February 20, 2026

प्रसंगवश


नमस्कार मित्रो 🌹🌹🙏🙏

आज यात्रा के दौरान एक जंगल से गुज़रना हुआ। हरियाली और फलों से लदे हुए वृक्षों को देखकर दिल बहुत ख़ुश हुआ।
उसी समय कई ऐसी घटनाएँ भी स्मृति में कौंध गईं जब हमने लोगों को बेरहमी से फलों से लदे हुए वृक्षों को काटते हुए देखा था। ऐसे तमाम दृश्य हृदय को अक्सर झकझोरते रहते हैं। मुझे अपनी काफ़ी समय पहले कही गई ग़ज़ल का मतला और एक शेर याद आ रहा है :

            शीशम  साखू   महुआ   चंदन  पीपल   देते  हैं,

            कैसी-कैसी  ने'मत   हमको   जंगल   देते   हैं।


           आज बना  है मानव  उनकी ही जाँ का दुश्मन,

           जीवन  भर  जो  पेड़  उसे  मीठे  फल  देते हैं।

                                      --- ओंकार सिंह विवेक 

                  (सर्वाधिकार सुरक्षित) 


काव्य संसार 🌹🌹🌱🌿👈

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