June 16, 2026

उत्तर प्रदेश साहित्य सभा रामपुर इकाई की 13 वीं काव्य गोष्ठी/निशस्त


साहित्य और साहित्यकारों का काम हमेशा से अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक सरोकारों की पैरवी करना और आपसी सौहार्द को बढ़ाना रहा है। जब-जब लोग इंसानियत और मेलजोल के रास्ते से भटके हैं, साहित्यकारों ने तब-तब अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज को प्रेम,शांति,सद्भाव तथा आपसी सौहार्द का संदेश देकर जागरूक करने का प्रयास किया है।
अपने इन्हीं दायित्वों को पूरा करने की कड़ी में 
उत्तर प्रदेश साहित्य सभा रामपुर इकाई की 13 वीं काव्य गोष्ठी/निशस्त सभा के नए संरक्षक शायर नईम नज्मी जी के सौजन्य से सौलत पब्लिक लाइब्रेरी रामपुर में  सफलतापूर्वक संपन्न हुई।गोष्ठी की अध्यक्षता लाइब्रेरी के सद्र जनाब डॉo महमूद अली ख़ान साहब ने की तथा जावेद रहीम जी,नईम नज्मी जी तथा ओंकार सिंह विवेक क्रमशः मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि के तौर पर मंच पर विराजमान रहे।

गोष्ठी में पधारे रचनाकारों ने समसामयिक विषयों पर अपनी धारदार रचनाओं के पाठ से आमंत्रित श्रोताओं तथा मेहमानों का दिल जीत लिया। काव्य रचनाओं में हिन्दी एवं उर्दू का अद्भुत संगम देखने को मिला,जो आज की एक बड़ी ज़रूरत भी है।
अपने दिलकश तरन्नुम में ग़ज़ल पढ़ते हुए सभा के सचिव राजवीर सिंह राज़ ने कहा 

दर्द    में    भी    मुस्कुराकर  देखना,

ज़ब्त  अपना   आज़माकर   देखना।

जान लेंगे  हम भी तेरे दिल की बात,

गीत   कोई     गुनगुनाकर    देखना।

 जावेद रहीम जी ने आज के इंसान की हक़ीक़त कुछ इस तरह बयान की

अपने हमदर्दों को अपना ही दर्द बनते देखा है,    

बदलते  इंसानों  को  बहुत  करीब  से  देखा है।

डॉ प्रीति अग्रवाल ने वृक्षों की महत्ता का बखान करते हुए अपने दोहे पढ़े 

वृक्ष  हमारा  हर  तरह, रखते हरपल ध्यान। 

बिन इनके पाता नहीं, ऑक्सीजन इंसान ।।

वृक्षों  ने हम  पर  किया, सदा-सदा उपकार। 

मानव   है   इनके  बिना, सारा  ही  बेकार ।।

उत्तर प्रदेश साहित्य सभा रामपुर इकाई के अध्यक्ष ओंकार सिंह विवेक ने बिगड़ी हुई व्यवस्था के प्रति अपना आक्रोश व्यक्त करते हुए जब ये अशआर पढ़े तो श्रोताओं ने बार-बार तालियाँ बजाकर उत्साहवर्धन किया 


पेट   हमारा   भरते   हैं   वो   वा'दों-ना'रों   से,

ये  कैसी  हमदर्दी  है  हम  ग़म   के   मारों  से।

बोलो क्यों तासीर तुम्हारी आज ख़िज़ाँ-सी है?

पूछ  रहे  हैं  गुलशन  के  सब  फूल  बहारों से। 

            -- ओंकार सिंह विवेक 

सुधाकर सिंह परिहार जी ने इंसान को अपनी ताक़त पहचानने के लिए प्रेरित करते हुए कहा 

अपनी कमजोरी निर्बलता का रोना इंसान कब तक  रोयेगा।। ये बेबसी और लाचारी कब तक ढोयेगा ।। वो पकड़े तो सहे खींचे तो सही ईश्वर के‌ पास सबकी डोर है।।बस एक बार वो  सोचे क्या वो पशु पक्षी से भी कमजोर है।।... सुधाकर सिंह परिहार

सभा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष फ़ैसल मुमताज़ ने अपने

ख़यालात का इज़हार करते हुए कहा 

वो जिससे दिल दुखे इंसानियत का! 

उन्हीं लफ़्ज़ों को बोला जा रहा है!!

सहारा लेकर सोशल मीडिया का!!!

फ़ज़ा में ज़हर घोला जा रहा है!!

रश्मि चौधरी ने अपनी अभिव्यक्ति देते हुए कहा 

तुम वजह ना पूछो मुस्कुराने की 

मुझको आदत है गम छुपाने की

सभा के सह सचिव सुमित सिंह मीत ने अपने धारदार अशआर पढ़ते हुए कहा 

चलो माना कि इंग्लिश जानते हो 

तो क्या हिंदी को भी पहचानते हो? 

तुम्हें बच्चों की ग़लती दिख रही है 

कहा तुम कब बड़ों का मानते हो

स्थानीय इकाई के संयोजक सुरेंद्र अश्क रामपुरी ने अपने इन जदीद शेरों से सबका ध्यान खींचा 

आँधियों का दम निकाला जाएगा

अब दिये में खून डाला जाएगा

कब सियासत को समझ पाएंगे हम 

कब इन आँखों से ये जाला जायेगा

जनगणना के दौरान आम जनता द्वारा किए जा रहे सवालों  पर आधारित गीत पेश करते हुए सचिन सार्थक ने कहा 

बेटा पढ़ा लिखा है , क्या 

कोई काम लगा सकते हो ?

बियाह रचाना है बेटी का 

कुछ मदद दिला सकते हो?  

जन - बच्चा सब गिने

 हमारे घर - दीवारें जाने 

एक ईंट भी लगवा दो 

तो तुम्हें काम का मानें 

अगर नहीं तो क्यों छूते हो 

टूटा दिल , अंगार से ?

सभा के संरक्षक शायर नईम नज्मी साहब ने अपने ये बेहतरीन अशआर तरन्नुम में पेश करके भरपूर दाद पाई 

मेरी उड़ान पे कोई असर हुआ ही नहीं 

मुनाफिकों ने परों को कतर के देख लिया 

सिवाए मेरे कोई आँख नम हुई ही नहीं

ऐ जिन्दगी तुझे सौ बार मर के देख लिया 

उल्लिखित कवि शायरों के अलावा गौरव नायक, इफ्तेख़ार साहिल,ज़ीशान मुराद, शिव कुमार चन्दन, पतराम सिंह, जसप्रीत कौर जस्सी तथा नवीन पाण्डेय -----     आदि ने भी गोष्ठी में अपना शानदार कलाम पेश किया। लाइब्रेरी के सद्र जनाब डॉo महमूद अली ख़ान साहब ने काव्य पाठ करने वाले सभी कवियों/शायरों को प्रतीक चिह्न प्रदान करके उनके प्रति सम्मान प्रकट किया।

अपने उद्बोधन में जनाब डॉo महमूद अली ख़ान साहब ने गोष्ठी को कामयाब बताते हुए सभी को मुबारकबाद पेश की।

(साहित्यकारों/अदीबों को संबोधित करते हुए लाइब्रेरी के सद्र जनाब डॉo महमूद अली ख़ान साहब)

 उन्होंने भविष्य में भी पारस्परिक मेलजोल तथा सौहार्द बढ़ाने वाले ऐसे कार्यक्रमों के आयोजनों की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। सूक्ष्म जलपान के बाद गोष्ठी/निशस्त के समापन की घोषणा की गई।कार्यक्रम का सफल संचालन सचिव राजवीर सिंह राज़ द्वारा किया गया।

हम सौलत पब्लिक लाइब्रेरी के सद्र डॉo महमूद अली ख़ान साहब तथा अन्य पदाधिकारियों सहित श्री नईम नज्मी साहब का इस सुंदर आयोजन में मन से सहयोग करने के लिए दिल की गहराईयों से आभार व्यक्त करते हैं 🌹🌹🙏🙏

प्रस्तुतकर्ता 
ओंकार सिंह विवेक 
अध्यक्ष,उत्तर प्रदेश साहित्य सभा रामपुर इकाई 

गंगा-जमुनी तहज़ीब को फ़रोग़ देने के मक़सद से आयोजित किए गए इस कार्यक्रम की समाचार पत्रों द्वारा शानदार कवरेज करने के लिए हम उनका हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं 🙏
       



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