July 17, 2025

मुक्तक संसार

साथियो नमस्कार 💐💐🙏🙏

मुक्तक काव्य की ऐसी विद्या है जिसमें चार पंक्तियों में ही बड़ी मारक बात कह दी जाती है।पहली दो पंक्तियों में किसी विषय को उठाकर अंतिम पंक्तियों में बड़े कौशल के साथ शिल्प का निर्वहन करते हुए विषय को पूर्ण करना ही अच्छे मुक्तककार की पहचान है।
मैंने दो मुक्तकों के सृजन का प्रयास किया है जो आपके सम्मुख प्रस्तुत हैं। प्रतिक्रिया से अवश्य ही अवगत कराएं 🙏

        मुक्तक 1
        *******

मुरझाए से  हैं सब चेहरे जो रहते थे खिले हुए,

साफ़ दिखाई देते हैं विश्वास परस्पर हिले  हुए।

कैसे क़ाबू  पाया  जाए  बोलो  दहशतगर्दी पर,

अंदर वाले ही जब हों बाहर वालों से मिले हुए।

             मुक्तक 2

            ********

न  ही  भर   पेट  खाता  है   न   पूरी  नींद  सोता  है, 

अधिक  सामर्थ्य  से  अपनी  हमेशा  बोझ   ढोता है।

जिसे श्रम की कभी अपने उचित क़ीमत नहीं मिलती,

वही  मज़दूर   होता   है    वही    मज़दूर   होता    है। 

               ----ओंकार सिंह विवेक 


     सृजन संसार 💐💐👈👈

July 7, 2025

ग़ज़ल के पहलू में

नमस्कार मित्रो 🌹🌹🙏🙏

पेश है नई ग़ज़ल 
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      ग़ज़ल 
       ****
कण-कण में  त्रिपुरारी है,
उसकी  महिमा  न्यारी है।

ऊँचे  लाभ   की  सोचेगा,
आख़िर  वो  व्यापारी  है।

दो  पद, दो  सौ  आवेदन,
किस  दर्जा  बे-कारी   है।

स्वाद  बताता  है  इसका,
माँ   ने   दाल  बघारी  है।

काहे   के    वो   संन्यासी, 
मन    पूरा    संसारी    है।

चख लेता है  मीट  कभी,
वैसे      शाकाहारी     है।

उससे कुछ बचकर रहना,
वो   जो    खद्दरधारी   है।
©️ ओंकार सिंह विवेक



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