September 14, 2024

प्रथमा यू पी ग्रामीण बैंक सेवा निवृत्त कर्मचारी कल्याण समिति के दो प्रमुख आधार स्तंभ

  (प्रथमा यू पी ग्रामीण बैंक सेवानिवृत्त कर्मचारी कल्याण समिति के अध्यक्ष श्री अनिल कुमार तोमर जी एवं महासचिव श्री इरफ़ान आलम जी)

मित्रो संगठन की महत्ता और उसकी शक्ति को हम सब लोग भली भांति जानते है। संगठित रहकर ही हम अपने  अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ सकते हैं, शासन-प्रशासन तक अपनी बात पहुंचा सकते हैं और अपना शोषण होने से रोक सकते हैं।यह बात तब और महत्वपूर्ण हो जाती है जब हम सेवा से अवकाश ग्रहण कर चुके हों।नौकरी से रिटायरमेंट के बाद व्यक्ति के पास वह अथॉरिटी या एक्जीक्यूटिव पावर्स नहीं रह जातीं जिनके प्रभाव से वह अपनी समस्या का इतनी आसानी से समाधान करा सके। उस समय संगठन की शक्ति और महत्ता का एहसास होता है। प्रसंगवश मुझे किसी शा'इर का यह शे'र याद आ रहा है :
ख़ुदा  ने  आज  तक  उस  क़ौम की  हालत  नहीं  बदली,
न हो जिसको ख़याल आप अपनी हालत के बदलने का।

वास्तव में ईश्वर या भाग्य भी तभी साथ देता है जब हम ख़ुद अपने भले के लिए चिंतित होकर सार्थक तथा संगठित प्रयास करते हैं।जब हमें ख़ुद ही अपने अधिकारों की प्राप्ति के लिए उचित उपायों की चिंता नहीं होगी तो भला कौन हमारी रक्षा करेगा।
यह सब बातें मैंने संगठन की शक्ति को स्पष्ट करने के लिए कहीं।
संगठन की शक्ति को समझने के बाद आईए अब मूल विषय पर आते हैं। रिटायर्ड साथियों के अधिकारों के लिए संघर्षरत प्रथमा यू पी ग्रामीण बैंक सेवानिवृत्त कर्मचारी कल्याण समिति एक ऐसा ही संगठन है जो निरंतर अपना विस्तार करते हुए कामयाबी के साथ गतिमान है।संगठन की सफलता में उसके सदस्यों की सक्रियता के साथ-साथ दमदार लीडरशिप की भी बड़ी भूमिका होती है।यदि संगठन की कमान ईमानदार, कर्मठ और समर्पित हाथों में होती है तो संगठन का सभी लोहा मानते हैं अन्यथा ---।
यह गर्व की बात है कि इस संगठन की कमान बहुत ही समर्थ और जुझारू हाथों में है। यही कारण है कि  समिति की धूम राष्ट्रीय स्तर तक है। यों तो संगठन की सफलता में सदस्यों और सभी कार्यकारिणी पदाधिकारियों की महती भूमिका है परंतु आज मैं यहां मुख्य रूप से समिति के अध्यक्ष श्री अनिल कुमार तोमर जी तथा महासचिव श्री इरफ़ान आलम जी का उल्लेख करना चाहता हूं।
अध्यक्ष श्री अनिल कुमार तोमर जी की बात करूं तो आप बेहद मिलनसार,सौम्य ,मृदुभाषी तथा बैंकिंग मामलों की गहन जानकारी एवं समझ रखने वाले व्यक्ति हैं।विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों से बिना डिगे आपने ईमानदारी के साथ बैंक में अपना सेवा काल पूर्ण किया।आप जैसा ईमानदार,कर्मठ और सक्षम व्यक्ति समिति के अध्यक्ष पद पर शोभायमान है यह सबके लिए गर्व की बात है। समिति के महासचिव श्री इरफ़ान आलम साहब की बात की जाए तो आप भी बहुत विनम्र,व्यवहार कुशल और लीडरशिप के गुणों से संपन्न व्यक्तित्व के स्वामी हैं। आपने भी कामयाबी के साथ बैंक में अपना सेवाकाल पूर्ण किया।आज आप दोनों की जोड़ी अपनी टीम के साथ समिति का निरंतर विस्तार करते हुए जिस सफलता के साथ इसका संचालन कर रही है उसकी जितनी प्रशंसा की जाए वह कम है।आपके अथक प्रयासों से समिति की गतिविधियों के विस्तार के क्रम में क्षेत्रीय इकाईयों का भी गठन किया गया है जो बहुत सक्रियता से सांगठनिक क्रिया कलापों के साथ सामाजिक कार्यों में भी बढ़ चढ़कर हिस्सेदारी कर रही हैं।समिति के पदाधिकारियों की सक्रियता के कारण इसकी सदस्य संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है जो संगठन के स्थायित्व के लिए शुभ संकेत है।इस समय समिति को भविष्य में नेतृत्व हेतु second line की भी शिद्दत से तलाश है जिसके लिए लीडरशीप के गुणों से संपन्न सक्रिय सदस्यों को आगे आना चाहिए।
दिनांक 21 सितंबर,2024 को मुरादाबाद में  केंद्रीय समिति की आम सभा होना प्रस्तावित है जिसकी तैयारी ज़ोर-शोर से चल रही है।इस सिलसिले में केंद्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों की एक बैठक दिनांक 2 सितंबर,2024 को अध्यक्ष श्री अनिल कुमार तोमर जी के आवास पर आयोजित की गई जिसमें प्रस्तावित आम सभा के सफलता पूर्वक आयोजन के लिए सदस्यों को दायित्व सौंपे गए।अध्यक्ष तथा महासचिव महोदय ने बताया कि समिति की इस बार की आम सभा ख़ास होगी क्योंकि इसमें बैंक यूनियंस के तमाम राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारी भाग लेंगे। आम सभा में संगठनात्मक गतिविधियों तथा विभिन्न लंबित मुद्दों को लेकर गहन विमर्श होगा।प्रथमा यू पी ग्रामीण बैंक के चेयरमैन श्री संजीव भारद्वाज जी कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे।
इस अवसर पर समिति के सभी सदस्यों से अपील की गई कि अपने-अपने क्षेत्रों से आम सभा में अधिक से अधिक संख्या में साथियों के साथ उपस्थित होकर कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना योगदान दें।
अत सभी साथियों से अपील है कि अधिक से अधिक संख्या में उक्त कार्यक्रम में पहुंचकर समिति की 
संगठन-शक्ति का एहसास कराएं।
धन्यवाद !

(प्रस्तुति : ओंकार सिंह विवेक) 




September 7, 2024

सुख़न के रंग


दोस्तो लीजिए हाज़िर है मेरी एक ग़ज़ल 🌷🌷🙏🙏
***********************************************
                  ©️ 

               अलग जीवन  की रंगत  हो  गई  है,

               भलों की जब से सोहबत हो गई है।


                कहा है  जब  से  उसने  साथ हूँ मैं,

                हमारी   दूनी   ताक़त  हो   गई  है।


                तलब करने लगी अब हक़ रि'आया, 

                चलो  इतनी  तो  हिम्मत  हो गई है।


               शिकायत कुछ नहीं  हमको ग़मों से,

               ग़मों  को  ये  शिकायत  हो  गई  है।

 

               गुज़र  कैसे  करें  तनख़्वाह  में फिर,

               उन्हें  रिश्वत  की  जो  लत हो गई है।


              है जस की तस ही,लेकिन फ़ाइलों में,

              ग़रीबी  कब  की  रुख़सत  हो गई है।


             हमें   भाये   भी   कैसे  सिन्फ़   दूजी,

             ग़ज़ल  से   जो   मुहब्बत  हो  गई  है।

                            ©️ ओंकार सिंह विवेक 


पेश है ताज़ा कलाम 🌷🌷👈👈






       






              

Featured Post

सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल (बनारस यात्रा भाग -1)

सफ़र की हद है वहाँ तक कि कुछ निशान रहे, चले  चलो  के  जहाँ  तक   ये  आसमान  रहे। ये क्या उठाये क़दम और  आ गई मन्ज़िल...