September 29, 2021

रात का एक ही बजा है अभी





फ़ाइलातुन   फ़ेलुन/फ़इलुन

ग़ज़ल--ओंकार सिंह विवेक
©️
रात   का   एक  ही  बजा है  अभी,
यार  घंटों  का    रतजगा  है  अभी।

हाथ    यूँ    रोज़    ही    मिलाते   हैं,
उनसे  पर  दिल नहीं मिला है अभी।

मुश्किलों को किसी  की जो समझो,
वक़्त  तुम  पर  कहाँ  पड़ा है अभी।
©️
सब  हैं  अनजान  उसकी चालों  से,
सबकी नज़रों  में  वो भला है अभी।

ज़िक्र  उनका   न   कीजिए  साहिब,
ज़ख़्म  दिल  का  मेरे  हरा  है अभी।

गुफ़्तगू    से    ये    साफ़   ज़ाहिर है,
आपको  हमसे  कुछ गिला है अभी।

और   उलझा   दिया   सियासत   ने,
हल  कहाँ  मसअला  हुआ है अभी।
     --  ©️ओंकार सिंह विवेक


          

September 20, 2021

कविसम्मेलन व साहित्यकार सम्मान समारोह

पल्लव काव्य मंच रामपुर,उ0प्र0 द्वारा कवि सम्मेलन
एवं साहित्यकार सम्मान समारोह का आयोजन
**********************************

हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत पल्लव काव्य मंच रामपुर द्वारा दिनाँक 19 सितंबर,2021 रविवार को मायादेवी धर्मशाला ज्वालानगर,रामपुर में एक भव्य कवि सम्मेलन एवं साहित्यकार सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में ऋषिकेश ,उत्तराखंड से पधारे संत बाबा कल्पनेश जी की अध्यक्षता में कवि सम्मेलन हुआ जिसके संचालन का अवसर मुझे प्राप्त हुआ।कवि सम्मेलन में उत्तर प्रदेश तथा उत्तराखंड से पधारे पच्चीस साहित्यकारों ने मातृभाषा हिंदी और सामाजिक सरोकारों को लेकर  रचित अपनी सुंदर रचनाओं से उपस्थित गणमान्य लोगों का दिल जीत लिया।

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में पहले "हिंदी- वर्तमान में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर दशा "  विषय पर एक परिचर्चा सम्पन्न हुई।परिचर्चा में हिंदी के तीन मूर्धन्य विद्वानों डॉ0 किश्वर सुल्ताना साहिबा, डॉ0 अरुण कुमार तथा डॉ0 कैलाश चंद्र दिवाकर द्वारा  बहुत ही  सार्थक  विचार व्यक्त किए गए।परिचर्चा के उपरांत चुने हुए स्थानीय एवं बाहर से पधारे साहित्यकारों को उनकी साहित्यिक सेवाओं हेतु अंगवस्त्र ,स्मृति चिन्ह व सम्मान पत्र प्रदान करके सम्मानित किया गया।इस सत्र में मुझे भी पल्लव काव्य मंच के व्हाट्सएप्प पटल पर आयोजित होने वाली ग़ज़ल कार्यशाला में समीक्षक के रूप में योगदान करने के लिए "पल्लव काव्य भारती सम्मान" देकर सम्मानित किया गया।इस सत्र का संचालन खटीमा ,उत्तराखंड के साहित्यकार भाई रामरतन यादव द्वारा किया गया।कार्यक्रम के अंत में पल्लव काव्य मंच के संस्थापक आदरणीय श्री शिवकुमार शर्मा चंदन द्वारा सभी आगंतुकों का मंच की और से आभार प्रकट किया गया।
इस अवसर के कुछ छाया चित्र संलग्न हैं-

September 11, 2021

याद फिर उनकी दिलाने पे तुली है दुनिया

ग़ज़ल--ओंकार सिंह विवेक
मोबाइल 9897214710

©️
याद  फिर  उनकी  दिलाने  पे  तुली है दुनिया,
चैन  इस  दिल  का  मिटाने पे तुली है दुनिया।

चोर  को   शाह  बताने   पे   तुली   है  दुनिया,
अपना  मेयार   घटाने   पे   तुली   है   दुनिया।

चंद  सिक्कों   के  लिए  बेचके ईमान - धरम,
"रात - दिन पाप  कमाने  पे  तुली  है दुनिया।"

अपने  आमाल  पे  तो  ग़ौर  नहीं करती कुछ,
बस   मेरे   ऐब   गिनाने  पे  तुली   है  दुनिया।

ख़ास  मतभेद   नहीं   उसके  मेरे  बीच, मगर-
सांप  रस्सी   का   बनाने   पे  तुली  है  दुनिया।

क्यों यूँ नफ़रत की हवाओं की हिमायत करके,
प्यार   के   दीप   बुझाने   पे   तुली  है  दुनिया।
             ---©️ ओंकार सिंह विवेक


Featured Post

'सदीनामा' अख़बार की मुहब्बतों का शुक्रिया

हमेशा की तरह एक बार फिर कोलकता के प्रतिष्ठित अख़बार 'सदीनामा' के संपादक मंडल, ख़ास तौर पर श्री ओमप्रकाश नूर साहब' का दिल की गहरा...