज्ज्वलन  के द्वारा किया।
दीप प्रज्ज्वलन के पश्चात कॉलोनी की महिला शक्ति द्वारा इतनी "शक्ति हमें देना दाता,मन का विश्वास कमज़ोर हो ना" ईश वंदना प्रस्तुत की गई।
.    (ईश वंदना प्रस्तुत करते हुए श्रीमती आशा भांडा,           श्रीमती पूनम गुप्ता, श्रीमती सपना अग्रवाल तथा           श्रीमती रेखा सैनी जी)

बच्चों के मन निर्विकार होते हैं यही सोचकर शायद निदा फ़ाज़ली साहब ने उनके लिए यह शेर कहा होगा-- 
          बच्चों  के छोटे  हाथों  को चाँद सितारे छूने दो,
          चार किताबें पढ़कर ये भी हम जैसे हो जाएंगे।
                                         -- निदा फ़ाज़ली 
बच्चों से ही घर-परिवार में रौनक़ होती है यही सोचकर कार्यक्रम का शुभारंभ बच्चों की प्रस्तुतियाँ से कराया गया। उन्होंने गीत, संगीत,नृत्य, कविता तथा चुटकुलों आदि से उपस्थित दर्शकों/अभिभावकों का भरपूर मनोरंजन करके अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।

 (कॉलोनी के प्रस्तुति देने वाले बच्चे आयुषी अग्रवाल, हर्षित दिवाकर, वान्या,भव्या, अवनि, इशिका तथा ग्रंथ भांडा)
बच्चों की शानदार परफॉर्मेंस की करतल ध्वनि से प्रशंसा करते हुए उन्हें गिफ्ट्स आदि देकर प्रोत्साहित किया गया। बच्चों के प्रति इस प्रकार का gesture उन्हें भविष्य में अच्छे कलाकार बनने में मददगार हो सकता है।
नारियां ही सृष्टि और घर परिवार का आधार होती हैं। दुःख दर्द और पीड़ा सहकर घरों को जोड़े रखने वाली नारियों के लिए कवयित्री गरिमा अंजुल ने ठीक ही कहा है --- 
        सूना    है   नारी    बिना,यह   सारा  संसार।
        वह मकान को घर करे, देकर अपना प्यार।।
                               --- गरिमा अंजुल
अपनी कॉलोनी की महिला सदस्य भी कहाँ पीछे रहने वाली थीं। उन्होंने भी अपनी-अपनी धमाकेदार 
प्रस्तुतियों से कार्यक्रम की भव्यता और सफलता में चार चांद लगाए। कार्यक्रम को गति देने के लिए श्रीमती आशा भांडा ने हाऊजी कार्यक्रम का संयोजन किया जिसमें लोगों ने ख़ूब रुचि दिखाई।
श्रीमती सपना अग्रवाल तथा श्रीमती पूनम गुप्ता जी ने क्रमशः पति पत्नी के रोल करते हुए एक शानदार शानदार प्रहसन/चुटिला संवाद प्रस्तुत करके सबकी तालियां बटोरीं। श्रीमती सपना अग्रवाल ने बीच बीच में चटपटे सवाल पूछकर माहौल को ख़ुशगवार बनाए रखने में भी सहयोग किया।
श्रीमती रेखा सैनी ने भी फिल्मी गीत "इक प्यार का नग़्मा है, मौजों की रवानी है" प्रस्तुत करके दर्शकों का ध्यान खींचा :

कार्यक्रम में श्रीमती पूनम जी (Mrs Dr Vijay kumar) ने भी poetry recital  करके सबकी वाही वाही लूटी।
सांस्कृतिक कार्यक्रम में सहभागिता करने वालों से तालमेल बनाकर अंतिम रूपरेखा के लिए बैठकों का आयोजन करने तथा संचालन में श्रीमती पूनम गुप्ता जी तथा श्रीमती आशा भांडा जी का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम को मूर्त रूप देने में आप दोनों का विशेष रूप से आभार प्रकट करते हैं।
पुरुष वर्ग के तो क्या ही कहने उन्होंने अपनी अपनी अभिव्यक्तियों से जहां एक और अपनी पत्नियों को प्रभावित किया वहीं पंडाल में उपस्थित लोगों को भी तालियां बजाने के लिए विवश किया।

 (ऊपर के चित्र में ☝️:प्रस्तुति देने वाले पुरुष वर्ग के सदस्य प्रवीण भांडा, ओंकार सिंह विवेक, वीर सिंह, राजीव अग्रवाल,निखिल भांडा तथा अतर सिंह जी)

कार्यक्रम का आनंद लेते हुए कॉलोनी का युवा वर्ग👇👇
कार्यक्रम में उपस्थित पुरुष वर्ग की यादगार/शानदार तस्वीर 👇👇
डॉक्टर विजय कुमार और राजीव अग्रवाल ने तो अपने दिल फ़रेब डांस से समां ही बांध दिया 

कार्यक्रम के अंतिम चरण में सबने मिलकर फूलों की होली खेली।
आर के गुप्ता जी ने बड़ी सादगी के साथ सभी का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कार्यक्रम समापन की घोषणा की।
सुस्वादु सहभोज के पश्चात अगले वर्ष दूने उत्साह से मिलने के प्रण के साथ सबने अपने अपने घर की राह ली।
यों तो सभी कॉलोनी वासियों के तन-मन तथा धन के सहयोग के चलते ही ऐसा शानदार कार्यक्रम हो पाया।परंतु फिर भी इस कार्यक्रम को लीड करने में प्रवीण भांडा,अंकुर रस्तौगी,के के अग्रवाल एडवोकेट तथा आर के गुप्ता जी की विशेष भूमिका के चलते उनके प्रति अतिरिक्त आभार प्रकट करना हम सबका दायित्व बनता है। इस अवसर पर कॉलोनी की सफ़ाई व्यवस्था में अपेक्षा से अधिक सहयोग करने के लिए वार्ड मेंबर अशोक सैनी की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए उन्हें सम्मानित करने का भी निश्चय किया गया।
सम्मानित मीडिया/अख़बार (दैनिक जागरण, अमर उजाला, हिन्दुस्तान तथा अमृत विचार)वाले सम्मानित बंधुओं का 'अपनी कॉलोनी' रामपुर के कार्यक्रम की शानदार कवरेज करने के लिए हम दिल की गहराईयों से आभार प्रकट करते हैं :

मुझे अपनी कॉलोनी के इस शानदार कार्यक्रम के संचालन का दायित्व निर्वहन करके हार्दिक प्रसन्नता का अनुभव हो रहा है। 
काश ! सब लोग पूर्वाग्रहों से दूर रहते हुए भविष्य में भी यों ही एक दूसरे के प्रति आत्मीयता प्रदर्शित करते रहें इसी कामना के साथ इस लंबी blog post को बशीर बद्र साहब के इस शेर के साथ विराम देता हूं :
         मुसाफ़िर हैं हम भी, मुसाफ़िर हो तुम भी,
          किसी  मोड़  पर  फिर  मुलाक़ात  होगी।

प्रस्तुतकर्ता 
ओंकार सिंह विवेक 
--- साहित्यकार/समीक्षक/कंटेंट राइटर/टैक्सट ब्लॉगर 
                
        

4 comments:

  1. Vah vah,nice coverage of a nice programme

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  2. समाज के सभी लोगों का मिलकर होली के अवसर पर अति सुंदर आयोजन !

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    1. उत्साहवर्धन हेतु आभार आदरणीया

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