सूरज दादा की कुहरे से रोज़ लड़ाई है
*******************************
साल 2025 को विदाई देते हुए और आने वाले साल में शुभ की कामना के साथ उत्तर प्रदेश साहित्य सभा रामपुर इकाई की एक काव्य गोष्ठी/निशस्त सभा के सक्रिय सदस्य सोहन लाल भारती के कृष्णाविहार आवास पर संपन्न हुई।गोष्ठी में कविजनों ने समसामयिक विषयों पर रचनाएँ सुनाकर सबको मंत्रमुग्ध किया।गोष्ठी की अध्यक्षता शिवकुमार चन्दन ने की तथा ओंकार सिंह विवेक एवं सोहन लाल भारती क्रमशः मुख्य अतिथि व विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।मेज़बान सोहन लाल भारती जी के परिजनों ने पुष्प गुच्छ भेंट करके कवियों का स्वागत किया।
डॉo प्रीति अग्रवाल द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत करने के उपरांत मंच पर आए कवि पतराम सिंह ने सामयिक प्रस्तुति देते हुए कहा
साल आख़िर में दिल कुछ उदास सा हुआ,
हर बीता लम्हा आज बहुत पास सा हुआ।
ओंकार सिंह विवेक ने कड़क सर्दी की अपनी ग़ज़ल में कुछ इस तरह तस्वीर खींची
जब से हाड़ कंपाती निष्ठुर सर्दी आई है,
सूरज दादा की कुहरे से रोज़ लड़ाई है।
जाड़े कैसे कटते होंगे आप ज़रा सोचें,
कंबल ही है पास न उसके कोई रज़ाई है।
शिव कुमार चन्दन ने ठंड से दूभर हो रहे जीवन पर अपना यह दोहा पढ़कर सबका ध्यान आकृष्ट किया
पाला कुहरा साथ ले, जाड़ा करे कमाल।
तीव्र हवा की मार से,जीना हुआ मुहाल।।
राजवीर सिंह राज़ ने पतित पावनी गंगा की महत्ता का
बख़ान करते हुए कहा
निर्मल शीतल पावन कल कल बहता नीर तुम्हारा,
हे माँ गंगे पाप सभी के हरता नीर तुम्हारा।
अपने अच्छे तरन्नुम के लिए जाने जाने वाले शायर अशफ़ाक़ रामपुरी ने इस शेर पर सबकी वाही वाही लूटी
याद बेवफ़ा को तुम बेशुमार मत करना,
दिल को आज इतना भी बेक़रार मत करना।
डॉo प्रीति अग्रवाल ने देश के वीरों के सम्मान में पढ़ा
मातृभूमि की रक्षा में ही अपने प्राण गंवाते हैं,
नमन करूं मैं उन वीरों को जो शहीद हो जाते हैं।
अपनी रचना में सशक्त भाव भरते हुए सुधाकर सिंह परिहार ने कहा
मंज़िल तक न सही कुछ दूर तलक तो जा पाते,
हम ये दीवार हटा पाते,जो कहा सुनी थी आपस की
उसका कुछ रंज मिटा पाते।
मेज़बान सोहन लाल भारती ने अपने हृदय के भाव व्यक्त करते हुए कहा
फ़ुर्सत से तू आ जाना हम तेरी राह में खड़े,
भटक न जाए ये मनवा नैन बिछा बैठे बैठे।
नए साल के संदर्भ में कहे गए अपने इन शेरों पर प्रदीप राजपूत माहिर को भी श्रोताओं की भरपूर दाद मिली
फ़क़त कलैंडर में साल बदले,
थी मेरी कोशिश कि हाल बदले।
तभी तो बदलेगा वक़्त मेरा,
अगर सितारों की चाल बदले।
पूनम दीक्षित ने गुरु गोविंद सिंह जी के नौनिहालों की वीरता पर अपनी ये पंक्तियां पढ़ीं
मेरे देश के नौनिहालों सुनो,
सुनकर अपने हृदय में गुनो।
यह बात है दो बाल वीरों की,
शेर दिल थे जो ऐसे धीरों की।
देर रात तक चली इस कवि गोष्ठी में अन्य लोगों में मनोहर लाल, अनूप कुमार सिंह, शारदा देवी, पूनम सिंह, अरुण कुमार सिंह,स्पर्श तथा अंशु आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। गोष्ठी का सफल संचालन सभा के सचिव राजवीर सिंह राज़ द्वारा किया गया।समापन पर सभा की स्थानीय इकाई के अध्यक्ष ओंकार सिंह विवेक ने सभी का आभार प्रकट किया।
कृष्णा विहार ज्वाला नगर स्थित कवि वर सोहन लाल भारती के आवास पर काव्य गोष्ठी का आयोजन उत्तर प्रदेश साहित्य सभा रामपुर की ओर से हुआ । काव्य गोष्ठी में उपस्थित कवि , कवयित्रियों , एवं श्रोताओं की तालियां शानदार काव्य पाठ की गवाही दे रहीं थीं । सुंदर आयोजन की बहुत बहुत बधाई । - शिव कुमार चंदन
ReplyDeleteब्लॉग पर कॉमेंट करने के लिए आभार आदरणीय 🙏
DeleteSabhi ko badhai
ReplyDeleteहार्दिक आभार
Delete