उत्तर प्रदेश साहित्य सभा की रामपुर इकाई अपने सक्रिय सदस्यों तथा पदाधिकारियों के सहयोग के चलते नगर में निरंतर साहित्यिक अलख जगाए हुए है।सर्जनात्मक साहित्य का सृजन भी समाज सेवा का एक सार्थक माध्यम है। साहित्य सभा के सदस्य अपने सामाजिक सरोकारों को समर्पित काव्य सृजन के माध्यम से यह कार्य निरंतर पूरी ज़िम्मेदारी के साथ करते आ रहे हैं।
इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश साहित्य सभा रामपुर इकाई की बारहवीं काव्य गोष्ठी सभा के सदस्य सुमित सिंह मीत के आतिथ्य में दिनांक 17/5/2026 को संपन्न हुई।
गोष्ठी की अध्यक्षता साहित्यकार शिवकुमार चंदन द्वारा की गई तथा चंदौसी से पधारे शायर नईम चंदौसवी मुख्य अतिथि के तौर पर सम्मिलित रहे।
अतिथियों के स्वागत तथा सरस्वती वंदना के पश्चात उपस्थित रचनाकारों ने क्रमवार समसामयिक विषयों पर अपनी धारदार रचनाएँ सुनाकर महफ़िल की वाही वाही लूटी।
नीलम रानी सक्सैना ने अपनी रिवायती रचना प्रस्तुत करते हुए कहा
तुम्हें प्यार करके पड़ेगा निभाना,
सता ले हमें आज कितना ज़माना।
सभा की स्थानीय इकाई के अध्यक्ष ओंकार सिंह विवेक ने सामाजिक सरोकारों को समर्पित अपने शेर पढ़ते हुए कहा
ढूंढिए मत उनमें कुछ मेयार अब,
इनके-उनके हो गए अख़बार अब।
कौन फिर परचम उठाए अम्न का,
सबके हाथों में तो हैं हथियार अब।
सभा के संयोजक सुरेंद्र अश्क रामपुरी ने सामाजिक विसंगतियों पर शेर पढ़ते हुए कहा
लोग परेशाँ घूम रहे हैं,
आप तो काजू टूम रहे हैं।
सचिव राजवीर सिंह राज़ ने अपना बा-तरन्नुम कलाम पेश किया
घर कोई कब घर लगता है,
जब अपनों से डर लगता है।
गौरव नायक ने पढ़ा
जाना पड़ेगा वक़्त की रफ़्तार से परे,
ऐ ज़िंदगी कहीं तो तेरी रेस ख़त्म हो।
उपाध्यक्ष प्रदीप राजपूत माहिर ने अपनी पुर-असर शायरी पेश करते हुए कहा
हैरान हो रहा है मुसन्निफ़ भी देखकर,
किरदार ये कहाँ से कहानी में आ गया।
सुमित मीत ने कह
जो साँसों का शिकारा चल रहा है,
उसी से बस गुज़ारा चल रहा है।
पतराम सिंह ने दहेज़ प्रथा की त्रासदी कुछ यों अभिव्यक्त की
ना जाने कितनी बालाएँ हर दिवस बैठतीं डोली में,
सपने स्वाहा हो जाते हैं इस दहेज़ की होली में।
जसप्रीत कौर जस्सी ने राम नाम की महत्ता का बखान करते हुए कहा
राम का नाम जपने से बन जाते सब काम,
लूट लो माया राम नाम की कोई नहीं इल्ज़ाम।
साजिद रामपुरी ने कहा
शुक्र करुँ किस तरह,आदाब सबको जोड़ने वाले तेरा,
दिल माँग रहे हैं फिर मुझसे दिल तोड़ने वाले मेरा।
प्रीति अग्रवाल ने गावों की बदलती दशा का चित्रण करते हुए कहा
बदल गया है गाँव सारा बदल गया परिवेश,
नगरों के जैसा लगे अब तो इनका वेश।
अशफ़ाक़ ज़ैदी ने तरन्नुम में अपनी ग़ज़ल पढ़ते हुए कहा
अजनबीयत है अभी, बात भी हो जाएगी,
ज़िंदगी तुझसे मुलाक़ात भी हो जाएगी।
मेहमान शायर नईम चंदोसवी ने सांप्रदायिक सौहार्द पर अपना मार्मिक शेर पढ़ते हुए कहा
आस्था से कोई रसखान भी हो सकता है,
श्याम का भक्त मुसलमान भी हो सकता है।
सुधाकर सिंह परिहार ने सामाजिक व्कविरोधाभासों का चित्रण करते हुए कहा
खोजा करते चौराहे पर अक्सर वो झबरा-मोती,
काश अगर अपनी क़िस्मत लूसी और टॉमी सी होती।
जावेद रहीम ने माँ को लेकर अपनी मार्मिक प्रस्तुति दी
माँ किस क़दर तड़पती होगी दुनिया से जाने के बाद,
क़ब्र पर वो राह देखती होगी शाम होने के बाद।
शायर श्री नईम नज्मी साहब को सर्वसम्मति से सभा का नया संरक्षक घोषित किया गया।
नईम नज्मी साहब ने माँ के हवाले से अपना कलाम पेश करते हुए कहा
सर पे आँचल डाल के अपने दरवाज़े तक आती थी,
मुझ को ख़ुदा हाफ़िज़ कहने को जब मैं बाहर जाता था।
गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे शिवकुमार चंदन जी ने बेटियों पर रचना पढ़ते हुए कहा
कोमल सुहाने अंग/भरतीं विविध रंग/सुख-दुख जीवन में सहती हैं बेटियां/मान-मनुहार करें/करतीं सभी से प्यार/शीत में वसंत सी संवरतीं हैं बेटियाँ।
अंत में उत्तर प्रदेश साहित्य सभा रामपुर इकाई के पूर्व संरक्षक श्री ताहिर फ़राज़ साहब के असामयिक निधन पर सबने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। सभा के संयोजक सुरेंद्र अश्क रामपुरी द्वारा सभी का आभार व्यक्त करते हुए गोष्ठी के समापन की घोषणा की गई।
प्रस्तुत कर्ता :ओंकार सिंह विवेक
अध्यक्ष - उत्तर प्रदेश साहित्य सभा रामपुर इकाई
(चित्र संकलन सहयोग : राजवीर सिंह राज़,सचिव)
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